Putin Security: हाल ही में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की सुरक्षा को लेकर एक ऐसी खबर सामने आई, जिसने दुनिया को चौंका दिया। दरअसल, पिछले महीने तुर्किए की यात्रा से लौटने के दौरान विमान बदला था। वो एयरफोर्स वन विमान से गुप्त तरीके से दूसरे विमान में चले गए थे।
रिपोर्टों के मुताबिक अमेरिकी अधिकारियों को आशंका थी कि ट्रंप जिस विमान से तुर्किये से रवाना होंगे, उसे कंधे से दागी जाने वाली मिसाइल से निशाना बनाया जा सकता है। खतरे का संबंध ईरान या ईरान समर्थित समूहों से होने की आशंका जताई गई थी।
ट्रंप की सुरक्षा को देखते हुए सीक्रेट सर्विस ने बेहद गोपनीय तरीके से योजना तैयार की। ट्रंप को छोटे और कम पहचान वाले C-32A विमान में बैठाया गया, जबकि एयर फोर्स वन को उसी दिशा में रवाना किया गया ताकि संभावित हमलावरों को राष्ट्रपति की वास्तविक लोकेशन का पता न चल सके। इतिहास में झांके तो ट्रंप पर कई बार जानलेवा हमले हो चुके हैं।
हालांकि, ट्रंप की सुरक्षा में सेंध लगाना पाना इतना भी आसान नहीं है। इसी तरह रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की सुरक्षा तो और अभेद है। अगर यह कहा जाए कि पुतिन की सिक्योरिटी ट्रंप से भी ज्यादा तगड़ी है तो यह कहना गलत नहीं होगा। सबसे बड़ी बात ये है कि उनकी विजिट और बैठकों की जानकारी को इस तरह कंट्रोल किया जाता है कि बाहरी दुनिया के लिए यह पता लगाना मुश्किल हो जाए कि पुतिन वास्तव में कहां मौजूद हैं। हालिया रिपोर्ट में सीक्रेट रेलवे स्टेशन, एक जैसे दिखने वाले ऑफिस और यहां तक कि ऑफिस में रखे पौधों को भी उनकी लोकेशन पता करने के संकेत के तौर पर बताया गया है।
तुर्किए की यात्रा के दौरान ट्रंप के विमान में किया गया था बदलाव। AP
आखिर पुतिन को छिपाने की जरूरत क्यों पड़ती है?
राष्ट्राध्यक्ष की सुरक्षा में सबसे महत्वपूर्ण चीज होती है, उनकी वास्तविक लोकेशन को गुप्त रखना। खासकर रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद पुतिन की सुरक्षा को लेकर खतरे और आशंकाएं बढ़ी हैं। इसी वजह से क्रेमलिन की ओर से राष्ट्रपति के कार्यक्रमों और यात्राओं की जानकारी सार्वजनिक करने में काफी सावधानी बरती जाती है। कई बार जो जानकारी सार्वजनिक रूप से सामने आती है, उससे यह तय करना आसान नहीं होता कि पुतिन उस समय वास्तव में उसी जगह मौजूद थे या नहीं।
सीक्रेट ट्रेन स्टेशन और अलग रेलवे ट्रैक
रिपोर्ट के मुताबिक, पुतिन की कुछ प्रमुख रिहाइशों के आसपास सीक्रेट रेलवे स्टेशन और स्पेशल रेलवे ट्रैक बनाए गए हैं। सैटेलाइट तस्वीरों के जरिए ऐसे रेलवे इंफ्रास्ट्रक्चर की पहचान किए जाने का दावा किया गया है।
इसका फायदा यह है कि राष्ट्रपति को सामान्य एयरपोर्ट या सार्वजनिक यात्रा मार्गों पर ले जाए बिना ट्रेन के जरिए अपेक्षाकृत सुरक्षित और नियंत्रित तरीके से एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचाया जा सकता है। यानी पुतिन की सुरक्षा सिर्फ उनके काफिले या बुलेटप्रूफ कार तक सीमित नहीं है, बल्कि जमीन के नीचे से लेकर रेलवे नेटवर्क तक एक पूरा सुरक्षा ढांचा काम करता है।
अधिकारियों के साथ बैठक कर रहे पुतिन की फोटो। AP
एक जैसे दिखने वाले ‘फर्जी’ ऑफिस
पुतिन की सुरक्षा व्यवस्था का एक और दिलचस्प हिस्सा , एक जैसे दिखने वाले ऑफिस है। रिपोर्ट के अनुसार, पुतिन अलग-अलग जगहों पर ऐसे कमरों और कार्यालयों में काम करते हैं जिन्हें एक-दूसरे जैसा दिखने के लिए तैयार किया गया है। इससे तस्वीरों या वीडियो को देखकर यह पता लगाना मुश्किल हो सकता है कि राष्ट्रपति किस लोकेशन पर हैं। दरवाजे के हैंडल की स्थिति, दीवारों की सिलाई या कमरे की छोटी-छोटी डिजाइन डिटेल्स जैसे मामूली संकेत ही कभी-कभी किसी ऑफिस की पहचान करने में मदद कर सकते हैं।
पुतिन की सुरक्षा से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी। AI IMAGE
पौधे भी बन गए पुतिन की लोकेशन का सुराग
इस साल पत्रकारों ने क्रेमलिन की बैठकों के वीडियो और तस्वीरों का स्टडी करते हुए पुतिन के ऑफिस में रखे पौधों पर ध्यान दिया। पौधों की हालत और पत्तियों के सूखने की स्थिति की तुलना बैठकों की घोषित तारीखों से की गई।
कुछ मामलों में पौधों की स्थिति और घोषित तारीखों में ऐसा अंतर दिखाई दिया, जिससे पत्रकारों ने अनुमान लगाया कि कुछ बैठकें किसी और दिन रिकॉर्ड की गई थीं या उनके वीडियो अलग क्रम में जारी किए गए थे। यानी पुतिन की लोकेशन का पता लगाने के लिए पत्रकारों को सिर्फ उनके बयान या आधिकारिक कार्यक्रम देखने के बजाय ऑफिस में रखे पौधों तक पर नजर रखनी पड़ रही है।
पुतिन की ज्यादातर जानकारियां गोपनीय रखी जाती है। AP
क्या हर बार पुतिन वहीं होते हैं जहां वीडियो दिखाया जाता है?
यही सबसे बड़ा सवाल है। रिपोर्ट में बताया गया है कि पुतिन की सार्वजनिक गतिविधियों को लेकर पत्रकारों को लंबे समय से अलग-अलग संकेतों को जोड़ना पड़ता है। एक जैसे ऑफिस, अलग-अलग लोकेशन और रिकॉर्डिंग के समय को लेकर विसंगतियां यह समझना मुश्किल बना सकती हैं कि वीडियो वास्तव में कब और कहां रिकॉर्ड हुआ।
हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि हर रिकॉर्डेड बैठक फर्जी है या पुतिन किसी दूसरी जगह थे। उपलब्ध रिपोर्टिंग मुख्य रूप से इस बात पर केंद्रित है कि क्रेमलिन उनकी गतिविधियों और लोकेशन को बाहरी लोगों के लिए कितना कठिन बनाता है।
बॉडी डबल की कहानी कितनी सच?
पुतिन के बॉडी डबल इस्तेमाल करने की चर्चाएं कई वर्षों से चलती रही हैं। खासकर रूस-यूक्रेन युद्ध के दौरान सोशल मीडिया और कुछ मीडिया रिपोर्टों में ऐसे दावे सामने आते रहे हैं। लेकिन यहां सावधानी जरूरी है। रूस के क्रेमलिन ने इन दावों को खारिज किया है।
2023 में क्रेमलिन प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने पुतिन के बॉडी डबल इस्तेमाल करने और उनके बंकर में छिपे रहने की खबरों को झूठ बताया था। इसलिए बॉडी डबल वाली बात को पुष्ट तथ्य के बजाय अपुष्ट दावे/अटकल के तौर पर ही देखा जाना चाहिए। ट्रंप के मामले में विमान बदलने की वजह एक संभावित सुरक्षा खतरा बताया गया, जबकि पुतिन की व्यवस्था को लेकर रिपोर्ट लंबे समय से चली आ रही गोपनीय यात्रा और लोकेशन सुरक्षा प्रणाली पर केंद्रित है।
