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100 रुपये से भी कम थी एक किलो चांदी, 76 सालों में 'चांदी' ने लगाई ऐसी दौड़ की उड़ गए सबके होश!

क्या आप कल्पना कर सकते हैं कि भारत की आजादी के समय यानी 1947 में एक किलो चांदी की कीमत 100 रुपये से भी कम हुआ करती थी? जी हां, जिस सफेद धातु को आज खरीदना एक बड़ा निवेश माना जाता है, वह कभी बेहद सस्ती थी। आइए आपको बताते हैं 76 साल में चांदी की कीमतों में कैसे उछाल आया और ये 3 लाख के पार चली गई.

How silver price increased

How silver price increased

26 जनवरी 1950 को जब भारत ने अपना पहला गणतंत्र दिवस मनाया, तब देश एक नए सफर की शुरुआत कर रहा था। उस दौर में चांदी जैसी कीमती धातु भी आम लोगों की पहुंच में थी और एक किलो चांदी की कीमत 100 रुपए से भी कम थी। वहीं आज, इसी गणतंत्र दिवस के आसपास जब हम साल 2026 में खड़े हैं, चांदी की कीमत लाखों रुपये के करीब पहुंच चुकी है। 76 साल के इस अंतर ने न सिर्फ भारत की अर्थव्यवस्था को बदला, बल्कि यह भी दिखा दिया कि समय के साथ चांदी जैसी धातु कैसे सस्ती धातु से एक मजबूत निवेश विकल्प बन गई। ऐसे में आइए आपको बताते हैं कभी 100 रुपए किलो बिकने वाली चांदी आज कैसे 3 लाख 39 हजार के लेवल पर पहुंच गई है?

साल 1950 में कितनी थी चांदी की कीमत?

साल 1950 में भारत में चांदी की कीमत आज के मुकाबले बेहद कम थी। उस दौर में एक किलो चांदी की कीमत 100 रुपए से भी कम मानी जाती थी। आज के समय में जब एक किलो चांदी की कीमत लाखों रुपये के आसपास पहुंच चुकी है, तो यह आंकड़ा सुनकर हैरानी होना लाज़मी है। बीते 76 सालों में चांदी ने न सिर्फ महंगाई का असर झेला, बल्कि एक मजबूत निवेश विकल्प के रूप में भी अपनी पहचान बनाई है।

1950 का भारत बिल्कुल अलग आर्थिक हालात में था। देश आज़ादी के शुरुआती दौर से गुजर रहा था, आमदनी कम थी और कीमती धातुओं की मांग भी सीमित थी। उस समय सोना और चांदी मुख्य रूप से गहनों और पारंपरिक जरूरतों तक ही सीमित थे। निवेश के रूप में शेयर बाजार या म्यूचुअल फंड जैसे विकल्प आम लोगों तक नहीं पहुंचे थे। ऐसे में चांदी की कीमतें भी काफी नियंत्रण में रहती थीं और आम आदमी के लिए इसे खरीदना आसान था।

कैसे बढ़ती गई कीमत?

जैसे-जैसे समय बदला, भारत की अर्थव्यवस्था में भी बड़े बदलाव आए। औद्योगीकरण, शहरीकरण और बढ़ती आबादी ने चांदी की मांग को लगातार बढ़ाया। चांदी का इस्तेमाल सिर्फ गहनों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इलेक्ट्रॉनिक्स, सोलर पैनल, मेडिकल उपकरण और इंडस्ट्रियल सेक्टर में भी तेजी से बढ़ा। मांग बढ़ने और सप्लाई सीमित रहने के कारण इसकी कीमतों पर सीधा असर पड़ा।

How silver price increased

How silver price increased

महंगाई भी चांदी की कीमत बढ़ने का एक बड़ा कारण रही है। पिछले सात दशकों में रुपये की क्रय शक्ति में भारी गिरावट आई है। 1950 में जो 100 रुपए एक बड़ी रकम मानी जाती थी, आज वही राशि लगभग बेकार सी लगती है। इसी वजह से चांदी जैसी कीमती धातुओं की कीमतों में लंबी अवधि में बड़ा उछाल देखने को मिला।

1970 और 1980 के दशक में अंतरराष्ट्रीय बाजारों में चांदी की कीमतों में तेज उतार-चढ़ाव देखा गया। वैश्विक आर्थिक संकट, डॉलर की मजबूती या कमजोरी और भू-राजनीतिक तनावों ने भी चांदी के भाव को प्रभावित किया। भारत में आयात पर निर्भरता होने के कारण अंतरराष्ट्रीय कीमतों का असर घरेलू बाजार पर साफ दिखा।

Silver Price Chart

Silver Price Chart

2000 के बाद चांदी को एक सुरक्षित निवेश विकल्प के रूप में देखा जाने लगा। जब भी शेयर बाजार में बड़ी गिरावट आती है या महंगाई तेज होती है, निवेशक सोने के साथ-साथ चांदी की ओर भी रुख करते हैं। इसी वजह से पिछले 20–25 वर्षों में चांदी की कीमतों में जबरदस्त तेजी देखने को मिली है। खासतौर पर कोविड महामारी के बाद वैश्विक अनिश्चितता, सप्लाई चेन में रुकावट और इंडस्ट्रियल डिमांड बढ़ने से चांदी की मांग और मजबूत हुई, जिसका सीधा असर इसकी कीमतों पर पड़ा।

चांदी का लाइफटाइम हाई

आज की बात करें तो चांदी ने कीमत के मामले में इतिहास रच दिया है। इस समय एक किलो चांदी की कीमत MCX पर करीब ₹3 लाख 39 हजार तक पहुंचकर अपने लाइफ टाइम हाई पर है। 1950 में जो चांदी 100 रुपए से भी कम में मिल जाती थी, वह आज आम आदमी की पहुंच से काफी दूर हो चुकी है। हालांकि निवेश के नजरिए से देखें तो जिन्होंने लंबे समय तक चांदी में भरोसा बनाए रखा, उन्हें शानदार रिटर्न मिला है। यही कारण है कि आज भी चांदी को एक मजबूत लॉन्ग टर्म इन्वेस्टमेंट विकल्प माना जाता है।

चांदी ने 6 महीने में कितना दिया रिटर्न

चांदी की असली तेजी पिछले छह महीनों में देखने को मिली है। करीब आधा साल पहले जहां चांदी का भाव लगभग ₹1.17 लाख प्रति किलो के आसपास था, वहीं अब इसकी कीमत बढ़कर करीब ₹3.39 लाख प्रति किलो तक पहुंच चुकी है। यानी महज छह महीनों में ही चांदी ने निवेशकों का पैसा डबल से भी ज्यादा कर दिया। इस दौरान सोने में भी अच्छी तेजी देखने को मिली, लेकिन रिटर्न के मामले में चांदी ने सोने को साफ तौर पर पीछे छोड़ दिया।

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रिचा त्रिपाठी
रिचा त्रिपाठी author

रिचा त्रिपाठी टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में बिजनेस डेस्क पर सीनियर कॉपी एडिटर के रूप में कार्यरत हैं। मीडिया इंडस्ट्री में 7 वर्षों के अनुभव के साथ रिच... और देखें

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