US-Israel Iran War impact on Indian market: अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव का असर अब ग्लोबल कमोडिटी बाजारों के साथ भारतीय शेयर बाजार के अलग-अलग सेक्टरों पर भी दिखने लगा है। संघर्ष बढ़ने की आशंका के बीच कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल आया है और निवेशकों ने सोना-चांदी जैसे सुरक्षित एसेट्स की ओर रुख किया है। इससे भारतीय बाजार में कमोडिटी, ऑटो और केमिकल सेक्टर पर अलग-अलग तरह का प्रभाव पड़ सकता है।
MCX को मिल सकता है फायदा
खाड़ी में तनाव के कारण ग्लोबल कमोडिटी बाजार में वोलैटिलिटी तेजी से बढ़ी है। पिछले एक सप्ताह में क्रूड ऑयल की कीमतें करीब 9–10 फीसदी उछल चुकी हैं। इसके साथ ही निवेशकों की सुरक्षित निवेश की मांग बढ़ने से सोना और चांदी में भी तेज हलचल देखी जा रही है। ऐसे माहौल में मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज ऑफ इंडिया (MCX) को फायदा मिल सकता है। कंपनी की 95 फीसदी से ज्यादा कमाई बुलियन और एनर्जी प्रोडक्ट्स से आती है, जिसमें क्रूड ऑयल, गोल्ड और सिल्वर प्रमुख हैं। कमोडिटी कीमतों में उतार-चढ़ाव बढ़ने से हेजिंग और स्पेकुलेटिव ट्रेडिंग दोनों बढ़ती हैं, जिससे एक्सचेंज के ट्रेडिंग वॉल्यूम में तेजी आ सकती है।
ऑटो सेक्टर के मार्जिन पर दबाव
भू-राजनीतिक तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतों में तेजी ऑटो सेक्टर के लिए चिंता का विषय बन सकती है। ऑटो और टायर कंपनियों के कई इनपुट सीधे क्रूड ऑयल से जुड़े होते हैं, इसलिए कच्चे तेल की कीमत बढ़ने से इनकी लागत बढ़ने का जोखिम है। इसके अलावा मिडिल ईस्ट क्षेत्र में तनाव बढ़ने से शिपिंग लागत भी बढ़ सकती है, जिसका असर खासतौर पर निर्यात आधारित ऑटो कंपनियों पर पड़ सकता है। हालांकि घरेलू ऑटो डिमांड फिलहाल मजबूत बनी हुई है, जिससे सेक्टर की ग्रोथ पर बड़ा असर पड़ने की संभावना फिलहाल सीमित मानी जा रही है।
केमिकल इंडस्ट्री के लिए बढ़ा सप्लाई रिस्क
ईरान और इजरायल के बीच बढ़ते तनाव का असर केमिकल सेक्टर पर भी पड़ सकता है। खासतौर पर पर्शियन गल्फ क्षेत्र और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज जैसे अहम शिपिंग रूट्स पर जोखिम बढ़ने से कच्चे माल की सप्लाई प्रभावित हो सकती है। भारत की कई केमिकल कंपनियां इंटरमीडिएट्स और कच्चे माल के लिए आयात पर निर्भर हैं। तनाव के कारण इनकी लैंडेड कॉस्ट बढ़ सकती है, शिपमेंट में देरी हो सकती है और बीमा व फ्रेट लागत भी बढ़ सकती है। चूंकि कई केमिकल प्रोडक्ट्स का कच्चा माल नेफ्था, एथिलीन, बेंजीन और प्रोपिलीन जैसे क्रूड डेरिवेटिव्स से बनता है, इसलिए तेल कीमतों में तेजी सीधे इन कंपनियों के मार्जिन को प्रभावित कर सकती है।

Indian market Sectors Impact
ग्लोबल ऑयल मार्केट में बढ़ी अनिश्चितता
अमेरिका और इजरायल की ओर से ईरान पर सैन्य कार्रवाई के बाद वैश्विक तेल बाजार में अनिश्चितता काफी बढ़ गई है। ओवर-द-काउंटर ट्रेडिंग में ब्रेंट क्रूड लगभग 10 फीसदी उछलकर 80 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गया है। अगर तनाव और बढ़ता है या स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से तेल और एलएनजी की सप्लाई प्रभावित होती है तो कीमतों में और तेजी आ सकती है। रिपोर्ट्स के मुताबिक कई टैंकर कंपनियों और ट्रेडिंग हाउस ने इस क्षेत्र से शिपमेंट को लेकर सतर्क रुख अपनाया है। इससे ग्लोबल एनर्जी सप्लाई चेन पर दबाव बढ़ सकता है और लंबे समय तक संघर्ष रहने पर दुनिया भर में ईंधन की कीमतों में और तेजी देखने को मिल सकती है।
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