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ITR से मोटर दुर्घटना मुआवजा कैसे तय होगा? सुप्रीम कोर्ट ने जारी की नई गाइडलाइंस

Motor Accident Compensation: सुप्रीम कोर्ट ने मोटर दुर्घटना मुआवजे में आय तय करने के नए नियम जारी किए हैं, जिसमें ITR, बैंक स्टेटमेंट और औसत आय के आधार पर वेतनभोगी और स्वरोजगार की गणना होगी।

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मोटर दुर्घटना मुआवजे में एकरूपता लाने की नई पहल (तस्वीर-AI Image)

Motor Accident Compensation : सुप्रीम कोर्ट ने मोटर दुर्घटना मामलों में मुआवजे की गणना को लेकर एक महत्वपूर्ण और स्पष्ट दिशा-निर्देश (Supreme Court guidelines) जारी किया है। अब यह तय किया गया है कि दुर्घटना में पीड़ित या उसके परिजनों की आय कैसे निर्धारित की जाएगी। यह फैसला इसलिए लिया गया है ताकि देशभर में मुआवजे की गणना में एक समानता (uniformity) बनी रहे और अलग-अलग अदालतों में अलग-अलग तरीके से निर्णय न हो। यह नियम खासतौर पर उन मामलों में लागू होगा जहां पीड़ित वेतनभोगी (salaried), स्वयं-रोजगार (self-employed) या ITR नहीं भरने वाले व्यक्ति हों।

क्यों आया सुप्रीम कोर्ट का फैसला?

यह फैसला एक बीमा कंपनी की अपील पर सुनवाई के दौरान आया, जिसमें हाईकोर्ट ने मृत व्यक्ति की आय तय करने के लिए पिछले 5 वर्षों के ITR में से सबसे अधिक आय को आधार बनाया था। सुप्रीम कोर्ट ने इस तरीके को गलत माना। अदालत ने कहा कि केवल सबसे अधिक आय वाले वर्ष को चुनना उचित नहीं है, क्योंकि इससे मुआवजे की राशि जरुरत से ज्यादा बढ़ सकती है और बीमा कंपनियों पर अनुचित वित्तीय बोझ पड़ सकता है। इसी वजह से अदालत ने एक संतुलित और व्यावहारिक तरीका अपनाने की आवश्यकता बताई।

सैलरीड व्यक्तियों के लिए नया नियम

सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि वेतनभोगी व्यक्तियों (Salaried Employees) की आय आमतौर पर स्थिर होती है और बहुत ज्यादा उतार-चढ़ाव नहीं होता। इसलिए ऐसे मामलों में सबसे हाल का इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) ही उनकी वास्तविक आय का सबसे सही आधार माना जाएगा। इससे अदालतों को एक सरल और भरोसेमंद तरीका मिलेगा जिससे वे मुआवजे की गणना कर सकें।

स्व-रोजगार करने वालों के लिए तीन साल का औसत जरूरी

जो लोग स्वरोजगार (Self-employed) हैं, जैसे दुकानदार, छोटे व्यापारी, फ्रीलांसर या प्रोफेशनल्स, उनकी आय हर साल बदल सकती है। इसलिए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि ऐसे मामलों में केवल एक साल के ITR पर निर्भर नहीं रहना चाहिए। इसके बजाय पिछले तीन वर्षों की औसत आय (three-year average) को आधार बनाया जाएगा। इससे उनकी वास्तविक कमाई का अधिक सही अनुमान लगाया जा सकेगा और मुआवजे में संतुलन बना रहेगा।

एक बार की आय या असामान्य नुकसान का ध्यान

अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि अगर किसी व्यक्ति के ITR में किसी एक साल में बहुत अधिक आय किसी विशेष कारण से दिखाई देती है, जैसे संपत्ति बिक्री या बोनस या फिर किसी साल में असामान्य नुकसान हो, तो उस स्थिति में केवल उस साल के आंकड़ों पर भरोसा नहीं किया जाएगा। ट्रिब्यूनल (Motor Accident Claims Tribunal) को यह अधिकार होगा कि वह ऐसे मामलों में उचित कारणों के साथ ITR से अलग भी निर्णय ले सके।

ITR न होने पर कैसे तय होगी आय

सुप्रीम कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया कि अगर किसी व्यक्ति ने पिछले वर्षों में ITR दाखिल नहीं किया है, तो उसकी आय तय करने के लिए अन्य दस्तावेजों का सहारा लिया जा सकता है। इनमें बैंक स्टेटमेंट, वेतन पर्ची (salary slip), और फॉर्म 26AS शामिल हैं। हालांकि, अदालतों को यह स्पष्ट रूप से दर्ज करना होगा कि उन्होंने किस आधार पर आय तय की है और क्यों ITR का उपयोग नहीं किया गया।

गैर-स्थिर आय और व्यवसाय की वृद्धि को भी माना जाएगा

स्व-रोजगार करने वाले लोगों की आय में उतार-चढ़ाव उनके व्यवसाय की प्रकृति, बाजार की स्थिति और विकास पर निर्भर करता है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि मुआवजा तय करते समय यह भी देखा जाएगा कि व्यक्ति की मृत्यु के बाद उसके व्यवसाय की संभावित वृद्धि पर क्या असर पड़ता। इससे मुआवजा अधिक वास्तविक और न्यायसंगत बन सकेगा।

पूरे देश में लागू होंगे नए दिशानिर्देश

सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में यह भी कहा कि इन दिशानिर्देशों को देशभर के सभी मोटर दुर्घटना दावा न्यायाधिकरणों (Motor Accident Claims Tribunals) और उच्च न्यायालयों में भेजा जाए। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि सभी जगह एक जैसी प्रक्रिया अपनाई जाए और मामलों में भिन्नता न रहे।

मोटर दुर्घटना मुआवजा कैसे करें दावा

मोटर दुर्घटना में मुआवजा पाने के लिए पीड़ित या उसके परिवार को मोटर वाहन अधिनियम के सेक्शन 166 के तहत दावा दाखिल करना होता है। यह दावा उस क्षेत्र के ट्रिब्यूनल में किया जा सकता है जहां दुर्घटना हुई हो, या जहां पीड़ित या प्रतिवादी (defendant) रहता हो। आवेदन दाखिल करने के बाद एक वकील की मदद से पूरा केस तैयार किया जाता है और अदालत में पेश किया जाता है।

न्याय प्रणाली में बड़ा सुधार

सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला मोटर दुर्घटना मामलों में एक महत्वपूर्ण सुधार माना जा रहा है। इससे न केवल मुआवजे की गणना में पारदर्शिता आएगी, बल्कि पीड़ितों को अधिक न्यायसंगत मुआवजा मिलने की संभावना भी बढ़ेगी। यह व्यवस्था बीमा कंपनियों और पीड़ित दोनों के बीच संतुलन बनाने में मदद करेगी और पूरे देश में एक समान कानूनी प्रक्रिया को मजबूत बनाएगी।

Ramanuj Singh
रामानुज सिंहauthor

रामानुज सिंह पत्रकारिता में दो दशकों का व्यापक और समृद्ध अनुभव रखते हैं। उन्होंने टीवी और डिजिटल—दोनों ही प्लेटफॉर्म्स पर काम करते हुए बिजनेस, पर्सनल फाइनेंस, शेयर बाजार, इनकम टैक्स, बैंकिंग, बुलियन और कमोडिटी मार्केट जैसे विषयों पर गहरी विशेषज्ञता विकसित की है। जर्नलिज्म में एमए की डिग्री और वर्षों के अनुभव से विकसित विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण के साथ, रामानुज जटिल वित्तीय विषयों को सरल, विश्वसनीय और प्रभावी तरीके से पाठकों तक पहुंचाने के लिए जाने जाते हैं। अब तक वे 22,000 से अधिक स्टोरीज लिख चुके हैं।

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