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कर्ज के दलदल में न फंस जाएं आप! एक Loan को चुकाने के लिए दूसरा लोन लेना चाहिए या नहीं

कुछ लोग एक लोन को चुकाने के लिए दूसरा लोन ले लेते हैं यह सोचकर कि यह एक राहत भरा कदम होगा। लेकिन ऐसा करना कर्ज के दलदल में फंसा सकता है।

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Loan (Photo: iStock)

होम लोन, कार लोन, पर्सनल लोन या क्रेडिट कार्ड बकाया जैसी कई वित्तीय जिम्मेदारियां लोगों के जीवन का हिस्सा बन चुकी हैं। लेकिन कई बार ऐसी स्थिति आ जाती है जब किसी व्यक्ति को एक Loan की EMI चुकाने में कठिनाई होने लगती है। ऐसे में कुछ लोग पुराने लोन को चुकाने के लिए नया लोन ले लेते हैं। यह तरीका राहत देने वाला लग सकता है, लेकिन क्या वास्तव में यह समझदारी भरा कदम है? इसका जवाब पूरी तरह आपकी वित्तीय स्थिति पर निर्भर करता है।

नया लोन लेना कब होगी समझदारी?

अगर नया लोन पुराने लोन की तुलना में कम ब्याज दर पर मिल रहा है तो यह फैसला कुछ मामलों में फायदेमंद साबित हो सकता है। उदाहरण के लिए अगर कोई व्यक्ति 18-20 प्रतिशत ब्याज वाले क्रेडिट कार्ड बकाया या महंगे पर्सनल लोन को चुकाने के लिए कम ब्याज दर वाला लोन लेता है, तो उसकी कुल ब्याज लागत कम हो सकती है। इससे मासिक EMI का बोझ भी घट सकता है और नकदी प्रवाह बेहतर हो सकता है।

दोबारा बढ़ सकता है कर्ज का बोझ

हालांकि, हर स्थिति में ऐसा करना सही नहीं माना जा सकता। कई लोग केवल EMI का दबाव कम करने के लिए नया लोन लेते हैं, लेकिन मूल समस्या यानी अधिक खर्च या कमजोर वित्तीय योजना को नहीं सुधारते। परिणामस्वरूप कुछ समय बाद उनके ऊपर दोबारा कर्ज का बोझ बढ़ जाता है। अगर नया लोन भी ऊंची ब्याज दर पर लिया गया है, तो कुल कर्ज और ज्यादा महंगा हो सकता है।

अधिक ब्याज चुकाना पड़ सकता है

यहां आपको यह भी समझने की जरूरत है कि नया लोन लेने से आपकी कुल देनदारी कम नहीं होती, बल्कि कई बार उसका भुगतान काल (Tenure) बढ़ जाता है। मान लीजिए कि आपने 3 साल के बचे हुए लोन को चुकाने के लिए 5 साल का नया लोन ले लिया। ऐसे में मासिक EMI तो कम हो सकती है, लेकिन लंबे समय में आपको अधिक ब्याज चुकाना पड़ सकता है। इसलिए केवल कम ईएमआई देखकर निर्णय लेना सही नहीं होता।

ब्याज बचत को कम न कर दें अतिरिक्त खर्च

फाइनेंशियल एक्सपर्ट्स मानते हैं कि अगर पुराने लोन की ब्याज दर बहुत अधिक है और नया लोन काफी कम दर पर मिल रहा है, तभी इस विकल्प पर गंभीरता से विचार करना चाहिए। इसके अलावा, नए लोन से जुड़ी प्रोसेसिंग फीस, प्रीपेमेंट चार्ज और अन्य शुल्कों की भी कैलकुलेशन करना जरूरी है। कई बार ये अतिरिक्त खर्च ब्याज बचत के लाभ को कम कर देते हैं।

अगर आप लगातार एक लोन चुकाने के लिए दूसरा और फिर तीसरा लोन लेते जा रहे हैं, तो यह वित्तीय संकट का संकेत हो सकता है। ऐसी स्थिति में खर्चों की समीक्षा करना, बजट बनाना और जरूरत पड़ने पर वित्तीय सलाहकार की मदद लेना अधिक बेहतर विकल्प हो सकता है।

Shivani Kotnala
शिवानी कोटनालाauthor

शिवानी कोटनाला टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में सीनियर कॉपी एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। पत्रकारिता के करियर में 3 साल से ज्यादा के अनुभव के साथ शिवानी ने बिजनेस और टेक से जुड़ी खबरों पर काम किया है। यूटीलिटी, शेयर बाजार, पर्सनल फाइनेंस, बैंकिंग से जुड़ी खबरों पर वह लगातार लिख रही हैं। शिवानी ने डिजिटल के साथ-साथ न्यूज एजेंसी में भी काम किया है।

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