Morgan Stanley Sensex Target (मॉर्गन स्टेनली सेंसेक्स टारगेट): भारतीय शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव के बीच अब ग्लोबल ब्रोकरेज Morgan Stanley ने बड़ा संकेत दिया है। रिपोर्ट के मुताबिक बाजार एक बड़े अपसाइकिल की दहलीज पर है और Sensex दिसंबर 2026 तक 95,000 तक पहुंच सकता है।
ET Now की एक रिपोर्ट में बताया गया है कि Morgan Stanley की लेटेस्ट इक्विटी स्ट्रैटेजी रिपोर्ट के अनुसार BSE Sensex दिसंबर 2026 तक 95,000 के स्तर तक पहुंच सकता है। मौजूदा स्तरों से यह करीब 22% की संभावित तेजी दर्शाता है। रिपोर्ट का मानना है कि भारत में मिड-टर्म ग्रोथ साइकिल मजबूत हो रही है और पॉलिसी एनवायरनमेंट पहले से ज्यादा स्थिर और प्रेडिक्टेबल है। यही कॉम्बिनेशन बाजार को ऊपर ले जाने का आधार बनेगा।
बड़े मूव के लिए तैयार बाजार
रिपोर्ट के मुताबिक ब्रोकरेज का मानना है कि पिछले कुछ महीनों में बाजार का परफॉर्मेंस कमजोर रहा और वैल्यूएशन कंप्रेस हुए हैं। लेकिन यही स्थिति अब रिबाउंड का आधार बन रही है। रिपोर्ट कहती है कि ट्रेलिंग परफॉर्मेंस, वैल्यूएशन, पोजिशनिंग और अर्निंग्स चारों फैक्टर अब एक बड़े अपमूव को सपोर्ट कर रहे हैं। यानी बाजार “बिग मूव” के लिए सेटअप में है।
बुल, बेस और बेयर केस: तीनों का गणित
Morgan Stanley ने तीन अलग-अलग परिदृश्य पेश किए हैं। बुल केस में अगर क्रूड ऑयल 70 डॉलर प्रति बैरल से नीचे आता है तो Sensex 1,07,000 तक जा सकता है। वहीं अगर तेल 100 डॉलर के आसपास रहता है तो बेयर केस में इंडेक्स 76,000 तक सीमित रह सकता है। बेस केस में स्थिर मैक्रो, बढ़ता प्राइवेट कैपेक्स और संतुलित ग्लोबल ग्रोथ शामिल है। इसी स्थिति में 95,000 का टारगेट संभव माना गया है।
तेजी की असली ताकत
रिपोर्ट के अनुसार FY28 तक Sensex कंपनियों की कमाई लगभग 17% CAGR से बढ़ सकती है। ब्रोकरेज का मानना है कि अर्निंग अपसाइकिल फिर से शुरू हो चुका है। हाई-फ्रीक्वेंसी डेटा भी यही संकेत दे रहे हैं कि कंपनियों की कमाई में सुधार आ रहा है, भले ही जियोपॉलिटिकल तनाव से थोड़ी बाधा आई हो।
सस्ते लेवल पर बाजार
Morgan Stanley का एक अहम तर्क यह भी है कि भारतीय बाजार अभी ऐतिहासिक रूप से आकर्षक वैल्यूएशन पर ट्रेड कर रहा है। रिपोर्ट के अनुसार रिलेटिव वैल्यूएशन अपने पुराने लो के आसपास हैं और गोल्ड के मुकाबले Sensex अपने सबसे सस्ते स्तरों में से एक पर है। इसके अलावा भारत का ग्लोबल प्रॉफिट पूल में हिस्सा उसके इंडेक्स वेट से ज्यादा है, जो कॉर्पोरेट अर्निंग्स की स्ट्रक्चरल मजबूती को दिखाता है।
किन सेक्टर्स पर दांव?
ब्रोकरेज ने सेक्टरल रणनीति में डोमेस्टिक साइक्लिकल सेक्टर्स को प्राथमिकता दी है। फाइनेंशियल्स, कंज्यूमर डिस्क्रेशनरी और इंडस्ट्रियल्स पर ओवरवेट रुख रखा गया है। वहीं एनर्जी, मटेरियल्स और हेल्थकेयर पर अंडरवेट की सलाह दी गई है। हालांकि, आईटी सेक्टर पर कोई टिप्पणी नहीं की गई है। इसका सीधा मतलब है कि घरेलू मांग और निवेश से जुड़े सेक्टर्स में आगे ज्यादा तेजी देखने को मिल सकती है।
क्या बिगाड़ सकता है खेल?
हालांकि आउटलुक पॉजिटिव है, लेकिन कुछ बड़े खतरे भी हैं। ग्लोबल ग्रोथ में सुस्ती और बढ़ता जियोपॉलिटिकल तनाव बाजार के लिए डाउनसाइड रिस्क बन सकते हैं। खासतौर पर सप्लाई चेन में बाधा आने से एनर्जी और फर्टिलाइजर सेक्टर्स प्रभावित हो सकते हैं।
धैर्य रखने वालों के लिए मौका
Morgan Stanley की रिपोर्ट साफ संकेत देती है कि भारतीय बाजार अभी एक बड़े अपसाइकिल के शुरुआती चरण में हो सकता है। मजबूत मैक्रो, स्थिर नीतियां और अर्निंग ग्रोथ का कॉम्बिनेशन अगर कायम रहता है, तो आने वाले महीनों में निवेशकों को बेहतर रिटर्न देखने को मिल सकते हैं। हालांकि, ग्लोबल जोखिमों पर नजर रखना उतना ही जरूरी रहेगा।
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