भारतीय शेयर बाजार से इस साल अभी तक विदेशी निवेशक (FII) करीब 2 लाख करोड़ रुपये की निकासी कर चुके हैं। जबकि, भारतीय कंपनियां विदेश में निवेश के रिकॉर्ड बना रही हैं। भारत में US के राजदूत सर्जियो गोर की मानें, तो ट्रंप के दूसरी बार सत्ता में आने के बाद भारतीय कंपनियों ने 1.9 लाख करोड़ का वादा किया है।
भारत की इकोनॉमी और बाजार अमेरिकी तुलना में कहीं ज्यादा तेजी से ग्रोथ कर रहे हैं। लेकिन, इसके बावजूद भारतीय कंपनियों और निवेशकों की देश में निवेश से बेरुख और विदेशियों से मोहब्बत हैरान करने वाली है। भारत के मुख्य आर्थिक सलाहकार (CEA) वी अनंत नागेश्वरन भी इस विसंगति को लेकर सवाल खड़े कर चुके हैं। नागेश्वरन का कहना है कि देश की 500 शीर्ष कंपनियों का मुनाफा 30% तक बढ़ा है। लेकिन, इन कंपनियों ने भारत में निवेश नहीं किया है।
क्या बोले अमेरिकी राजदूत?
अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर (Sergio Gor) ने SelectUSA Summit 2026 को लेकर सोशल मीडिया (x) पर एक पोस्ट करते हुए कहा,
सलेक्ट USA इन्वेस्टमेंट समिट, 2026 में 12 भारतीय कंपनियों ने ताजा $1.1 बिलियन (लगभग ₹9,300 करोड़) का निवेश घोषित किया। ये कंपनियां एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, एनर्जी, डिफेंस और फार्मा क्षेत्रों में अमेरिका में प्लांट और टेक्नोलॉजी हब स्थापित कर रही हैं। इससे करीब 1,500 अमेरिकी नागरिकों को नौकरियां मिलने की उम्मीद है।
इसके साथ ही गोर ने ट्रंप के दूसरी बार सत्ता में आने के बाद भारतीय कंपनियों की तरफ से किए गए निवेश के वादों को लेकर कहा कि कुल मिलाकर भारतीय कंपनियां अमेरिका में $20.5 बिलियन यानी करीब 1.90 लाख करोड़ के निवेश की योजना बनाई है।
भारत ने में कितना निवेश किया?
इस साल पहले से ही अमेरिका में भारतीय FDI का स्टॉक $16.4 बिलियन यानी करीब 1.50 लाख करोड़ रुपये के करीब पहुंच चुका है। भारत के इस निवेश से 70,000 से ज्यादा अमेरिकियों को रोजगार मिलेगा। इसमें Sun Pharma की तरफ की गई $12 बिलियन डील भी शामिल है। इसके अलावाAbhyuday Bharat Group, Sterlite Technologies, PR Jindal Group जैसी कंपनियां भी अमेरिका के अलग-अलग राज्यों में बड़े प्रोजेक्ट्स चला रही हैं।
गोर का दावा फायदेमंद साझेदारी
गोर के दावे के मुताबिक यह बदलाव भारत-अमेरिका आर्थिक संबंधों की नई मजबूती को दिखाता है। जहां पहले टेक और सर्विसेज में निवेश आता था, वहीं अब मैन्युफैक्चरिंग और हाई-टेक सेक्टर में भारतीय पूंजी अमेरिका की अर्थव्यवस्था को सपोर्ट कर रही है। दोनों देशों के बीच यह win-win स्थिति भविष्य में और गहरी होने वाली है।
CEA नागेश्वरन ने क्या कहा?
भारत के मुख्य अर्थशास्त्री नागेश्वरन का कहना है कि भारत को चीन और अमेरिका से सीखने की जरूरत है, ताकि भारत की कॉरपोरेट कमाई भारत के विकास में भागीदार बने।
CEA ने ज्यादा पाबंदी वाले बाहरी माहौल के बारे में भी चेतावनी देते हुए कहा कि भारत को चीनी और अमेरिकी कानूनों का अपना “जवाब” चाहिए, जो उनकी सप्लाई चेन और अंदरूनी इन्वेस्टमेंट को सुरक्षित रखते हैं। उन्होंने कहा कि ग्लोबल कंपनियों के लिए चीन से बाहर निकलना मुश्किल होता जा रहा है। भारत को ऐसे पाबंदी वाले ग्लोबल माहौल को “स्वीकार करना होगा और उसके साथ काम करने को तैयार रहना होगा।”
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