अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का टैरिफ दांव उल्टा पड़ रहा है। अमेरिका में महंगाई बेकाबू हो रही है, जिससे जनता पर खर्च का बोझ बढ़ रहा है। अमेरिकी जनता में ट्रंप के इस फैसले को लेकर भारी विरोध है। अब ट्रंप प्रशासन ने कई जरूरी सामानों पर टैरिफ घटाने का ऐलान किया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक कार्यकारी आदेश पर हस्ताक्षर किए, जिसके तहत मांस, कॉफी, टमाटर, केले, चाय, फलों के रस, कोको, मसालों, संतरे और कुछ उर्वरकों पर भी शुल्क हटा दिया गया है। कई अन्य कृषि आयातित वस्तुओं पर शुल्क हटा दिया गया है। शुल्क कम करने का मतलब अमेरिकी उपभोक्ताओं के लिए कीमतों में कमी आना है। ट्रंप प्रशासन ने यह फैसला अमेरिका में बढ़ती महंगाई के बाद लिया है।
अमेरिकियों का घर खर्च का बजट बढ़ा
अप्रैल में दुनिया भर में लगाए गए ट्रंप के टैरिफ की आलोचना हुई है क्योंकि इसकी वजह से अमेरिका में जरूरी उत्पादों की कीमतें बढ़ गई हैं। इसका खामियजा ट्रंप को भुगतना भी पड़ा है। हाल ही में वर्जीनिया, न्यू जर्सी और अन्य प्रमुख चुनावों में डेमोक्रेटिक पार्टी की जीत में योगदान दिया था। इसके बाद ट्रंप ने जरूरी सामानों पर टैरिफ घटाने का फैसला किया है।
भारतीय आम, चाय और मसालों के लिए अच्छी खबर
ट्रंप का यह फैसला, भारतीय निर्यातकों के लिए अच्छी खबर है। टैरिफ हटने से कृषि व्यापार में नए अवसर खुलेंगे। अमेरिका में भारतीय आम, चाय और मसालों के निर्यात में उछाल देखने को मिल सकता है। ट्रम्प के टैरिफ-रोलबैक, भारतीय निर्यातकों के लिए नया द्वार खोलता है क्योंकि अमेरिकी उपभोक्ता लगातार बढ़ती खाद्य कीमतों से राहत की उम्मीद कर रहे हैं।
अमेरिका में तेजी से बढ़ी महंगाई
बढ़ती खाद्य कीमतें, अमेरिकी परिवारों के लिए परेशानी का सबब बनी हुई हैं। उपभोक्ता मूल्य सूचकांक के आंकड़ों से पता चलता है कि सितंबर में घर पर खाने-पीने की चीजों की कीमतों में साल-दर-साल लगभग 2.7% की वृद्धि हुई। (सरकारी कामकाज ठप होने के कारण हालिया आंकड़े देरी से जारी किए गए)। ट्रंप द्वारा टैरिफ छूट का उद्देश्य किराने की वस्तुओं की कीमतों में इन बढ़ोतरी को कम करने में मदद करना है, हालांकि विशेषज्ञ आगाह करते हैं कि वैश्विक आपूर्ति की कमी जैसे अन्य कारक भी कीमतों को प्रभावित करते हैं, खासकर कॉफी और बीफ के मामले में।
