US India trade deal June 2026 : भारत और अमेरिका के व्यापारिक और रणनीतिक रिश्तों में एक नया और ऐतिहासिक मोड़ आने वाला है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के विशेष वाणिज्य दूत जेमिसन ग्रीर 23-24 जून को भारत दौरे पर आ रहे हैं। अमेरिका की तरफ से दी गई आधिकारिक जानकारी के मुताबिक राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के खास दूत और अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि (USTR) एंबेसडर जेमिसन ग्रीर (Jamieson Greer) 23-24 जून को दो दिवसीय हाई-प्रोफाइल दौरे पर नई दिल्ली पहुंच रहे हैं। उनका यह दौरा भारत-अमेरिका के बीच बहुप्रतीक्षित व्यापक द्विपक्षीय व्यापार समझौते (BTA) के पहले चरण यानी अंतरिम व्यापार समझौते (Interim Trade Deal) को अंतिम रूप देने के लिए हो रहा है। दिल्ली में एंबेसडर ग्रीर केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल और देश के अन्य वरिष्ठ अधिकारियों के साथ एक बेहद अहम और निर्णायक बैठक करेंगे।
अंतिम पड़ाव पर समझौता
दोनों देश लंबे समय से द्विपक्षीय व्यापार समझौते पर बात कर रहे हैं। पिछले साल अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप की तरफ से लगाए टैरिफ के बाद दोनों देशों ने एक अंतरिम ट्रेड डील पर बात शुरू की है। अब माना जा रहा है कि दोनों देशों के शीर्ष नेतृत्व के बीच लंबे समय से चल रही बातचीत अंतिम दौर में पहुंच चुकी है। पिछले साल फरवरी 2025 में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की सत्ता में वापसी के तुरंत बाद, फरवरी 2025 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति ट्रंप ने इस द्विपक्षीय व्यापार समझौते (BTA) की नींव रखी थी। इसके बाद इस साल फरवरी 2026 में जारी हुए ऐतिहासिक 'यूएस-इंडिया ज्वाइंट स्टेटमेंट' ने इस डील का पूरा फ्रेमवर्क तैयार किया।
जी7 में मिला पुश
पिछले सप्ताह फ्रांस में हुए जी7 (G7) शिखर सम्मेलन के दौरान भी PM Modi और राष्ट्रपति ट्रंप ने इस समझौते की प्रगति की समीक्षा की और अधिकारियों को बातचीत तेज करने के निर्देश दिए थे। वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल के अनुसार, आगामी बैठक जून की शुरुआत में तैयार किए गए खाके को फाइनल टच देगी।
लेन-देन का समीकरण: किसे क्या मिलेगा?
पहले चरण के अंतरिम समझौते में दोनों देशों ने अपनी-अपनी आर्थिक प्राथमिकताओं को सामने रखा है, जिससे दोनों पक्षों के कामगारों, किसानों और व्यवसायों को तत्काल बड़ा फायदा मिल सके।
अमेरिका की प्राथमिकताएं (USA's Demand): अमेरिकी डेयरी और कृषि उत्पादों (Agri Products) के साथ-साथ मैन्युफैक्चर्ड गुड्स के लिए भारतीय बाजार में अधिक पहुंच। इसके अलावा, भारत में अमेरिकी कंपनियों के लिए मजबूत बौद्धिक संपदा (Intellectual Property) संरक्षण।
भारत की प्राथमिकताएं (India's Demand): भारतीय फार्मास्यूटिकल्स (दवाइयां), टेक्सटाइल (कपड़ा उद्योग), आईटी सर्विसेज (IT Services) और जेम्स एंड ज्वेलरी (रत्न-आभूषण) के अमेरिकी निर्यात का दायरा बढ़ाना।
क्या है 'मिशन 500'
दोनों देशों के बीच फिलहाल द्विपक्षीय व्यापार $190 बिलियन (करीब ₹15.8 लाख करोड़) के आंकड़े को पार कर चुका है। दोनों ही देश आने वाले कुछ वर्षों में आपसी व्यापार मौजूदा स्तर से ढाई गुना बढ़ाकर $500 बिलियन (लगभग ₹41.6 लाख करोड़) तक पहुंचाना चाहते हैं। यह अंतरिम डील इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए सबसे बड़ा लॉन्चिंग पैड साबित होगी।
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