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दिल को खुश रखने के लिए ‘गालिब' खयाल अच्छा है, बजट को लेकर शशि थरूर ने ऐसा क्यों कहा?

Shashi Tharoor on Budget 2026: लोकसभा में कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने वित्त वर्ष 2026-27 के बजट की आलोचना करते हुए कहा कि इसमें बेरोजगारी, बढ़ते खर्च और असमानता जैसे अहम मुद्दों को नजरअंदाज किया गया है। केंद्रीय बजट पर चर्चा की शुरुआत में उन्होंने मिर्जा गालिब का शेर पढ़कर सरकार पर कटाक्ष करते हुए कहा कि बजट हकीकत से ज्यादा दिखावे जैसा है।

Shashi Tharoor on Budget 2026

कांग्रेस सांसद शशि थरूर (तस्वीर-PTI)

Photo : PTI

Shashi Tharoor on Budget 2026 : लोकसभा में मंगलवार को केंद्रीय बजट 2026-27 पर चर्चा के दौरान कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि इस बजट में बेरोजगारी, महंगाई, बढ़ती असमानता और आम आदमी की परेशानियों को नजरअंदाज किया गया है। थरूर ने कहा कि बजट में बड़े-बड़े दावे तो किए गए हैं, लेकिन जमीन पर आम लोगों को राहत देने के ठोस कदम दिखाई नहीं देते।

गालिब के शेर से सरकार पर कटाक्ष

सदन में चर्चा की शुरुआत करते हुए थरूर ने मशहूर शायर मिर्जा गालिब का शेर पढ़ा, हम को मालूम है जन्नत की हकीकत लेकिन, दिल को खुश रखने को ‘गालिब’ ये ख्याल अच्छा है। इस शेर के जरिए उन्होंने कहा कि सरकार का बजट भी कुछ ऐसा ही है, सुनने में अच्छा लगता है, लेकिन हकीकत अलग है। उनका कहना था कि बजट में घोषणाएं ज्यादा हैं और ठोस समाधान कम।

‘एयरबैग रीअरेंज’ करने जैसा बजट

न्यूज एजेंसी पीटीआई-भाषा के मुताबिक थरूर ने बजट की तुलना कार के एयरबैग से करते हुए कहा कि सरकार ने सिर्फ एयरबैग को इधर-उधर कर दिया है ताकि यात्रियों को सुरक्षित महसूस हो, लेकिन असली खतरे का समाधान नहीं किया गया। उनके मुताबिक, बजट में असली समस्याओं को हल करने के बजाय आंकड़ों और प्रावधानों को इस तरह पेश किया गया है कि सब कुछ बेहतर दिखे।

बेरोजगारी और महंगाई पर चिंता

कांग्रेस सांसद ने कहा कि देश में बेरोजगारी लगातार बढ़ रही है और नौकरियों की संख्या घट रही है। छोटे व्यापारी पहले से ही आर्थिक दबाव में हैं, ऊपर से नियमों के पालन की जटिल प्रक्रिया ने उन्हें और मुश्किल में डाल दिया है। उन्होंने कहा कि आम आदमी महंगाई और रोजमर्रा के बढ़ते खर्च से परेशान है, लेकिन बजट में इन समस्याओं के समाधान के लिए ठोस कदम नहीं दिखते।

कल्याणकारी योजनाओं पर सवाल

थरूर ने मीडिया रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि पिछले बजट में 53 बड़ी कल्याणकारी योजनाओं के लिए पांच लाख करोड़ रुपये से ज्यादा का प्रावधान किया गया था। लेकिन वित्त वर्ष के पहले नौ महीनों में सिर्फ 41 प्रतिशत राशि ही खर्च की गई। उन्होंने कहा कि अगर आवंटित धन सही तरीके से खर्च ही नहीं हो रहा, तो घोषणाओं का क्या मतलब है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा, “यह शासन नहीं, हेडलाइन मैनेजमेंट है।”

किसानों और कृषि क्षेत्र की अनदेखी

थरूर ने आरोप लगाया कि बजट में कृषि क्षेत्र को पर्याप्त महत्व नहीं दिया गया। उन्होंने कहा कि किसानों की आय दोगुनी करने का वादा अब तक पूरा नहीं हुआ है। उन्होंने प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना का जिक्र करते हुए कहा कि पिछले छह साल से किसानों को सालाना छह हजार रुपये ही मिल रहे हैं। कम से कम इस राशि को बढ़ाया जाना चाहिए था, लेकिन बजट में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है।

गिग वर्कर और अनौपचारिक श्रमिकों की स्थिति

उन्होंने कहा कि गिग वर्कर और अनौपचारिक क्षेत्र के मजदूर आज की नई अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं। इसके बावजूद बजट में उनके लिए कोई विशेष घोषणा नहीं की गई। थरूर के अनुसार, ये लोग असुरक्षा और अनिश्चितता में काम कर रहे हैं और उन्हें सामाजिक सुरक्षा की जरूरत है।

शिक्षा और बुनियादी सुविधाओं का मुद्दा

थरूर ने शिक्षा क्षेत्र की स्थिति पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि देश में डेढ़ लाख से ज्यादा स्कूलों में अब भी बिजली की सुविधा नहीं है। ऐसे में विकसित भारत का सपना कैसे पूरा होगा, यह एक बड़ा सवाल है।

विकसित भारत के लक्ष्य पर सवाल

हालांकि थरूर ने 2047 तक भारत को विकसित देश बनाने के लक्ष्य को सराहनीय बताया, लेकिन उन्होंने कहा कि बजट में इस दिशा में आगे बढ़ने का कोई स्पष्ट और भरोसेमंद रोडमैप नजर नहीं आता। उन्होंने कहा कि विकसित भारत केवल नारों और भाषणों से नहीं बनेगा, बल्कि तब बनेगा जब समाज के आखिरी व्यक्ति तक विकास का लाभ पहुंचेगा। चर्चा के दौरान थरूर के इन आरोपों पर सदन में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस देखने को मिली। बजट पर चर्चा आगे भी जारी रहने की संभावना है।

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रामानुज सिंह
रामानुज सिंह author

रामानुज सिंह पत्रकारिता में दो दशकों का व्यापक और समृद्ध अनुभव रखते हैं। उन्होंने टीवी और डिजिटल—दोनों ही प्लेटफॉर्म्स पर काम करते हुए बिजनेस, पर्सनल ... और देखें

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