Federal Reserve Interest Rates : अमेरिकी केंद्रीय बैंक (Federal Reserve) ने लगातार दूसरी बैठक में ब्याज दरों को 3.5% से 3.75% के दायरे में स्थिर रखा, लेकिन इस बार फैसला पूरी तरह एकमत नहीं था। 12 सदस्यीय फेडरल ओपन मार्केट कमिटी (FOMC) में 9 सदस्यों ने दरें स्थिर रखने का समर्थन किया, जबकि 3 अधिकारियों ने 25 बेसिस पॉइंट (0.25%) की बढ़ोतरी की मांग की। यह 2016 के बाद पहली बार है जब फेड की मौद्रिक नीति पर इतनी बड़ी असहमति देखने को मिली।
क्यों बड़ी असहमति?
तीनों असहमत सदस्य मानते हैं कि महंगाई अभी भी फेड के 2% लक्ष्य से काफी ऊपर है और उसे काबू में लाने के लिए ब्याज दरों को और ऊंचा रखना या बढ़ाना जरूरी है। दूसरी ओर, बहुमत का मानना है कि अगला कदम उठाने से पहले महंगाई और रोजगार से जुड़े नए आंकड़ों का इंतजार करना बेहतर होगा।
किन अधिकारियों ने Rate Hike की मांग की?
दरें बढ़ाने के पक्ष में वोट देने वालों में क्लीवलैंड फेड से बेथ हमैक, मिनियापोलिस फेड के नील काशकारी और डलास फेड की प्रतिनिधि लॉरी लोगन शामिल हैं। इन तीनों अधिकारियों को लंबे समय से फेड के "Hawkish" यानी महंगाई पर सख्त रुख अपनाने वाले नीति निर्माताओं के रूप में देखा जाता है। इनका तर्क है कि अगर अभी सख्ती नहीं दिखाई गई तो महंगाई दोबारा तेज हो सकती है और उसे 2% लक्ष्य तक लाना और मुश्किल हो जाएगा।
फेड चेयर केविन वार्श ने क्या कहा?
ट्रंप के चुने हुए फेड चेयर केविन वार्श ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में असहमति को सामान्य बताया। उन्होंने कहा कि समिति में लक्ष्य को लेकर कोई मतभेद नहीं है, केवल यह अंतर है कि उस लक्ष्य तक पहुंचने का सही समय और तरीका क्या होना चाहिए। उन्होंने कहा कि बैठक के दौरान गहन चर्चा हुई, लेकिन सभी सदस्य महंगाई को 2% पर लाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। इसके साथ ही वार्श ने यह भी कहा कि 5 साल से अधिक समय तक लक्ष्य से ऊपर रही महंगाई एक-दो महीने के बेहतर आंकड़ों से खत्म नहीं हो सकती। जरूरत पड़ी तो फेड कार्रवाई करने से नहीं हिचकेगा।
महंगाई अभी भी चिंता का विषय
अमेरिका में महंगाई पहले के मुकाबले कम जरूर हुई है, लेकिन अभी भी 2% के लक्ष्य से काफी ऊपर बनी हुई है। हालिया, आंकड़ों के अनुसार उपभोक्ता महंगाई लगभग 3.5% पर है। इसके अलावा मध्य-पूर्व, खासकर ईरान से जुड़े तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव बना हुआ है। अगर तेल महंगा होता है तो परिवहन लागत बढ़ती है और उसका असर व्यापक महंगाई पर पड़ सकता है। यही वजह है कि फेड के कुछ अधिकारी अभी भी सतर्क बने हुए हैं।
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