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रिटायरमेंट प्लानिंग का स्मार्ट फॉर्मूला है SIP-SWP, बुढ़ापे में नहीं होगी पैसे की किल्लत, जानें कैसे करता है यह काम?

शेयर बाजार में उठा-पटक के बावजूद छोटे निवेशक सिप करना बंद नहीं कर रहे हैं। इसकी वजह यह है कि उनको अभी भी भरोसा है कि लॉन्ग टर्म में सिप से बेहतर रिटर्न मिलेगा। लेकिन बदलते वक्त के साथ रणनीति बदलने की जरूरत है। सिप के साथ SWP को जानना बहुत जरूरी है।

Sip Vs SWP

SIP एग्जिट स्ट्रेटेजी

SIP+SWP: शेयर बाजार में जारी तमाम उतार-चढ़ाव के बावजूद छोटे निवेशकों का भरोसा स्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (SIP) से कम नहीं हो रहा है। जनवरी 2026 में, निवेशकों ने SIP के जरिए म्यूचुअल फंड (MF) में 31,000 करोड़ रुपये डाले। इससे साफ है, निवेशकों ने SIP की आदत बना ली है। हालांकि, जानकारों का कहना है कि एक अच्छी तरह से प्लान किया गया SIP सिर्फ आधा काम करता है। आधा काम तब शुरू होता है जब उस जमा हुए पैसे का इस्तेमाल शुरू करने का समय आता है? अधिकांश निवेशक दूसरे फेज को कैसे मेनेज करना है, यह नहीं जानते हैं। इसके चलते विड्रॉल फेज के दौरान की गलतियां कई सालों में जमा किए गए पैसे को जल्द खत्म करने का काम करता है। इसलिए, सभी निवेशकों को SIP के साथ सिस्टमैटिक विड्रॉल प्लान (SWP) को जनना जरूरी है। आइए समझते हैं कि SIP-SWP का कॉम्बो, किस तरह जिंदगी भर चलने वाला वेल्थ मैनेजमेंट साइकिल है। इन दोनों का सही इस्तेमाल क्या है और कैसे यह बुढ़ापे में पैसे की किल्लत को खत्म कर सकता है।

SIP से पैसा निकालनेका सही वक्त जानना जरूरी

SIP संपत्ति बनाने का अच्छा तरीका है, लेकिन इसमें हमेशा मुनाफे की गारंटी नहीं होती। अच्छे रिटर्न के लिए सही समय पर पैसा निकालना बहुत जरूरी है। यह मायने नहीं रखता कि आपने SIP कितने साल तक चलाई या किस तरह के बाजार में शुरू की। अगर आखिर में बाजार गिर जाए, तो आपकी जमा पूंजी का बड़ा हिस्सा कम हो सकता है। खासकर जब आप रिटायरमेंट के करीब हों या किसी बड़े खर्च की योजना बना रहे हों, तब बाजार की गिरावट आपके फाइनेंशियल प्लान को बिगाड़ सकती है। इसलिए SIP में एग्जिट का सही समय समझना बेहद जरूरी है।

SWP से बाजार की गिरावट को करें बेअसर

फाइनेंशियल एक्सपर्ट का कहना है कि अगर निवेशक लक्ष्य पूरा होने से 12–18 महीने पहले SWP के जरिए धीरे-धीरे निकासी शुरू कर देता, तो नतीजे बेहतर हो सकते थे। SWP, SIP का उल्टा तरीका है। इसमें आप तय समय पर नियमित रूप से एक निश्चित रकम निकाल सकते हैं। जैसे-जैसे आपका लक्ष्य पास आता है, यह तरीका आपके फंड को बाजार की उठापटक से काफी हद तक बचाता है। SWP में पूरा पैसा एक साथ नहीं निकाला जाता, बल्कि थोड़ा-थोड़ा निकाला जाता है। इससे बाकी रकम निवेश में बनी रहती है और उस पर रिटर्न मिलता रहता है। एक्सपर्ट्स मानते हैं कि SIP और SWP को अलग-अलग नहीं देखना चाहिए। ये दोनों मिलकर लंबी अवधि का वेल्थ मैनेजमेंट प्लान बनाते हैं।

कब SWP का इस्तेमाल करें?

जब आपकी आय अच्छी हो, तब SIP से नियमित निवेश करें। और जब आय कम हो जाए या खर्च बढ़ जाए, तब SWP से धीरे-धीरे पैसे निकालें ताकि आपकी कमाई का कंपाउंडिंग फायदा भी चलता रहे। रिटायरमेंट के समय SIP-SWP का कॉम्बिनेशन एक तरफ संपत्ति बनाने में मदद करता है और दूसरी तरफ नियमित आय भी देता है।

अगर किसी बड़े खर्च की तैयारी हो, तो यह तरीका एकदम सही साबित हो सकता है। SIP से आपने जो धन जमा किया है, उसे SWP के जरिए धीरे-धीरे और सोच-समझकर निकाला जा सकता है, ताकि आपकी पूंजी सुरक्षित रहे। सीधे शब्दों में कहें तो, SIP वेल्थ क्रिएशन का जरिया है और SWP उसे सही तरीके से इस्तेमाल करने का तरीका।

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आलोक कुमार
आलोक कुमार author

आलोक कुमार टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में एसोसिएट एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। इलेक्ट्रॉनिक, डिजिटल और प्रिंट मीडिया में 17 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभ... और देखें

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