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333 रुपये की रोजाना बचत से कितने साल में बनेगा 50 लाख का मोटा फंड? समझें SIP का गणित

SIP Wealth Calculator: रोजाना की छोटी बचत से आप भविष्य के लिए एक बड़ा फंड तैयार कर सकते हैं। इसके लिए आप एसआईपी में निवेश कर सकते हैं।

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SIP (Photo: iStock)

SIP Wealth Calculator: आज के समय में छोटी-छोटी बचत को बड़े फंड में बदलने के लिए SIP (Systematic Investment Plan) निवेश का लोकप्रिय विकल्प बन गया है। खास कर सैलरीड क्लास और यंग निवेशकों के बीच SIP तेजी से लोकप्रिय हो रही है, क्योंकि इसमें हर महीने छोटी रकम निवेश करके लंबे समय में बड़ा कॉर्पस तैयार किया जा सकता है। अगर आप नियमित रूप से लंबे समय तक SIP में निवेश करते हैं तो यह आपके लिए वेल्थ क्रिएशन का मजबूत विकल्प बन सकता है। इसे ऐसे समझिए कि आप रोजाना की 333 रुपये की बचत से ही कुछ वर्षों में 50 लाख रुपये से ज्यादा का फंड तैयार कर सकते हैं।

333 रुपये की रोजाना बचत से बनेगा मोटा फंड

SIP Wealth Calculator

SIP (Photo: iStock)

मान लीजिए कोई व्यक्ति रोजाना लगभग 333 रुपये की बचत करता है तो महीने में यह रकम करीब 10,000 रुपये बनती है। अब इस राशि को SIP के जरिए लगातार निवेश कर सकते हैं। हर महीने 10,000 रुपये का निवेश 12 प्रतिशत के अनुमानित वार्षिक रिटर्न के साथ 16 वर्षों तक जारी रखने पर 50 लाख रुपये से ज्यादा का फंड तैयार हो सकता है।

इसे ऐसे समझें 16 साल में निवेशक की ओर से कुल 19,20,000 रुपये का निवेश किया जाएगा। वहीं कंपाउंडिंग और मार्केट-लिंक्ड रिटर्न की मदद से अनुमानित रिटर्न लगभग 35,38,097 रुपये तक पहुंच सकता है। इसके बाद कुल मैच्योरिटी अमाउंट करीब 54,58,097 रुपये हो सकता है। खास बात यह है कि इस अवधि में मिलने वाला अनुमानित रिटर्न, निवेश की गई कुल राशि से भी ज्यादा हो सकता है।

विवरणजानकारी
रोजाना बचत₹333 (लगभग)
मंथली SIP₹10,000
निवेश अवधि16 साल
अनुमानित रिटर्न रेट12% सालाना
कुल निवेश₹19,20,000
अनुमानित रिटर्न₹35,38,097
कुल मैच्योरिटी अमाउंट₹54,58,097

SIP क्यों चुनें

SIP की सबसे बड़ी ताकत कंपाउंडिंग को माना जाता है। इसमें समय के साथ निवेश पर मिलने वाला रिटर्न भी दोबारा इंवेस्ट होता रहता है, जिससे वेल्थ तेजी से बढ़ने लगती है। यही वजह है कि फाइनेंशियल एक्सपर्ट जल्दी निवेश शुरू करने की सलाह देते हैं। जितनी लंबी अवधि तक SIP जारी रहती है कंपाउंडिंग का असर उतना ज्यादा दिखाई देता है।

SIP का एक और बड़ा फायदा rupee cost averaging माना जाता है। मार्केट ऊपर जाए या नीचे, निवेशक हर महीने तय रकम निवेश करता रहता है। इससे market volatility का असर लंबे समय में संतुलित हो सकता है। यही कारण है कि SIP को long-term investors के लिए एक बेहतर और प्रैक्टिकल तरीका माना जाता है।

हालांकि, निवेश करने से पहले म्यूचुअल फंड स्कीम (mutual fund), फंड परफॉर्मेंस, एक्सपेंस रेश्यो और इंवेस्टमेंट हॉरिजोन जैसी चीजों को समझना जरूरी है। जरूरत पड़ने पर फाइनेंशियल एडवाइजर की सलाह लेना भी फायदेमंद हो सकता है।

Shivani Kotnala
शिवानी कोटनालाauthor

शिवानी कोटनाला टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में सीनियर कॉपी एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। पत्रकारिता के करियर में 3 साल से ज्यादा के अनुभव के साथ शिवानी ने बिजनेस और टेक से जुड़ी खबरों पर काम किया है। यूटीलिटी, शेयर बाजार, पर्सनल फाइनेंस, बैंकिंग से जुड़ी खबरों पर वह लगातार लिख रही हैं। शिवानी ने डिजिटल के साथ-साथ न्यूज एजेंसी में भी काम किया है।

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