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Share Market Today : Nifty 53, Sensex 151 अंक लुढ़ककर बंद, क्यों फिसला बाजार?

शेयर बाजार में आज बड़ी गिरावट के साथ शुरुआत हुई है। इसके बाद रिकवरी देखने को मिली, लेकिन दिन के अंत में सेंसेक्स निफ्टी सहित ज्यादातर बड़े इंडेकस लाल निशान में बंद हुए।

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शेयर बाजार में गिरावट

Stock Market Today: गुरुवार को भारतीय शेयर बाजार में बिकवाली हावी रही। निफ्टी जहां 53 अंक गिरकर बंद हुआ। वहीं, सेंसेक्स 151 अंक लुढ़ककर बंद हुआ। इससे पहले Sensex जहां 464 अंक 73,518.75 तक लुढ़क गया है। वहीं, Nifty 143 अंक की गिरावट के साथ 23,072 अंक तक गिर गया है। बाजार में बिकवाली का दायरा काफी व्यापक रहा और लार्जकैप से लेकर मिडकैप व स्मॉलकैप शेयरों तक दबाव देखने को मिला। सबसे ज्यादा नुकसान IT शेयरों को हुआ, जहां निवेशकों ने जमकर बिकवाली की। वैश्विक अनिश्चितता, अमेरिकी बाजारों से मिले कमजोर संकेत और मुनाफावसूली ने घरेलू बाजार की चाल बिगाड़ दी।

IT शेयरों में सबसे बड़ी गिरावट

आज के कारोबार में IT सेक्टर बाजार की गिरावट का सबसे बड़ा कारण बनकर उभरा। निफ्टी IT इंडेक्स 2 फीसदी से ज्यादा टूट गया। TCS, Infosys, HCL Tech, Wipro और Tech Mahindra जैसे दिग्गज शेयरों में तेज बिकवाली देखने को मिली। विश्लेषकों के मुताबिक अमेरिकी अर्थव्यवस्था में सुस्ती और टेक कंपनियों के खर्च को लेकर बढ़ती चिंताओं का असर भारतीय IT कंपनियों पर दिखाई दे रहा है। चूंकि भारतीय IT उद्योग का बड़ा हिस्सा अमेरिकी बाजार पर निर्भर है, इसलिए वहां की किसी भी आर्थिक कमजोरी का असर सीधे इन कंपनियों के शेयरों पर पड़ता है।

अमेरिका-ईरान तनाव से बढ़ी निवेशकों की चिंता

बाजार की कमजोरी के पीछे वैश्विक कारक भी अहम भूमिका निभा रहे हैं। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने निवेशकों को सतर्क कर दिया है। मध्य-पूर्व में किसी भी बड़े भू-राजनीतिक घटनाक्रम से कच्चे तेल की सप्लाई प्रभावित होने का खतरा रहता है। भारत दुनिया के सबसे बड़े तेल आयातकों में शामिल है। ऐसे में तेल की कीमतों में संभावित तेजी महंगाई बढ़ा सकती है और कंपनियों की लागत पर असर डाल सकती है। यही वजह है कि निवेशक फिलहाल जोखिम लेने से बच रहे हैं।

मिडकैप और स्मॉलकैप में भी बिकवाली

गिरावट केवल ब्लूचिप शेयरों तक सीमित नहीं रही। निफ्टी मिडकैप 100 में करीब 1 फीसदी और स्मॉलकैप इंडेक्स में भी लगभग इतनी ही गिरावट देखने को मिली। माइक्रोकैप शेयरों में तो बिकवाली और ज्यादा तेज रही। विशेषज्ञों का मानना है कि हाल के महीनों में कई मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में शानदार तेजी आई थी। ऊंचे स्तरों पर निवेशकों ने मुनाफावसूली शुरू कर दी है, जिससे व्यापक बाजार पर दबाव बढ़ गया।

ऑटो, रियल्टी और PSU बैंक भी फिसले

सेक्टोरल इंडेक्स पर नजर डालें तो IT के बाद सबसे ज्यादा दबाव ऑटो, रियल्टी और PSU बैंकिंग शेयरों में दिखाई दिया। निफ्टी ऑटो इंडेक्स 1 फीसदी से ज्यादा गिरा, जबकि रियल्टी और PSU बैंक इंडेक्स में भी करीब 1 फीसदी की कमजोरी दर्ज की गई। कंज्यूमर ड्यूरेबल्स और मेटल शेयरों में भी बिकवाली रही। हालांकि फार्मा और हेल्थकेयर सेक्टर ने कुछ मजबूती दिखाई। अनिश्चितता के माहौल में निवेशक डिफेंसिव सेक्टरों की तरफ रुख करते नजर आए।

VIX में तेजी, बढ़ सकती है वोलैटिलिटी

इंडिया VIX में बढ़त दर्ज की गई और यह 15.7 के ऊपर पहुंच गया। VIX को बाजार का 'फियर इंडेक्स' कहा जाता है। इसमें बढ़ोतरी यह संकेत देती है कि निवेशक आने वाले दिनों में ज्यादा उतार-चढ़ाव की आशंका जता रहे हैं। जब VIX बढ़ता है तो बाजार में जोखिम लेने की क्षमता घटती है और निवेशक सुरक्षित विकल्पों की तलाश करते हैं। फिलहाल बाजार में यही ट्रेंड देखने को मिल रहा है।

    खुलते ही क्यों टूटा बाजार

    अमेरिका-ईरान तनाव से ग्लोबल सेंटीमेंट खराब : मध्य-पूर्व में बढ़ते तनाव और तेल सप्लाई को लेकर चिंता ने वैश्विक बाजारों में जोखिम लेने की भूख कम कर दी है। इसका असर भारतीय बाजार पर भी दिख रहा है।

    IT शेयरों में भारी बिकवाली : Nifty IT करीब 2% से ज्यादा टूट गया। अमेरिकी अर्थव्यवस्था और टेक खर्च को लेकर चिंता के चलते TCS, Infosys, HCL Tech जैसे शेयर दबाव में हैं।

    मिडकैप और स्मॉलकैप में मुनाफावसूली : Nifty Smallcap 100 लगभग 1% और Microcap Index 1.17% गिरा। इससे बाजार की चौड़ाई कमजोर हुई।

    VIX में उछाल, बढ़ी घबराहट : India VIX 0.8% बढ़कर 15.76 पर पहुंचा, जो निवेशकों में बढ़ती अनिश्चितता और वोलैटिलिटी की आशंका दिखाता है।

    ऑटो, रियल्टी और PSU बैंक सबसे कमजोर : Nifty Auto (-1.2%), Realty (-1.27%) और PSU Bank (-1.14%) में बिकवाली ने बाजार पर अतिरिक्त दबाव डाला। केवल Pharma और Healthcare इंडेक्स हरे निशान में हैं।

    Yateendra Lawaniya
    यतींद्र लवानियाauthor

    प्रिंट और डिजिटल मीडिया में बिजनेस एवं इकोनॉमी कैटेगरी में 10 वर्षों से अधिक का अनुभव। पिछले 7 वर्षों से शेयर बाजार, कॉरपोरेट सेक्टर और आर्थिक नीतियों से जुड़ी खबरों पर विशेष पकड़। लेखन में केवल हेडलाइन तक सीमित न रहकर आंकड़ों, नीतिगत फैसलों और कॉरपोरेट दावों के पीछे की वास्तविक तस्वीर को बैलेंस्ड और आसान शब्दों में पाठकों तक पहुंचाने का प्रयास। वर्तमान में Times Now Hindi के लिए बाजार की हर हलचल और आर्थिक घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए हैं।

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