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BoB, IOB और IDBI से लोन लेना हुआ सस्ता, जानें अब EMI पर कितनी होगी बचत

बैंक ऑफ बड़ौदा, IOB, IDBI और यूको बैंक ने अपनी MCLR दरें घटा दी हैं, जिससे होम लोन और पर्सनल लोन लेने वालों की जेब पर बोझ हल्का होगा। हालांकि EMI तुरंत नहीं घटेगी, बल्कि लोन के रीसेट पीरियड पूरा होने के बाद ही असर दिखेगा। जानें किस बैंक ने कितनी दरें कम कीं और आपकी EMI में कितनी राहत मिल सकती है।

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सितंबर 2025 की शुरुआत होम लोन और पर्सनल लोन ग्राहकों के लिए राहत की खबर लेकर आई है। कई बड़े बैंकों ने अपनी MCLR (Marginal Cost of Funds based Lending Rate) घटा दी है। इनमें बैंक ऑफ बड़ौदा (BoB), इंडियन ओवरसीज बैंक (IOB), आईडीबीआई बैंक (IDBI Bank) और यूको बैंक (UCO Bank) शामिल हैं। इसका सीधा फायदा उन ग्राहकों को मिलेगा जिनके लोन MCLR से जुड़े हैं।

MCLR क्या होती है?

MCLR यानी मार्जिनल कॉस्ट ऑफ फंड्स बेस्ड लेंडिंग रेट वह न्यूनतम ब्याज दर है जिस पर बैंक लोन देते हैं। जब बैंक इस दर को घटाते हैं तो लोन की EMI कम हो सकती है या लोन की अवधि घट सकती है। हालांकि, EMI में बदलाव तभी दिखेगा जब आपके लोन का रीसेट पीरियड पूरा होगा।

बैंक ऑफ बड़ौदा (BoB) की नई दरें

12 सितंबर 2025 से BoB ने ओवरनाइट MCLR को 7.95% से घटाकर 7.85% और 3 महीने की MCLR को 8.35% से घटाकर 8.20% कर दिया है। हालांकि 1 महीने (7.95%), 6 महीने (8.65%) और 1 साल (8.80%) की दरें वही रहेंगी।

इंडियन ओवरसीज बैंक (IOB) की नई दरें

15 सितंबर 2025 से IOB ने ओवरनाइट दर 8.05% से घटाकर 8.00% कर दी है। इसी तरह 1 साल और 2 साल की MCLR 8.90% से घटकर 8.85% हो गई है। वहीं 3 साल की दर 8.95% से घटकर 8.90% हो गई है। 1 महीने, 3 महीने और 6 महीने की दरों में कोई बदलाव नहीं किया गया।

आईडीबीआई बैंक (IDBI Bank) की दरें

12 सितंबर 2025 से लागू मौजूदा दरों में ओवरनाइट 8.05%, 1 महीना 8.20%, 3 महीने 8.50%, 6 महीने 8.70% और 1 साल की MCLR 8.75% है। वहीं 2 साल और 3 साल की दरें क्रमशः 9.30% और 9.70% हैं।

यूको बैंक (UCO Bank) की नई दरें

10 सितंबर 2025 से UCO बैंक ने ओवरनाइट MCLR को 8.15% से घटाकर 8.05% किया है। इसी तरह 1 महीना 8.35% से घटकर 8.30%, 3 महीने 8.50% से घटकर 8.45% और 6 महीने 8.75% से घटकर 8.70% हो गया है। वहीं 1 साल की दर 8.95% से घटकर 8.90% हो गई है।

EMI पर असर कब दिखेगा?

ग्राहकों की EMI तुरंत कम नहीं होगी। इसका असर तभी दिखेगा जब लोन का रीसेट पीरियड पूरा होगा। उदाहरण के लिए, अगर आपका रीसेट पीरियड 6 महीने का है, तो EMI में कटौती अगली 6 महीने की तारीख से ही होगी।

Richa Tripathi
रिचा त्रिपाठीauthor

रिचा त्रिपाठी टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में बिजनेस डेस्क पर सीनियर कॉपी एडिटर के रूप में कार्यरत हैं। मीडिया इंडस्ट्री में 7 वर्षों के अनुभव के साथ रिचा, पर्सनल फाइनेंस, स्टॉक मार्केट, टैक्स प्लानिंग और अर्थव्यवस्था से जुड़े विषयों पर मजबूत पकड़ रखती हैं। अब तक 8,000 से अधिक कंटेंट लिख चुकी रिचा की विशेषता है—जटिल वित्तीय जानकारियों को सरल, स्पष्ट और भरोसेमंद तरीके से पाठकों तक पहुंचाना। वह ऐसी स्टोरीज तैयार करती हैं जो न केवल जानकारीपूर्ण होती हैं, बल्कि आम पाठक की वित्तीय समझ को बेहतर बनाने में भी मदद करती हैं।

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