हर व्यक्ति चाहता है कि भविष्य में उसके पास इतना बड़ा फंड हो कि वह अपने सभी वित्तीय लक्ष्यों को आसानी से पूरा कर सके। लेकिन अक्सर लोगों को लगता है कि करोड़पति बनने के लिए बहुत बड़ी रकम निवेश करनी पड़ती है। वास्तव में ऐसा जरूरी नहीं है। अगर सही समय पर निवेश शुरू किया जाए और उसे लंबे समय तक जारी रखा जाए, तो छोटी-छोटी बचत भी करोड़ों रुपये का फंड तैयार कर सकती है। इसके पीछे सबसे बड़ी ताकत कंपाउंडिंग (चक्रवृद्धि ब्याज) होती है।
कंपाउंडिंग का जादू कैसे चलता है
कंपाउंडिंग का मतलब है कि आपको केवल अपने मूल निवेश पर ही नहीं, बल्कि पहले से मिले रिटर्न पर भी रिटर्न मिलने लगता है। समय के साथ यह प्रक्रिया एक स्नोबॉल इफैक्ट की तरह काम करती है। शुरुआत में वृद्धि धीमी दिखाई देती है, लेकिन जैसे-जैसे समय बीतता है, निवेश की रफ्तार तेजी से बढ़ने लगती है।
दुनिया के कई सफल निवेशक कंपाउंडिंग को वेल्थ क्रिएशन का सबसे पावरफुल टूल मानते हैं। यही कारण है कि निवेश की दुनिया में अक्सर कहा जाता है कि जल्दी शुरुआत करना, बड़ी रकम निवेश करने से भी ज्यादा महत्वपूर्ण है।
उदाहरण से समझें तो मान लीजिए कि कोई व्यक्ति 25 साल की उम्र में हर महीने 5,000 रुपये निवेश करना शुरू करता है। वह यह निवेश लगातार 35 वर्षों तक जारी रखता है और उसे औसतन 12 प्रतिशत सालाना रिटर्न मिलता है। ऐसे में 12% सालाना के अनुमानित रिटर्न के साथ यह राशि मैच्योरिटी पर 2,75,54,156 रुपये पहुंच सकती है।
मासिक निवेश: 5,000
निवेश अवधि: 35 वर्ष
कुल निवेश: 21,00,000
अनुमानित रिटर्न: 12% सालाना
कुल मैच्योरिटी अमाउंट- 2,75,54,156
यानी रिटायरमेंट तक यह फंड लगभग 3 करोड़ रुपये हो सकता है। ध्यान देने वाली बात यह है कि व्यक्ति अपनी जेब से केवल 21 लाख रुपये ही लगाता है जबकि बाकी धन कंपाउंडिंग की ताकत से बनता है।
अब मान लीजिए कि दूसरा व्यक्ति 35 साल की उम्र में निवेश शुरू करता है और वह भी 5,000 रुपये प्रति माह निवेश करता है। वह भी इस निवेश को अपनी रिटायरमेंट तक यानी 60 वर्ष की आयु तक जारी रखता है और उसे भी औसतन 12 प्रतिशत सालाना रिटर्न मिलता है। ऐसे में 12% सालाना के अनुमानित रिटर्न के साथ यह राशि मैच्योरिटी पर 85,11,033 रुपये ही हो पाएगी
मासिक निवेश: 5,000
निवेश अवधि: 25 वर्ष
कुल निवेश: 15,00,000
अनुमानित रिटर्न: 12% सालाना
कुल मैच्योरिटी अमाउंट- 85,11,033
यहां 10 वर्ष कम समय अवधि की वजह से पूरा गणति ही बदल गया। यही वजह है कि निवेश विशेषज्ञ समय को सबसे मूल्यवान संपत्ति मानते हैं। जितना अधिक समय मिलेगा, कंपाउंडिंग का प्रभाव उतना ही अधिक दिखाई देगा।
| विवरण | निवेशक 1 (25 साल की उम्र में शुरुआत) | निवेशक 2 (35 साल की उम्र में शुरुआत) |
|---|---|---|
| मासिक निवेश | ₹5,000 | ₹5,000 |
| निवेश अवधि | 35 वर्ष | 25 वर्ष |
| कुल निवेश | ₹21,00,000 | ₹15,00,000 |
| अनुमानित रिटर्न | 12% सालाना | 12% सालाना |
| कुल मैच्योरिटी अमाउंट | ₹2,75,54,156 | ₹85,11,033 |
| अनुमानित कुल लाभ | ₹2,54,54,156 | ₹70,11,033 |
नियमित निवेश क्यों है जरूरी?
कंपाउंडिंग का लाभ तभी मिलता है जब निवेश नियमित रूप से किया जाए और बीच में निकाला न जाए। SIP जैसे निवेश विकल्प इस काम को आसान बनाते हैं क्योंकि इनमें हर महीने एक निश्चित राशि अपने आप निवेश होती रहती है। इससे अनुशासित निवेश की आदत भी बनती है।
