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भारत को बड़ी राहत, ट्रंप हटाने जा रहे हैं 25% टैरिफ! अमेरिकी अधिकारी का बड़ा बयान

भारत के लिए 6320 किलोमीटर दूर से बड़ी राहत की खबर सामने आ रही है। दावोस 2026 में अमेरिकी ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट ने एक बड़ा बयान देते हुए संकेत दिया है कि भारत पर लगा 25% का दंडात्मक टैरिफ जल्द ही हटाया जा सकता है। आइए जानते हैं आखिर ट्रंप की रियायत के पीछे क्या बड़ा कारण है?

Trump Tariff

Trump Tariff

दावोस (Davos) के बर्फीले पहाड़ों से भारत की अर्थव्यवस्था के लिए एक ऐसी खबर आई है, जिसका आम आदमी की जेब पर और देश के व्यापार पर बड़ा असर पड़ सकता है। अमेरिका के ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट ने एक बड़ा इशारा करते हुए बताया है कि डोनाल्ड ट्रंप सरकार जल्द ही भारत पर लगाए गए 25% के अतिरिक्त टैरिफ को हटा सकती है। यह वह भारी जुर्माना था, जिसे ट्रंप प्रशासन ने उन देशों पर लगाया था जो रूस से कच्चा तेल खरीद रहे थे। दावोस में 'यूएसए हाउस' के दौरान दिए गए इस बयान ने दुनिया भर के आर्थिक गलियारों में चर्चा छेड़ दी है कि क्या वाकई भारत और अमेरिका के बीच तनाव खत्म होने वाला है?

क्या है 25 फीसदी टैरिफ का खेल?

इस पूरे विवाद की जड़ रूस-यूक्रेन युद्ध में छिपी है। जब रूस-यूक्रेन वॉर शुरू हुआ, तो अमेरिका सहित कई पश्चिमी देशों ने रूस पर सख्त आर्थिक पाबंदियां लगा दीं। लेकिन भारत ने अपनी ऊर्जा जरूरतों और आम जनता को सस्ता ईंधन देने के लिए रूस से रियायती दरों पर कच्चा तेल खरीदना जारी रखा। डोनाल्ड ट्रंप की नीतियों के तहत अमेरिका को यह बात पसंद नहीं आई। उन्होंने रूस के साथ व्यापार करने वाले देशों को दंडित करने के लिए कुल 50% तक के टैरिफ का प्रावधान रखा, जिसमें 25% हिस्सा सीधे रूसी तेल की खरीद से जुड़ा हुआ था।

अब क्यों बदला अमेरिका का रुख?

स्कॉट बेसेंट के अनुसार, अमेरिका की रणनीति सफल रही है। उनका दावा है कि अमेरिका के दबाव और टैरिफ के डर से भारतीय रिफाइनरियों ने रूसी तेल की खरीद में भारी कटौती की है। बेसेंट ने कहा कि भारतीय रिफाइनरियों द्वारा रूसी तेल की खरीदारी अब लगभग 'कोलैप्स' (पूरी तरह गिरना) हो गई है। अमेरिकी अधिकारियों का मानना है कि चूंकि अब उनका उद्देश्य पूरा हो गया है और भारत ने रूस से अपनी निर्भरता कम कर ली है, इसलिए अब इन दंडात्मक टैरिफ को जारी रखने की कोई आवश्यकता नहीं है। उन्होंने संकेत दिया कि जल्द ही इन शुल्कों को हटाने का रास्ता साफ हो जाएगा।

इन सबके बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की केमिस्ट्री भी सुर्खियों में है। दरअसल, ट्रंप ने हाल ही में पीएम मोदी को अपना "बहुत अच्छा दोस्त" बताया और संकेत दिया कि दोनों देश इंडिया यूएस डील को फाइनल करने की ओर बढ़ रहे हैं। ट्रंप का यह सकारात्मक बयान उन अटकलों को शांत करता है जिनमें कहा जा रहा था कि टैरिफ विवाद से दोनों देशों के रिश्तों में खटास आ सकती है। ट्रंप चाहते हैं कि भारत, रूस को छोड़कर अमेरिका का और भी बड़ा व्यापारिक साझेदार बने।

क्या वाकई भारत ने तेल खरीद कर दी कम?

हालांकि, सबसे बड़ा सस्पेंस इस बात पर है कि क्या वाकई भारत ने रूस से तेल खरीदना कम कर दिया है? अमेरिकी नेता बार-बार यह दावा कर रहे हैं कि पीएम मोदी ने उन्हें तेल खरीद कम करने का भरोसा दिया है, लेकिन भारत सरकार ने आधिकारिक तौर पर हमेशा इन दावों को खारिज किया है। भारत का स्टैंड अब भी यही है कि वह अपने राष्ट्रीय हितों और ऊर्जा सुरक्षा को ध्यान में रखकर ही फैसले लेगा। फिर भी, अमेरिका की बैंकिंग पाबंदियों और पेमेंट सिस्टम की चुनौतियों ने निश्चित रूप से रूसी तेल आयात को पहले के मुकाबले कठिन बना दिया है। स्कॉट बेसेंट के इस बयान से यह स्पष्ट है कि अमेरिका इसे अपनी बड़ी कूटनीतिक जीत मान रहा है और अब वह भारत के साथ नए सिरे से व्यापारिक रिश्ते मजबूत करना चाहता है।

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रिचा त्रिपाठी
रिचा त्रिपाठी author

रिचा त्रिपाठी टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में बिजनेस डेस्क पर सीनियर कॉपी एडिटर के रूप में कार्यरत हैं। मीडिया इंडस्ट्री में 7 वर्षों के अनुभव के साथ रिच... और देखें

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