भारत में डिजिटल भुगतान का सबसे बड़ा माध्यम UPI लगातार नई ऊंचाइयों को छू रहा है। वित्तीय सेवा विभाग के अनुसार, अप्रैल 2026 में यूपीआई के जरिए कुल 22.35 अरब लेनदेन दर्ज किए गए, जो पिछले साल अप्रैल के 17.89 अरब लेनदेन की तुलना में करीब 25 प्रतिशत अधिक है। यह वृद्धि डिजिटल पेमेंट की बढ़ती स्वीकार्यता को दर्शाती है।
मार्च में बना था रिकॉर्ड
अगर हाल के महीनों पर नजर डालें, तो मार्च 2026 में यूपीआई ट्रांजैक्शन 22.64 अरब के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गए थे। वहीं फरवरी में यह आंकड़ा 20.39 अरब रहा था। इससे साफ है कि यूपीआई का इस्तेमाल हर महीने तेजी से बढ़ रहा है और यह लोगों की पहली पसंद बनता जा रहा है।
आसान और सुरक्षित भुगतान प्रणाली
यूपीआई की लोकप्रियता का बड़ा कारण इसकी सरलता और मजबूत सुरक्षा है। रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (आरबीआई) द्वारा लागू दो-स्तरीय प्रमाणीकरण प्रणाली इसे सुरक्षित बनाती है। इसमें पहला स्तर बैंक खाते से जुड़ा मोबाइल नंबर होता है, जबकि दूसरा स्तर यूपीआई पिन होता है। इस व्यवस्था के चलते लेनदेन न केवल तेज बल्कि सुरक्षित भी रहते हैं।
डिजिटल लेनदेन में 85% हिस्सेदारी
वर्तमान में भारत में होने वाले कुल डिजिटल लेनदेन में यूपीआई की हिस्सेदारी लगभग 85 प्रतिशत तक पहुंच चुकी है। यह आंकड़ा बताता है कि देश में डिजिटल भुगतान के क्षेत्र में यूपीआई का दबदबा कितना मजबूत हो गया है।
वैश्विक स्तर पर भी बढ़ती पहुंच
यूपीआई अब केवल भारत तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसका विस्तार अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी हो रहा है। वैश्विक रियल-टाइम डिजिटल भुगतान में इसकी हिस्सेदारी करीब 50 प्रतिशत तक पहुंच चुकी है।
आज यूपीआई संयुक्त अरब अमीरात, सिंगापुर, भूटान, नेपाल, श्रीलंका, फ्रांस, मॉरीशस और कतर जैसे आठ देशों में सक्रिय है। इससे विदेश में रहने या यात्रा करने वाले भारतीयों को बिना किसी परेशानी के आसानी से भुगतान करने की सुविधा मिल रही है।
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