कोरोना महामारी के बाद भारत में बड़े घरों की डिमांड तेजी से बढ़ी। बड़े साइज के फ्लैट की मांग बढ़ने में वर्क फ्रॉम होम की अहम भूमिका रही। बदलते मार्केट ट्रेंड को देखते हुए रियल एस्टेट डेवलपर्स ने भी बड़े साइज के फ्लैट जमकर लॉन्च किए। देखते ही देखते घर का साइज रियल एस्टेट प्रोजेक्ट्स के लिए एक बड़ा यूएसपी बन गया। डेवलपर्स ने बड़े बेडरूम, विशाल लिविंग रूम और चौड़ी बालकनी वाले फ्लैट को अपनी सबसे बड़ी यूएसपी बनाया और ऐसे महंगे प्रोजेक्ट्स की झड़ी लगा दी। इससे घरों की कीमतें भी बढ़ती गईं।
लेकिन क्या घर खरीदने का पैमाना सिर्फ बड़ा साइज ही होना चाहिए? रियल एस्टेट एक्सपर्ट इससे इत्तेफाक नहीं रखते। उनका मानना है कि होम बायर्स को घर का साइज देखने के साथ-साथ उसकी लोकेशन और कनेक्टिविटी को भी प्राथमिकता देनी चाहिए। खरीदारों को यह भी देखना चाहिए कि घर से ऑफिस, स्कूल, अस्पताल, बाजार और सार्वजनिक परिवहन तक पहुंचना कितना आसान है। आइए समझते हैं कि सिर्फ बड़े साइज के बजाय अच्छी लोकेशन और बेहतर कनेक्टिविटी भी क्यों जरूरी है।
लोकेशन और कनेक्टिविटी क्यों अहम?
दिग्गज रियल एस्टेट एक्सपर्ट और अंतरिक्ष इंडिया ग्रुप के CMD राकेश यादव से जब हमने पूछा कि होम बायर्स को फ्लैट के साइज, लोकेशन और कनेक्टिविटी में किसे कितनी अहमियत देनी चाहिए, तो उन्होंने इसे एक उदाहरण से समझाया। उन्होंने बताया कि शहर से दूर किसी इलाके में बड़ा और सस्ता फ्लैट मिल सकता है, लेकिन ऑफिस आने-जाने में ज्यादा समय और पैसा खर्च होगा। दूसरी ओर, अच्छी कनेक्टिविटी वाले इलाके में फ्लैट महंगा हो सकता है, लेकिन वहां से ऑफिस, स्कूल और अस्पताल पहुंचना आसान होता है। इसलिए फ्लैट के साइज का अपना महत्व है, लेकिन लोकेशन और कनेक्टिविटी को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। घर खरीदते समय सिर्फ उसकी कीमत नहीं, बल्कि वहां रहने का कुल खर्च भी देखना चाहिए।
सस्ता घर हमेशा सस्ता सौदा नहीं होता
रियल एस्टेट एक्सपर्ट प्रदीप मिश्रा ने बताया कि घर खरीदते समय अक्सर लोग फ्लैट की कीमत और साइज की तुलना करते हैं। लेकिन किसी घर की वास्तविक लागत केवल उसकी खरीद कीमत तक सीमित नहीं होती। घर की लोकेशन के कारण आने-जाने, रखरखाव और दूसरी जरूरतों पर होने वाला खर्च भी कुल बजट को प्रभावित करता है।
मान लीजिए कि शहर से दूर स्थित एक बड़ा फ्लैट आपको कम कीमत पर मिल रहा है। लेकिन वहां से ऑफिस जाने के लिए रोजाना कैब या अपनी गाड़ी का इस्तेमाल करना पड़ता है। ऐसे में पेट्रोल, टोल, पार्किंग और वाहन के रखरखाव पर अतिरिक्त खर्च हो सकता है। रोजाना लंबी यात्रा में समय भी ज्यादा खर्च होगा। इसलिए यह समझना जरूरी है कि सस्ता घर हमेशा सस्ता सौदा नहीं होता।
बड़ा घर या बेहतर कनेक्टिविटी, किसमें ज्यादा फायदा?
यह फैसला हर खरीदार की जरूरत और बजट पर निर्भर करता है। अगर परिवार बड़ा है, बच्चे हैं या घर से काम करने की जरूरत है, तो ज्यादा जगह वाला फ्लैट उपयोगी हो सकता है। लेकिन अगर रोजाना ऑफिस आना-जाना पड़ता है, तो अच्छी कनेक्टिविटी वाला घर ज्यादा सुविधाजनक साबित हो सकता है।
घर खरीदने से पहले इन 5 बातों की जांच करें
1. लोकेशन का खुद निरीक्षण करें: अलग-अलग समय पर इलाके में जाकर ट्रैफिक, शोर और आसपास की सुविधाएं देखें।
2. कनेक्टिविटी जांचें: ऑफिस, मेट्रो, बस स्टॉप और मुख्य सड़क तक पहुंचने में लगने वाला समय जानें।
3. कुल बजट निकालें: डाउन पेमेंट और ईएमआई के साथ रजिस्ट्रेशन, मेंटेनेंस और यात्रा का खर्च जोड़ें।
4. बुनियादी सुविधाएं देखें: पानी, बिजली, सीवर, वेंटिलेशन, प्राकृतिक रोशनी और सुरक्षा की स्थिति जांचें।
5. पजेशन और दस्तावेजों की पुष्टि करें: निर्माण की स्थिति, जरूरी मंजूरियों और कब्जा मिलने की समय-सीमा की जांच करें।
बड़ा घर नहीं, सही घर चुनना जरूरी
रियल एस्टेट एक्सपर्ट का कहना है कि घर खरीदना जिंदगी के सबसे बड़े वित्तीय फैसलों में से एक होता है। इसलिए सिर्फ ज्यादा साइज या कम कीमत देखकर फैसला नहीं करना चाहिए। अच्छी लोकेशन, बेहतर कनेक्टिविटी और आसपास की जरूरी सुविधाएं लंबे समय में आपकी रोजमर्रा की जिंदगी को आसान बना सकती हैं।
बड़े घर की अपनी उपयोगिता है, लेकिन अगर उसकी लोकेशन के कारण रोजाना आने-जाने में ज्यादा समय और पैसा खर्च हो रहा है, तो उसका फायदा कम हो सकता है। वहीं, जरूरत के मुताबिक साइज वाला घर अगर अच्छी लोकेशन पर है और बजट में भी फिट बैठता है, तो वह बेहतर विकल्प हो सकता है।
प्रॉपर्टी बाजार और होम बायर्स
होम बायर्स की प्राथमिकता में लोकेशन सबसे आगे
लोगों की इनकम बढ़ने के साथ बड़े घरों की मांग जरूर बढ़ी है, लेकिन अभी भी लोकेशन पहली प्राथमिकता बनी हुई है। मेट्रो से लेकर टियर-2 और टियर-3 शहरों में होम बायर्स यह जरूर देखते हैं कि घर से ऑफिस, स्कूल, अस्पताल, बाजार और सार्वजनिक परिवहन तक पहुंचना कितना आसान है। कोलियर्स की रिपोर्ट भी इस बात की पुष्टि करती है। 'कोलियर्स होमबाइंग सेंटीमेंट सर्वे 2026' के मुताबिक, 75–80% लोगों ने फ्लैट के लेआउट, सामाजिक बुनियादी ढांचे और कनेक्टिविटी को अपनी प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल किया।
