FII Outflows 2026: भारतीय शेयर बाजार में 2026 में विदेशी निवेशकों की बिकवाली की सुनामी आई हुई है। इस साल के शुरुआती चार महीनों में ही FII ने भारतीय बाजार से 2 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा की बिकवाली कर दी है। यह ट्रेंड भारतीय बाजार के लिए कितना गंभीर है, इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि अब भारतीय बाजार में विदेशी निवेशकों की हिस्सेदारी 15 साल के निचले स्तर पर आ गई है।
4 महीने में ₹2 लाख करोड़ की निकासी
नेशनल सिक्योरिटीज डिपॉजिटरी लिमिटेड (NSDL) और National Stock Exchange के आंकड़ों के मुताबिक जनवरी से अप्रैल 2026 के बीच विदेशी संस्थागत निवेशकों ने करीब ₹1.98 लाख करोड़ की बिकवाली की। मई की शुरुआत तक यह आंकड़ा ₹2 लाख करोड़ के पार पहुंच गया। यह ट्रेंड 2025 की कुल निकासी के करीब पहुंच चुका है, जिससे संकेत मिलता है कि इस बार बिक्री की रफ्तार असामान्य रूप से तेज है।
क्या है बिकवाली की बड़ी वजह?
भारतीय बाजार लंबे समय से ऊंचे वैल्यूएशन पर बना हुआ था, लेकिन कंपनियों की कमाई उस हिसाब से नहीं बढ़ पाई। इसके चलते विदेशी निवेशकों को वैल्यू के लिहाज से चीन और अन्य एशियाई बाजार ज्यादा आकर्षक लगे। आईटी सेक्टर में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को लेकर अनिश्चितता और बैंकिंग सेक्टर में बॉन्ड यील्ड व गवर्नेंस से जुड़े मुद्दों ने निवेशकों की चिंता बढ़ाई है।
कहां जा रहा पैसा?
ग्लोबल फंड अब तेजी से एशिया के दूसरे बाजारों की ओर रुख कर रहे हैं। ताइवान, दक्षिण कोरिया और जापान जैसे बाजारों ने बेहतर रिटर्न दिए हैं, जबकि BSE Sensex और Nifty 50 में दो अंकों की गिरावट देखी गई है। यही वजह है कि भारत अब उभरते बाजारों में अंडरवेट की स्थिति में पहुंच गया है।
15% हुई विदेशी हिस्सेदारी
लगातार बिकवाली का असर विदेशी हिस्सेदारी पर साफ दिख रहा है। NSE में लिस्टेड कंपनियों में विदेशी निवेश घटकर करीब 15% रह गया है, जो 15 साल का सबसे निचला स्तर है। यह संकेत देता है कि ग्लोबल फंड फिलहाल भारतीय बाजार को लेकर सतर्क बने हुए हैं।
सेकेंडरी से दूरी, IPO में बढ़ी दिलचस्पी
विदेशी निवेशक सेकेंडरी मार्केट से पैसा निकालने के बावजूद प्राइमरी मार्केट में सक्रिय बने हुए हैं। बेहतर वैल्यूएशन और लिस्टिंग गेन की संभावना के चलते IPO में उनका भरोसा बना हुआ है। यह दिखाता है कि निवेश पूरी तरह बाहर नहीं जा रहा, बल्कि रणनीति बदल रही है।
सुरक्षित ठिकानों की ओर झुकाव
बाजार की अनिश्चितता के बीच निवेशकों ने गोल्ड और सिल्वर ETF जैसे सुरक्षित विकल्पों की ओर रुख किया है। 2026 में गोल्ड ETF में मजबूत निवेश और सिल्वर ETF में बढ़ती भागीदारी यह संकेत देती है कि जोखिम से बचाव की रणनीति हावी है।
क्या लौटेगा विदेशी पैसा?
अमेरिका-ईरान तनाव में नरमी के बाद ग्लोबल सेंटीमेंट में सुधार के संकेत जरूर मिले हैं, लेकिन अभी ट्रेंड पलटने की पुष्टि नहीं हुई है। आगे का रुख कंपनी नतीजों, ब्याज दरों और वैश्विक आर्थिक संकेतों पर निर्भर करेगा।
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