सेबी (SEBI) ने म्यूचुअल फंड हाउस को अब पहले से ज्यादा आजादी दे दी है। अब तक एक्टिव इक्विटी म्यूचुअल फंड्स (जो मुख्य रूप से शेयरों में पैसा लगाते हैं) के पास शेयरों के अलावा जो एक्स्ट्रा पैसा बचता था, उसे वे केवल कैश या मनी मार्केट में ही रख सकते थे। लेकिन अब नए नियमों के तहत फंड मैनेजर उस पैसे से सोना और चांदी भी खरीद सकेंगे। मान लीजिए अगर कोई लार्जकैप फंड है, तो उसे कम से कम 80% पैसा बड़े शेयरों में लगाना होता है। बाकी बचा 20% हिस्सा अब फंड मैनेजर गोल्ड या सिल्वर इंस्ट्रूमेंट्स में निवेश कर सकता है। इसका सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि जब शेयर बाजार में गिरावट आएगी, तब सोने-चांदी में किया गया यह निवेश आपके पोर्टफोलियो को डूबने से बचाएगा और जोखिम (Risk) कम करेगा।
रिटायरमेंट और बच्चों के लिए अब 'लाइफ साइकिल फंड'
सेबी ने एक और बड़ा फैसला लेते हुए पुराने 'रिटायरमेंट' और 'चिल्ड्रन सॉल्यूशन' ओरिएंटेड फंड्स को पूरी तरह बंद कर दिया है। इनकी जगह अब 'लाइफ साइकिल फंड्स' (Life Cycle Funds) की नई कैटेगरी शुरू की गई है। ये फंड 5 से 30 साल की लंबी अवधि के लिए होंगे। इनकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि शुरुआत में आपका ज्यादा पैसा शेयरों (इक्विटी) में लगाया जाएगा ताकि ज्यादा रिटर्न मिल सके, लेकिन जैसे-जैसे आपकी उम्र बढ़ेगी या मैच्योरिटी का समय नजदीक आएगा, फंड मैनेजर खुद-ब-खुद उस पैसे को शेयरों से निकालकर सुरक्षित निवेश (जैसे डेट या गोल्ड) में डाल देगा। हालांकि, निवेशकों को लंबे समय तक रोके रखने के लिए इसमें से जल्दी पैसा निकालने पर पहले साल में 3% तक का भारी एग्जिट लोड भी लगाया जाएगा।
फंड हाउस के लिए नए विकल्प और सख्त नियम
अब म्यूचुअल फंड कंपनियां एक साथ 'वैल्यू' (Value) और 'कॉन्ट्रा' (Contra) दोनों तरह के फंड ऑफर कर सकेंगी, जिसकी पहले मनाही थी। लेकिन सेबी ने यहां एक कड़ी शर्त रखी है कि इन दोनों स्कीमों के पोर्टफोलियो (शेयरों की लिस्ट) में 50% से अधिक समानता नहीं होनी चाहिए। इसके अलावा, सेबी ने 'थीमैटिक' और 'सेक्टोरल' फंड्स (जैसे किसी खास सेक्टर के फंड) पर भी सख्ती की है। अब कंपनियों को यह सुनिश्चित करना होगा कि उनके किसी खास थीम वाले फंड का 50% पोर्टफोलियो उनकी किसी दूसरी पुरानी स्कीम से मेल न खाता हो। इससे निवेशकों को एक ही तरह के शेयरों वाले कई फंड्स में फंसने से मुक्ति मिलेगी।
निवेशकों को क्या होगा फायदा?
सेबी के इन बदलावों का सबसे बड़ा फायदा 'डायवर्सिफिकेशन' यानी निवेश में विविधता का है। अब आपके पास एक ही फंड के जरिए शेयर, बॉन्ड, सोना और चांदी सबका फायदा उठाने का मौका होगा। लाइफ साइकिल फंड उन लोगों के लिए वरदान साबित होंगे जो खुद यह तय नहीं कर पाते कि उन्हें कब और कितना रिस्क कम करना चाहिए, क्योंकि अब यह काम बैंक या फंड हाउस ऑटोमैटिक तरीके से करेंगे। साथ ही, स्कीमों के बीच कम ओवरलैप होने से निवेशकों को सही मायने में 'अलग और नए' निवेश विकल्प चुनने का मौका मिलेगा, जिससे भविष्य में बेहतर रिटर्न की उम्मीद बढ़ जाएगी।
