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गोल्डेन वीजा पर UAE के अधिकारियों ने साफ की तस्वीर, सरकारी जांच और मंजूरी जरूरी

संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के अधिकारियों ने साफ कर दिया है कि गोल्डन वीजा एक सरकारी योजना है, जिसे तय नियमों और जांच प्रक्रिया के तहत ही मंजूरी दी जाती है।

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गोल्डेन वीजा पर आया दुबई के अधिकारियों का बयान - (फोटो - टाइम्स नाउ नवभारत )

नई दिल्ली: संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के अधिकारियों ने साफ कर दिया है कि गोल्डन वीजा एक सरकारी योजना है, जिसे तय नियमों और जांच प्रक्रिया के तहत ही मंजूरी दी जाती है। एक आधिकारिक बयान में कहा गया कि चाहे आवेदन सीधे किया गया हो या किसी अधिकृत एजेंट के जरिए, अंतिम फैसला यूएई सरकार ही लेती है।

बयान के अनुसार कि यूएई सरकार कई आधारों पर गोल्डन वीजा दे सकती है, जिसमें 2 मिलियन दिरहम तक के रियल एस्टेट निवेश, व्यवसाय स्वामित्व और विज्ञान, चिकित्सा, कला, संस्कृति, मीडिया और खेल जैसे क्षेत्रों में विशिष्ट योगदान शामिल हैं। हालांकि यह सिर्फ लेकिन इन्हीं तक सीमित नहीं हैं। हाल ही में कुछ रियल एस्टेट कंपनियों ने यह भ्रम फैला दिया था कि कोई भी भारतीय नागरिक सिर्फ एक बार की फीस देकर प्रॉपर्टी खरीदने पर गोल्डन वीजा पा सकता है। सरकार ने अब यह स्पष्ट कर दिया है कि यह पात्रता स्वचालित नहीं है। इसके लिए सरकारी जांच और मंजूरी जरूरी है।

पहले के मुकाबले आसान हुई प्रक्रिया

इंडिया सोथबी इंटरनेशनल रियल्टी के अंतरराष्ट्रीय निदेशक आकाश पुरी के अनुसार, इस बदलाव का भारतीय रियल एस्टेट निवेशकों पर दोहरा असर होगा। पहले लोग केवल लंबी अवधि की रेजीडेंसी के लिए प्रॉपर्टी में निवेश करते थे। इसलिए, भारतीय निवेशक पैसे को सुरक्षित रखने और वहां रहने का लाभ पाने के लिए इसमें दिलचस्पी दिखाते थे। लेकिन अब यह जरूरी नहीं रह गया है। पुरी के अनुसार अब जब वीजा अन्य तरीकों से भी आसानी से मिल रहा है, तो सिर्फ रहने के लिए निवेश करने की जल्दबाजी कम होने की संभावना है- खासकर मध्यम और शुरुआती स्तर की संपत्तियों में। इससे बेवजह की खरीदारी कम हो सकती है और लोग सोच-समझकर निवेश करेंगे।

यूएई का रियल एस्टेट बाज़ार और अधिक स्थिर और भरोसेमंद बनेगा

हालांकि, बहुत अमीर लोग (अल्ट्रा-एचएनडब्ल्यूआई) अभी भी महंगी और खास संपत्तियां खरीदना पसंद करेंगे, क्योंकि उन पर नए नौकरी-केंद्रित नियमों का ज्यादा असर नहीं पड़ेगा। पुरी ने कहा कि भारतीय निवेशकों को अब रेजीडेंसी के बजाय प्रॉपर्टी के वास्तविक मूल्य और दीर्घकालिक लाभ को ध्यान में रखकर निवेश करना चाहिए। इससे यूएई का रियल एस्टेट बाज़ार और अधिक स्थिर और भरोसेमंद बनेगा।

पुरी ने जोर देकर कहा कि भारतीय निवेशकों के लिए यह एक संकेत है कि वे अपनी रणनीति बदलें। भारतीय निवेशकों को अब रेजीडेंसी के बजाय प्रॉपर्टी के वास्तविक मूल्य और दीर्घकालिक लाभ को ध्यान में रखकर निवेश करना चाहिए। समय के साथ, यह बदलाव एक अधिक स्थिर और मजबूत रियल एस्टेट बाजार बना सकता है, जहां कम समय के फायदे की बजाय लंबी अवधि के लिए सोच-समझकर किए गए निवेश से फायदा मिलेगा।"

गोल्डेन वीजा में कई तरह के छूट शामिल

यूएई का गोल्डन वीजा यह एक लंबी अवधि का निवास वीजा है, जिससे वीजा धारक यूएई में रह सकते हैं, काम कर सकते हैं या पढ़ाई कर सकते हैं। इसमें कई बार आने-जाने की सुविधा, किसी प्रायोजक की जरूरत नहीं होती और परिवार व घरेलू कर्मचारियों को साथ रखने की छूट भी मिलती है।

(आईएएनएस इनपुट)

Sanjeev Dubey
संजीव कुमार दुबेauthor

पत्रकारिता में मेरे सफर की शुरुआत 20 साल पहले हुई। 2002 अक्टूबर में टीवी की रुपहले दुनिया में दाखिल हुआ। शुरुआत टीवी की दुनिया के उस पहलू से हुई जहां हर खबर को उसके मुताबिक आकार दिया जाता है यानी उसे कसा जाता है। सहारा टीवी में मेरे कामकाज की शुरुआत पैकेजिंग से हुई जहां खबरों को अलग-अलग प्रारूपों में गढ़ने का काम होता है। फिर पीसीआर में आउटपुट एडिटर की भूमिका निभाने का मौका मिला जहां तुरंत निर्णय कर खबरों को ब्रेक करने की चुनौती रहती है। न्यूजरूम की गहमागमी के बीच रनडाउन तैयार करने की जिम्मेदारी भी बखूबी निभाई। यहां ब्रेकिंग, हार्ड कोर की खबरों और फीचर्ड प्रोग्रामिंग ने मेरे अनुभव का दायरा तो बढ़ाया ही उसमें गहराई एवं पैनापन भी दिया। 2011 में टेलिविजन न्यूज की दुनिया को अलविदा कहना पड़ा। अक्टूबर 2011 में Zee News की हिंदी वेबसाइट को अपनी अगवुाई में लॉन्च करने का मौका मिला। डिजिटल की दुनिया और टीवी की दुनिया में खबरें परोसने और खबरों को दिखाने का अंदाज बिल्कुल अलग था। मैं उस दौर में दस्तक दे चुका था जब टीवी भी स्मार्टफोन पर देखा जाने लगा था। डिजिटल पर भी ब्रेकिंग थी। अगर टीवी में प्रोग्रामिंग थी तो यहां भी बतौर फीचर, सॉफ्ट स्टोरीज का विशाल संसार था। एक नया मीडियम जो स्मार्टफोन पर बखूबी देखा और समझा जा सकता था। डिजिटल की इस दुनिया में टीवी और अखबार दोनों समाहित थे। यहां काम करते हुए डिजिटल न्यूज मीडिया की बारीकियां तो सीखी हीं। साथ ही जब जी न्यूज से विदाई ली तो उस समय 33 मिलियन यूजर्स के बीच 84 मिलियन पीवीज देखने की अपार खुशियां हासिल हुईं। जी न्यूज में एक लंबी पारी खेलने के बाद जुलाई 2017 में टाइम्स नाउ नेटवर्क से जुड़ने का अवसर मिला। 2017 में ही टाइम्स नाउ की हिंदी वेबसाइट की शुरुआत हुई। यह पहला मौका था जब टाइम्स नाउ की अगुवाई में कोई हिंदी न्यूज वेबसाइट लॉन्च हुई। यहां एक नई और युवा टीम बनी। यह टीम आक्रामक अंदाज में काम करते हुए कम समय में अपनी पहचान बनाई। डिजिटल की दुनिया के बदलते संसार में अब चुनौती पीवीज की नहीं बल्कि यूजर्स की थी, जिन्हें लाना इतना आसान नहीं थी। लेकिन टीम के जज्बे, हौसले ने असाधारण चुनौतियों को भी अपनी मेहनत एवं लगन से उसे सामान्य बनाया। डिजिटल न्यूज की दुनिया में हर पल चुनौतियों के बीच नया कुछ सीखने-समझने और कुछ कर गुजरने की प्रेरणा मिलती है। यह सिलसिला आज भी अनवरत जारी है-

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