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Budget 2026: सरकार से क्या चाह रहे विदेशी निवेशक, भारत के बाजार में कब होगी FII की वापसी?

Union Budget 2026 से पहले भारत को लेकर ग्लोबल निवेशकों का रुख एक बार फिर चर्चा में है। Goldman Sachs, Mobius Emerging Opportunities Fund और Morgan Stanley का मानना है कि अगर बजट में सुधारों को गति दी जाती है, खपत को मजबूती मिलती है और पॉलिसी स्टेबिलिटी पर जोर रहता है, तो इससे कमाई के चक्र में सुधार आएगा और बाजार सेंटिमेंट को नया सहारा मिल सकता है।

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भारत से क्यों जा रहे FII

1 फरवरी को पेश होने वाले Union Budget 2026 से पहले ग्लोबल निवेशकों की नजर भारत के आर्थिक एजेंडे पर टिकी है। हालिया उतार-चढ़ाव और विदेशी निवेशकों की बिकवाली के बावजूद, बड़े अंतरराष्ट्रीय फंड भारत की मीडियम टर्म ग्रोथ स्टोरी को लेकर अब भी कंस्ट्रक्टिव बने हुए हैं। ET Now की एक रिपोर्ट के मुताबिक कई ग्लोबल ब्रोकरेज और संस्थागत निवेशकों उनका मानना है कि अगर बजट में सुधारों को गति मिलती है, खपत को सपोर्ट किया जाता है और पॉलिसी स्टेबिलिटी पर जोर रहता है, तो भारत का ग्रोथ नैरेटिव और मजबूत हो सकता है।

गोल्डमैन को कमाई में सुधार की उम्मीद

Goldman Sachs के टिमोथी मो के मुताबिक भारत में अर्निंग साइकिल धीरे-धीरे बेहतर होती दिख सकती है। ब्रोकरेज को MSCI India Index में करीब 15 फीसदी अर्निंग ग्रोथ की उम्मीद है, जो निफ्टी के अनुमान के आसपास है। वैल्यूएशन को लेकर मो ने माना कि भारतीय बाजार करीब 22 गुना फॉरवर्ड अर्निंग्स पर महंगे दिखते हैं, लेकिन Goldman Sachs के अलग-अलग वैल्यूएशन मॉडल्स के हिसाब से यह स्तर भारत की लंबी अवधि की ग्रोथ संभावनाओं को देखते हुए फेयर वैल्यू के दायरे में आता है।

मोबियस का टेक और सिस्टम रिफॉर्म पर फोकस

Mobius Emerging Opportunities Fund के प्रमुख Mark Mobius का कहना है कि आने वाले समय में निवेशकों के लिए कमाई सबसे अहम फैक्टर रहेगी। उन्होंने संकेत दिया कि भारत के कुछ टेक स्टॉक्स का प्रदर्शन मजबूत है और आगे सरकार की ओर से और सुधार देखने को मिल सकते हैं। मोबियस के मुताबिक सरकार अब इस बात को भी समझ रही है कि निवेश आकर्षित करने के लिए सरकारी तंत्र के भीतर सुधार जरूरी हैं, जिससे निवेश प्रक्रिया ज्यादा सरल और भरोसेमंद बन सके।

मॉर्गन स्टेनली को भारत डेमोग्राफी पर भरोसा

Morgan Stanley के जोनाथन गार्नर ने कहा कि ब्रोकरेज का भारत में इंडस्ट्रियल्स, फाइनेंशियल्स और कंज्यूमर डिस्क्रेशनरी सेक्टर पर ओवरवेट रुख है। उनके मुताबिक भारत की सबसे बड़ी मजबूती उसकी युवा और तेजी से शहरीकरण होती आबादी है, जो आधुनिक खपत पैटर्न को जन्म दे रही है। यही फैक्टर भारत को दुनिया की अन्य बड़ी अर्थव्यवस्थाओं से अलग और आकर्षक बनाता है।

FII की बिकवाली जारी

ग्लोबल निवेशकों के पॉजिटिव आउटलुक के बावजूद शॉर्ट टर्म में बाजार पर दबाव बना हुआ है। 23 जनवरी 2026 को विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों ने भारतीय शेयर बाजार से 4,113.38 करोड़ रुपये की निकासी की। इस दिन FPI की कुल बिकवाली 17,663.63 करोड़ रुपये रही, जबकि खरीद 13,550.25 करोड़ रुपये की हुई। इसके उलट, घरेलू संस्थागत निवेशकों ने बाजार को सहारा दिया। उसी दिन DII ने 4,102.56 करोड़ रुपये का नेट इनफ्लो दर्ज किया, जिससे तेज गिरावट पर कुछ हद तक ब्रेक लगा।

बजट से बाजार सेंटिमेंट को उम्मीद

ग्लोबल अनिश्चितता के बीच Union Budget 2026 को बाजार के लिए एक अहम ट्रिगर माना जा रहा है। निवेशकों को उम्मीद है कि अगर बजट में सुधारों, खपत बढ़ाने और पॉलिसी कंटिन्युटी पर साफ संदेश दिया गया, तो इससे कमाई को लेकर भरोसा मजबूत होगा और विदेशी निवेशकों की बिकवाली की रफ्तार आने वाले महीनों में धीमी पड़ सकती है।

Yateendra Lawaniya
यतींद्र लवानियाauthor

प्रिंट और डिजिटल मीडिया में बिजनेस एवं इकोनॉमी कैटेगरी में 10 वर्षों से अधिक का अनुभव। पिछले 7 वर्षों से शेयर बाजार, कॉरपोरेट सेक्टर और आर्थिक नीतियों से जुड़ी खबरों पर विशेष पकड़। लेखन में केवल हेडलाइन तक सीमित न रहकर आंकड़ों, नीतिगत फैसलों और कॉरपोरेट दावों के पीछे की वास्तविक तस्वीर को बैलेंस्ड और आसान शब्दों में पाठकों तक पहुंचाने का प्रयास। वर्तमान में Times Now Hindi के लिए बाजार की हर हलचल और आर्थिक घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए हैं।

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