जैसे ही एक नौकरीपेशा व्यक्ति की सैलरी बढ़ती है उसके जेहन में निवेश को लेकर यही सवाल आता है कि उसे पहले से चल रही एसआईपी की रकम बढ़ा देनी चाहिए या एक नए म्यूचुअल फंड में निवेश करना चाहिए। कई लोग ज्यादा पैसा निवेश करने के लिए तुरंत नया फंड चुन लेते हैं, लेकिन ऐसा करना हर बार जरूरी नहीं होता। नया फंड लेने से पहले यह देखना जरूरी है कि आपके मौजूदा पोर्टफोलियो को हकीकत में इसकी जरूरत है या नहीं।
SIP की रकम बढ़ाने पर क्यों करें विचार
अगर आपकी मौजूदा SIP किसी तय वित्तीय लक्ष्य के लिए है और वह फंड आपके लक्ष्य, जोखिम क्षमता और निवेश की अवधि के हिसाब से सही है, तो उसी SIP को बढ़ाना एक विकल्प हो सकता है। उदाहरण के लिए अगर आप हर महीने 5,000 रुपये की SIP कर रहे हैं और सैलरी बढ़ने के बाद निवेश की क्षमता बढ़ गई है तो इसे बढ़ाकर 6,000 या ₹7,000 किया जा सकता है। इससे बिना नया फंड जोड़े आपका निवेश बढ़ जाता है।
लेकिन SIP बढ़ाने से पहले मौजूदा फंड की समीक्षा करना जरूरी है। फंड किस कैटेगरी में है, उसका निवेश किस तरह की कंपनियों में है और उसका जोखिम स्तर क्या है, ये बातें भी मायने रखती हैं।
नया Mutual Fund चुनना कब होगा फायदेमंद
वहीं नया Mutual Fund तब ज्यादा बेहतर ऑप्शन हो सकता है, जब आपके मौजूदा पोर्टफोलियो में किसी खास कैटेगरी या एसेट का कमी हो। उदाहरण के लिए अगर आपके सभी फंड एक जैसी कंपनियों या सेक्टर में निवेश कर रहे हैं, तो एक और ऐसा ही फंड जोड़ने से डायवर्सिफिकेशन बहुत ज्यादा नहीं बढ़ेगा। फंडों की संख्या बढ़ सकती है, लेकिन पोर्टफोलियो में वास्तविक बदलाव कम हो सकता है।
इन बातों का भी रखें ध्यान
नई SIP शुरू करने से पहले पोर्टफोलियो ओवरलैप जरूर चेक करें। अगर आपके कई फंडों में एक जैसी बड़ी कंपनियां शामिल हैं, तो सिर्फ फंडों की संख्या बढ़ाने से जोखिम अपने आप कम नहीं होगा। साथ ही, केवल हाल के अच्छे रिटर्न देखकर नया फंड या एसआईपी बढ़ाने का फैसला नहीं करना चाहिए। Mutual Fund निवेश बाजार से जुड़े होते हैं और पुराने रिटर्न भविष्य के प्रदर्शन की गारंटी नहीं हैं।
इसके अलावा, निवेश बढ़ाने से पहले अपना मंथली बजट भी देखें। SIP की रकम इतनी नहीं बढ़ानी चाहिए कि जरूरी खर्च या इमरजेंसी फंड के लिए पैसे कम पड़ जाएं।
