India China USA Trump Tariff : अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का दावा था कि वे टैरिफ लगाकर अमेरिका को महान और अमेरिकन लोगों को अमीर बना देंगे। लेकिन, ट्रंप के टैरिफ प्लान की भारत और चीन जैसे देशों ने हवा निकाल दी है। खुद व्हाइट हाउस ने अपनी एक रिपोर्ट में यह बताया है कि कैसे ट्रंप के भारी टैरिफ के बाद भी चीन का सस्ता माल अमेरिकी बाजार तक पहुंच रहा है। व्हाइट हाउस ने "The Great Transshipment Scam" नाम से एक रिपोर्ट जारी कर दावा किया है कि चीन ने भारत सहित कई देशों की मदद से टैरिफ प्लान को बढ़ा झटका दिया है।
इस रिपोर्ट में दावा किया गया है कि हाई टैरिफ से बचने के लिए चीन से जुड़े सामानों को तीसरे देशों के रास्ते अमेरिका पहुंचाने का नेटवर्क इतना बड़ा हो गया कि सिर्फ 2025 में टॉप ट्रांसशिपमेंट हब माने गए मेक्सिको, भारत और वियतनाम के जरिए करीब $67 billion यानी लगभग ₹6.39 लाख करोड़ के सामान की आवाजाही का अनुमान लगाया गया। इस पूरी गतिविधि से अमेरिकी सरकार को करीब $28 अरब डॉलर यानी करीब ₹2.67 लाख करोड़ के टैरिफ राजस्व नुकसान का अनुमान है।
कहां फंसा अमेरिका?
ट्रंप के टैरिफ प्लान का मूल मकसद साफ था कि जिस देश से अमेरिका को बड़ा व्यापारिक खतरा है, उसके सामान पर ज्यादा टैरिफ लगाओ और आयात को महंगा करके घरेलू कंपनियों को फायदा पहुंचाओ। लेकिन, व्हाइट हाउस की रिपोर्ट बताती है कि अलग-अलग देशों पर अलग टैरिफ दरें खुद एक नया कारोबारी रास्ता खोल देती हैं। ज्यादा टैरिफ वाले देश से माल कम टैरिफ वाले देश के जरिए भेजना कंपनियों के लिए आर्थिक रूप से आकर्षक हो जाता है। यही ट्रंप के टैरिफ प्लान की सबसे बड़ी कमजोरी है। रिपोर्ट के हिसाब से अमेरिका ने चीन के लिए दरवाजे बंद किए, लेकिन चीन ने बहुत सी खिड़किंया खोल दीं।
भारत क्यों बना इस खेल का अहम हिस्सा?
रिपोर्ट में 40 से ज्यादा देशों को चीन से जुड़े ट्रांसशिपमेंट नेटवर्क में रखा गया है और भारत को सबसे ऊंची श्रेणी यानी टियर 1 में शामिल किया गया है। इस श्रेणी में भारत के साथ कनाडा, यूरोपीय संघ, इजरायल, जापान, मेक्सिको, दक्षिण कोरिया और ताइवान भी हैं। रिपोर्ट के मुताबिक इन अर्थव्यवस्थाओं में चीन से जुड़े बड़े कारोबारी प्रवाह मौजूद हैं और ट्रांसशिपमेंट का जोखिम व्यापक वैध व्यापार के बीच छिपा हो सकता है।
भारत को लेकर बौखलाए ट्रंप के सलाहकार
व्हाइट हाउस की रिपोर्ट भले ही इस पूरे मामले में भारत की सीमित भूमिका बताती है। लेकिन, ट्रंप के आर्थिक सलाहकार पीटर नवारो भारत को लेकर बुरी तरह बौखलाए हुए हैं। नवारो का कहना है कि भारत जैसे देशों से आने वाले सामान पर अब और कड़ी नजर रखी जाएगी।
पुणे-गुजरात-चेन्नई बेल्ट पर खास नजर
भारत को लेकर रिपोर्ट में कहा गया है कि पुणे-गुजरात-चेन्नई औद्योगिक बेल्ट ने ट्रंप के टैरिफ प्लान को बड़ा झटका दिया है। व्हाइट हाउस ने इस क्षेत्र को पंप और कंप्रेसर जैसे औद्योगिक उत्पादों से जुड़े संभावित ट्रांसशिपमेंट जोखिम के उदाहरण के तौर पर चिन्हित किया है। रिपोर्ट के मुताबिक इन उत्पादों की गतिविधि अमेरिका के सिनसिनाटी, डेटन और कोलंबस जैसे औद्योगिक इलाकों में मौजूद समान मैन्युफैक्चरिंग क्षमता से प्रतिस्पर्धा करती है। यही वजह है कि अमेरिका अब सिर्फ यह देखने पर निर्भर नहीं रहना चाहता कि किसी कंटेनर पर किस देश का नाम लिखा है। वह यह देखना चाहता है कि माल में वास्तव में कितना काम किस देश में हुआ।
मुश्किल होगा भारत के लिए एक्सपोर्ट
व्हाइट हाउस की रिपोर्ट के में कहा गया है कि नई व्यवस्था के तहत अब अमेरिकी सीमा शुल्क एजेंसी शिपमेंट का रास्ता, उत्पाद वर्गीकरण, मालिकाना संबंध, फैक्ट्री की उत्पादन क्षमता, स्थानीय मूल्यवर्धन और दूसरे संकेतों को एक साथ देखेगी। इसके लिए AI आधारित व्यवस्था बनाई जा रही है, ताकि ऐसे मामलों को पकड़ा जा सके, जिनमें कागज पर उत्पादन किसी तीसरे देश का दिखता है, लेकिन वास्तविक सप्लाई चेन कहीं और जाती है।
