सुकन्या समृद्धि योजना-बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ अभियान के 11 वर्ष पूरे, सुरक्षित भविष्य-आत्मविश्वास बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका
- Authored by: रामानुज सिंह
- Updated Jan 22, 2026, 08:41 AM IST
Sukanya Samriddhi Yojana: सुकन्या समृद्धि योजना (एसएसवाई) को 22 जनवरी 2015 को बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ अभियान के तहत शुरू किया गया था। अब यह योजना 11 वर्ष की हो गई है। यह कम जोखिम वाली जमा योजना है, जिसमें सरकार मूलधन की गारंटी देती है और तिमाही आधार पर ब्याज मिलता है। यह बालिकाओं के सुरक्षित भविष्य और आत्मविश्वास बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
सुकन्या समृद्धि योजना- बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ अभियान: बालिकाओं के उज्जवल भविष्य की दिशा में कदम (तस्वीर-istock)
Sukanya Samriddhi Yojana : सुकन्या समृद्धि योजना (एसएसवाई) को गुरुवार को 11 वर्ष पूरे हो गए हैं। यह योजना भारत सरकार द्वारा 22 जनवरी 2015 को बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ अभियान के तहत शुरू की गई थी। इस योजना का मुख्य उद्देश्य बालिकाओं के सुरक्षित और सशक्त भविष्य को सुनिश्चित करना है। यह न केवल उनके शिक्षा और विवाह के खर्चों को पूरा करने में मदद करती है, बल्कि बालिकाओं में आत्मविश्वास और आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
योजना की विशेषताएं और लाभ
एसएसवाई एक कम जोखिम वाली जमा योजना है, जिसमें सरकार द्वारा मूलधन की गारंटी दी जाती है। इस योजना में जमा राशि पर ब्याज प्रत्येक तिमाही में दिया जाता है, और वर्तमान में यह ब्याज दर 8.2 प्रतिशत है। इस योजना के तहत माता-पिता या कानूनी अभिभावक अपनी बालिका के लिए किसी भी भारतीय डाकघर या सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक और अधिकृत निजी बैंकों (जैसे एचडीएफसी बैंक, एक्सिस बैंक, आईसीआईसीआई बैंक और आईडीबीआई बैंक) की शाखाओं में खाता खोल सकते हैं। यह खाता बालिका के जन्म से लेकर 10 वर्ष की आयु तक कभी भी खोला जा सकता है।
एक परिवार अधिकतम दो बालिकाओं के लिए खाते खोल सकता है। हालांकि, अगर परिवार में जुड़वां या तीन जुड़वां बच्चे हैं, तो जन्म प्रमाण पत्र और शपथ पत्र के माध्यम से दो से अधिक खाते खोलने की अनुमति मिल सकती है। इस खाते को भारत में कहीं भी स्थानांतरित किया जा सकता है, जिससे माता-पिता किसी भी शहर में रहते हुए अपनी बेटी के भविष्य के लिए योजना का लाभ जारी रख सकते हैं।
खाता संचालन और नियंत्रण
एसएसवाई खाते की खास बात यह है कि बालिका 18 वर्ष की होने तक इसका प्रबंधन माता-पिता या अभिभावक द्वारा किया जाता है। यह अभिभावकों को यह सुनिश्चित करने में मदद करता है कि जमा धनराशि का सही उपयोग बालिका की शिक्षा, स्वास्थ्य और अन्य आवश्यकताओं के लिए हो। जब बालिका 18 वर्ष की हो जाती है, तो वह स्वयं आवश्यक दस्तावेज जमा करके खाते का नियंत्रण अपने हाथ में ले सकती है। इस प्रकार यह योजना न केवल वित्तीय सुरक्षा देती है बल्कि बालिका को अपनी जिम्मेदारियों के प्रति तैयार भी करती है।
देश में योजना का प्रभाव
आईएएनएस की रिपोर्ट के मुताबिक सरकार के अनुसार, अब तक देश में लगभग 4.53 करोड़ एसएसवाई खाते खोले जा चुके हैं। इन खातों में कुल 3.33 लाख करोड़ रुपए से अधिक की राशि जमा है। इससे यह स्पष्ट होता है कि यह योजना देश में बालिकाओं की सुरक्षा, शिक्षा और आर्थिक सशक्तिकरण में एक अहम योगदान दे रही है।
बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ अभियान के साथ संबंध
सुकन्या समृद्धि योजना बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ अभियान (Beti Bachao Beti Padhao) का हिस्सा है, जिसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 22 जनवरी 2015 को शुरू किया था। इसका उद्देश्य बालिकाओं के जन्म को सुरक्षित करना, उनके प्रति होने वाले भेदभाव को खत्म करना और उन्हें शिक्षा में समान अवसर प्रदान करना है। इसके तहत लिंगानुपात में सुधार, बालिकाओं के विद्यालय में नामांकन में वृद्धि और समाज में बेटियों के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित करना शामिल है।
महिला सशक्तिकरण और भविष्य की तैयारी
एसएसवाई न केवल वित्तीय सुरक्षा प्रदान करती है, बल्कि महिला सशक्तिकरण को भी मजबूत करती है। यह योजना बालिकाओं को आत्मनिर्भर बनाने और उनके भविष्य के लिए आर्थिक रूप से सक्षम बनाने में मदद करती है। शिक्षा और आर्थिक सुरक्षा के साथ-साथ यह योजना समाज में बेटियों के प्रति सम्मान और सकारात्मक सोच विकसित करने में भी योगदान देती है।
सुकन्या समृद्धि योजना 11 वर्षों में बालिकाओं के जीवन में एक महत्वपूर्ण बदलाव ला चुकी है। यह योजना माता-पिता को उनकी बेटियों के भविष्य की चिंता कम करने और उन्हें सुरक्षित, आत्मनिर्भर और सशक्त बनाने का अवसर देती है। देश में इस योजना के माध्यम से लाखों बालिकाओं का जीवन बेहतर और उज्जवल हो रहा है। एसएसवाई के सफल कार्यान्वयन से यह स्पष्ट है कि सरकार बालिकाओं के शिक्षा, स्वास्थ्य और आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में लगातार प्रयास कर रही है।
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