SEBI का नया प्रस्ताव: शेयर और कमोडिटी बाजार में ट्रेडिंग नियम होंगे आसान, 54 नियमों में बदलाव की सिफारिश
- Authored by: रामानुज सिंह
- Updated Jan 11, 2026, 01:18 PM IST
SEBI Trading Rules: बाजार नियामक सेबी ने ट्रेडिंग से जुड़े नियमों को सरल बनाने के लिए नया प्रस्ताव पेश किया है। इसका मकसद स्टॉक एक्सचेंज की ट्रेडिंग व्यवस्था में बदलाव कर नियमों को आसान बनाना और बाजार सहभागियों पर अनुपालन का बोझ कम करना है। इस पहल से स्टॉक और कमोडिटी दोनों बाजारों में व्यापार करना अधिक सहज होगा।
सेबी ने ट्रेडिंग नियमों को आसान बनाने के लिए दिया नया प्रस्ताव (तस्वीर-istock)
SEBI Trading Rules : भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) ने शेयर बाजार और कमोडिटी बाजार से जुड़े ट्रेडिंग नियमों को आसान बनाने के लिए एक नया प्रस्ताव पेश किया है। इस प्रस्ताव का मुख्य उद्देश्य स्टॉक एक्सचेंजों पर लागू जटिल नियमों को सरल करना, दोहराव खत्म करना और बाजार के प्रतिभागियों पर अनुपालन (कम्प्लायंस) का बोझ कम करना है। SEBI का मानना है कि इससे कारोबार करने में आसानी बढ़ेगी और बाजार ज्यादा कुशल बनेगा।
स्टॉक और कमोडिटी बाजार के लिए एक जैसा ढांचा
SEBI के इस नए प्रस्ताव की खास बात यह है कि इसमें स्टॉक एक्सचेंज और कमोडिटी एक्सचेंज दोनों के लिए एक समान नियम बनाने की कोशिश की गई है। अभी तक दोनों सेगमेंट के लिए अलग-अलग नियम और सर्कुलर लागू थे, जिससे निवेशकों, ब्रोकरों और एक्सचेंजों को कई बार भ्रम और अतिरिक्त अनुपालन का सामना करना पड़ता था। नए ढांचे के तहत इक्विटी और कमोडिटी सेगमेंट को एक ही फ्रेमवर्क में शामिल करने का सुझाव दिया गया है।
54 नियमों में बदलाव का प्रस्ताव
SEBI की ओर से जारी कंसल्टेशन पेपर में कुल 54 नियमों में बदलाव की सिफारिश की गई है। इनमें ट्रेडिंग से जुड़े कई अहम पहलू शामिल हैं, जैसे प्राइस बैंड, सर्किट ब्रेकर, कॉल ऑक्शन, लिक्विडिटी बढ़ाने की योजनाएं और ट्रेडिंग से जुड़े अन्य प्रावधान। सेबी का कहना है कि इन नियमों में कई जगह दोहराव है, जिसे खत्म कर एक स्पष्ट और सरल व्यवस्था बनाई जा सकती है।
मार्जिन ट्रेडिंग और क्लाइंट से जुड़े नियम भी शामिल
प्रस्तावित बदलावों में मार्जिन ट्रेडिंग फैसिलिटी (MTF), विशिष्ट क्लाइंट कोड, पैन कार्ड की जरूरत, ट्रेडिंग के घंटे और दैनिक मूल्य सीमा (डेली प्राइस बैंड) से जुड़े नियम भी शामिल हैं। SEBI का उद्देश्य है कि इन सभी प्रावधानों को एक साथ लाकर नियमों को ज्यादा पारदर्शी और समझने में आसान बनाया जाए।
बल्क और ब्लॉक डील डिस्क्लोजर में बदलाव
आईएएनएस की रिपोर्ट के मुताबिक SEBI ने बल्क डील और ब्लॉक डील से जुड़े डिस्क्लोजर नियमों को भी सरल बनाने का प्रस्ताव रखा है। नियामक का मानना है कि दोनों तरह की डील्स के लिए अलग-अलग नियम होने के बजाय इन्हें मिलाया जा सकता है। साथ ही, बल्क डील डिस्क्लोजर को लेकर और स्पष्टता लाई जाएगी। इसका मतलब यह है कि यदि कोई बल्क डील अलग-अलग एक्सचेंजों पर पूरी होती है, तो उसकी जानकारी ग्राहक स्तर पर एक्सचेंजों द्वारा सार्वजनिक की जाएगी।
क्लियरिंग कॉरपोरेशन के लिए अलग मास्टर सर्कुलर
सेबी ने यह भी कहा है कि क्लियरिंग कॉरपोरेशंस पर लागू नियमों के लिए एक अलग मास्टर सर्कुलर लाया जाएगा। इससे रेगुलेटरी ओवरलैप यानी नियमों के टकराव को खत्म करने में मदद मिलेगी। अभी कई बार एक्सचेंज और क्लियरिंग कॉरपोरेशन के नियम एक-दूसरे से मिलते-जुलते या टकराते नजर आते हैं, जिससे भ्रम की स्थिति बनती है।
जुर्मानों में एकरूपता पर जोर
नियामक ने यह भी स्पष्ट किया है कि एक्सचेंजों और क्लियरिंग कॉरपोरेशंस द्वारा क्लाइंट कोड और ओटीआर (वन टाइम रजिस्ट्रेशन) आवंटन में संशोधन पर लगाए जाने वाले जुर्माने एक समान होने चाहिए। इससे बाजार के सभी प्रतिभागियों के लिए समान नियम लागू होंगे और भेदभाव की गुंजाइश कम होगी।
सरकार की नीति से जुड़ा कदम
यह प्रस्ताव केंद्र सरकार की उस नीति के अनुरूप है, जिसमें वित्तीय क्षेत्र में अनुपालन को सरल और सस्ता बनाने पर जोर दिया जा रहा है। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण पहले ही परामर्श प्रक्रिया के जरिए नियमों को आसान बनाने और लागत कम करने की बात कह चुकी हैं। सेबी का यह कदम उसी दिशा में एक अहम पहल माना जा रहा है।
कुल मिलाकर, सेबी का यह प्रस्ताव बाजार को ज्यादा सरल, पारदर्शी और निवेशकों के लिए अनुकूल बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है। अगर ये बदलाव लागू होते हैं, तो इससे न सिर्फ बाजार के प्रतिभागियों को राहत मिलेगी, बल्कि ट्रेडिंग गतिविधियों में भी तेजी आने की उम्मीद है।
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