Inter State Trade : पश्चिम बंगाल में नई सरकार बनने के बाद कई बड़े प्रशासनिक फैसले लिए गए हैं। राज्य सरकार ने आलू, प्याज, फल, सब्जियों, तिलहन, खाद्यान्न और दूसरी जरूरी वस्तुओं (Essential Commodities) की दूसरे राज्यों में आवाजाही पर लगे सभी प्रतिबंध हटा दिए हैं। ये प्रतिबंध पिछली तृणमूल कांग्रेस सरकार के समय लगाए गए थे। सरकार का कहना है कि इन पाबंदियों की वजह से किसानों और व्यापारियों को काफी नुकसान उठाना पड़ रहा था। खासकर आलू किसानों को अपनी उपज सही कीमत पर बेचने में परेशानी हो रही थी।
किसानों और व्यापारियों को मिलेगी राहत
राज्य सरकार के इस फैसले से किसानों में खुशी का माहौल है। अब किसान अपनी फसल को बिना किसी रोक-टोक के दूसरे राज्यों में भेज सकेंगे। इससे उन्हें बेहतर बाजार और उचित दाम मिलने की उम्मीद है। व्यापारियों का भी कहना है कि पहले कई तरह की प्रशासनिक बाधाओं के कारण सामान की सप्लाई प्रभावित होती थी, जिससे बाजार में कीमतें भी अस्थिर रहती थीं। प्रतिबंध हटने के बाद व्यापार और आपूर्ति व्यवस्था में सुधार आने की संभावना है। भारतीय जनता पार्टी ने विधानसभा चुनाव के दौरान किसानों से वादा किया था कि सत्ता में आने पर इन प्रतिबंधों को खत्म किया जाएगा। सरकार ने अब इस वादे को पूरा करते हुए आदेश जारी कर दिया है। माना जा रहा है कि इससे राज्य की कृषि अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी और किसानों की आय बढ़ाने में मदद मिलेगी।
भर्ती घोटालों की जांच अब सीबीआई के हाथ में
राज्य सरकार ने शिक्षक भर्ती, नगर निकाय भर्ती और सहकारी सेवा भर्ती से जुड़े कथित घोटालों की जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो यानी सीबीआई को सौंपने का फैसला किया है। सरकार का कहना है कि इन मामलों में पारदर्शिता लाने और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने के लिए यह कदम उठाया गया है। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने आरोप लगाया कि पिछली तृणमूल कांग्रेस सरकार ने भ्रष्ट अधिकारियों और नेताओं को बचाने की कोशिश की थी। उनके मुताबिक कई शिकायतों के बावजूद उचित कार्रवाई नहीं की गई, जिसके कारण भर्ती प्रक्रिया पर सवाल उठते रहे। अब सीबीआई जांच से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होने की उम्मीद जताई जा रही है।
दोबारा नियुक्त कर्मचारियों की सेवाएं समाप्त
राज्य सरकार ने एक और बड़ा फैसला लेते हुए उन सभी लोगों की सेवाएं समाप्त कर दी हैं, जिन्हें पिछली सरकार ने रिटायरमेंट के बाद दोबारा नौकरी पर रखा था। सरकार ने इस संबंध में कई आधिकारिक आदेश जारी किए हैं। सरकार का कहना है कि प्रशासन में पारदर्शिता और नई भर्ती प्रक्रिया को बढ़ावा देने के लिए यह कदम जरूरी था। विपक्ष का आरोप है कि पिछली सरकार ने राजनीतिक और निजी लाभ के लिए कई सेवानिवृत्त अधिकारियों को दोबारा नियुक्त किया था। अब नई सरकार प्रशासनिक व्यवस्था में बदलाव और जवाबदेही तय करने की दिशा में काम कर रही है।
राजनीतिक माहौल हुआ गर्म
इन फैसलों के बाद पश्चिम बंगाल की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। भाजपा सरकार इन कदमों को भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई और किसानों के हित में लिया गया फैसला बता रही है, जबकि तृणमूल कांग्रेस इन आरोपों को राजनीतिक बदले की कार्रवाई करार दे रही है। आने वाले दिनों में इन मुद्दों पर राज्य की राजनीति और अधिक गर्म होने की संभावना है।
