Economic growth : वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा है कि देश की आर्थिक वृद्धि को सात से आठ प्रतिशत के स्तर पर बनाए रखना सरकार की सबसे बड़ी प्राथमिकता है। उनका मानना है कि जब अर्थव्यवस्था तेजी से बढ़ती है, तो उसका लाभ देश के हर नागरिक तक पहुंचता है। इससे न केवल लोगों की आमदनी बढ़ती है, बल्कि रोजगार के नए अवसर भी पैदा होते हैं। आम बजट 2026-27 पेश करने के बाद रविवार को उन्होंने देश के अलग-अलग हिस्सों से आए कॉलेज विद्यार्थियों से बातचीत की। इस दौरान उन्होंने कहा कि अगर आर्थिक विकास की रफ्तार अच्छी रहेगी, तो समाज के सभी वर्गों को फायदा होगा। इसी वजह से सरकार का हर कदम आर्थिक वृद्धि को बनाए रखने पर केंद्रित है।
दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था बने रहना लक्ष्य
वित्त मंत्री ने कहा कि भारत को दुनिया की सबसे तेज़ी से बढ़ती अर्थव्यवस्था बनाए रखने के लिए सात से आठ प्रतिशत की विकास दर बेहद ज़रूरी है। उन्होंने साफ़ शब्दों में कहा कि वह जो भी नीतिगत फैसले लेंगी, उनका मकसद इसी विकास दर को कायम रखना होगा। उनका कहना था कि मजबूत आर्थिक वृद्धि से देश में नई नौकरियां पैदा होती हैं, ज्यादा लोग कामकाज से जुड़ते हैं और कुल मिलाकर उत्पादकता में इजाफा होता है। इससे देश की अर्थव्यवस्था और मजबूत होती है।
आर्थिक विकास से रोजगार और उत्पादकता में बढ़ोतरी
सीतारमण ने समझाया कि जब अर्थव्यवस्था बढ़ती है, तो उद्योगों और कारोबार को आगे बढ़ने का मौका मिलता है। इससे नए उद्योग खुलते हैं और पहले से चल रहे उद्योगों का विस्तार होता है। इसका सीधा फायदा युवाओं को मिलता है, क्योंकि उन्हें रोजगार के नए अवसर मिलते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि आर्थिक वृद्धि से श्रमबल का दायरा बढ़ता है और लोग ज्यादा कुशल बनते हैं। इससे देश की कुल उत्पादकता में भी सुधार होता है।
श्रमबल में महिलाओं की बढ़ती भूमिका
वित्त मंत्री ने कहा कि अब नियोक्ता महिलाओं की क्षमता को पहले से ज्यादा पहचानने लगे हैं। उन्होंने बताया कि महिलाओं की मेहनत, दक्षता और सटीकता से काम करने की योग्यता के कारण उन्हें श्रमबल में तेजी से शामिल किया जा रहा है। खासकर अर्द्धकुशल भूमिकाओं में महिलाओं की संख्या लगातार बढ़ रही है। हालांकि, उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि अभी भी कंपनियों के निदेशक मंडलों में महिलाओं की संख्या कम है। इस पर चिंता जताते हुए उन्होंने कहा कि ज्यादा महिलाओं को नेतृत्व की भूमिकाओं में आगे आना चाहिए।
नेतृत्व में महिलाओं की जरूरत
सीतारमण ने कहा कि अगर महिलाएं फैसले लेने वाले पदों पर होंगी, तो नीतियों और निर्णयों में उनका नजरिया भी शामिल होगा। इससे बेहतर और संतुलित फैसले लिए जा सकेंगे। साथ ही, नेतृत्व में महिलाएं अन्य महिलाओं के लिए प्रेरणा और रोल मॉडल भी बनेंगी। उन्होंने कहा कि इस दिशा में कुछ प्रगति जरूर हुई है, लेकिन अभी बहुत कुछ किया जाना बाकी है।
ऑरेंज इकॉनमी में बढ़ते अवसर
वित्त मंत्री ने विद्यार्थियों को बताया कि पिछले बजट के बाद से सरकार ने ‘ऑरेंज इकॉनमी’ यानी एनिमेशन, विज़ुअल इफेक्ट्स, गेमिंग और कॉमिक्स जैसे रचनात्मक क्षेत्रों को लगातार समर्थन दिया है। इन क्षेत्रों के लिए नीतियां बनाई गई हैं और वित्तपोषण की व्यवस्था भी की गई है। उन्होंने कहा कि आज का टेलीविज़न मीडिया भी काफी हद तक रचनात्मक सामग्री पर निर्भर है। यह एक ऐसा क्षेत्र है, जिसमें आगे बढ़ने की अपार संभावनाएं हैं।
रचनात्मक युवाओं के लिए सुनहरा मौका
सीतारमण ने छात्रों से कहा कि अगर उनमें रचनात्मक सोच और हुनर है, तो यह क्षेत्र उनके लिए बेहद अच्छा साबित हो सकता है। यहां हर दिन नई चुनौतियां मिलती हैं और प्रतिभा को पहचान भी मिलती है।
बजट कैसे तैयार होता है
वित्त मंत्री ने छात्रों को बजट बनाने की प्रक्रिया के बारे में भी बताया। उन्होंने कहा कि बजट की तैयारी अक्टूबर के आखिर या नवंबर से शुरू हो जाती है। इस दौरान उद्योग संगठनों, कारोबारियों, अर्थशास्त्रियों, ट्रेड यूनियनों और आम लोगों से सुझाव लिए जाते हैं।
उन्होंने बताया कि सोशल मीडिया के ज़रिये भी लोगों की राय शामिल की जाती है। इसके बाद सभी सुझावों की जांच की जाती है, संबंधित मंत्रालयों और राज्यों से चर्चा होती है और उन्हें लागू करने योग्य बनाया जाता है। कई दौर की समीक्षा के बाद आखिर में बजट भाषण को अंतिम रूप दिया जाता है।
