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म्यूचुअल फंड की तरह Bonds में निवेश होगा सेफ, SEBI ला रहा Credit Risk-o-Meter

शेयर बाजार के नियामक SEBI ने अब कॉर्पोरेट बॉन्ड्स में निवेश को भी म्यूचुअल फंड की तरह सेफ बनाने की तैयारी शुरू कर दी है। इसके लिए सेबी नया क्रेडिट रिस्क ओ मीटर ला रहा है।

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सेबी लेकर आ रहा बॉन्ड्स के लिए रिस्क मीटर

Corporate Bonds SEBI Regulation : आमतौर पर कॉरपोरेट बॉन्ड सीधे शेयर बाजार में निवेश की तुलना में ज्यादा सुरक्षित होता है। यहां FD से ज्यादा ब्याज और बाजार से ज्यादा सुरक्षा के चलते काफी निवेशक पैसा लगाते हैं। हालांकि, कई बार निवेशक ज्यादा लालच में आकर ऐसी कंपनियों के बॉन्ड्स में पैसा लगा देते हैं, जिनका क्रेडिट प्रोफाइल अच्छा नहीं होता और पैसा डूबने का काफी खतरा होता है।

लेकिन, अब SEBI ने Bonds में निवेश को Mutual Funds की तरह सुरक्षित बनाने के लिए क्रेडिट रिस्क ओ मीटर (Credit Risk-o-Meter) पेश किया है। इसे 21 नवंबर से लागू किया जाएगा। इसके तहत बॉन्ड का क्रेडिट रिस्क 6 रंगों और स्तरों में दिखाना जरूरी होगा। नए नियम 21 नवंबर 2026 से लागू होंगे।

क्या है SEBI का क्रेडिट रिस्क ओ मीटर?

SEBI का नया Risk-o-Meter एक तरह से बॉन्ड के जोखिम का इंडिकेटर है। इसका मकसद निवेशकों को यह समझने में मदद करना है कि जिस कंपनी या इश्यूअर के बॉन्ड में वे पैसा लगा रहे हैं, उसके ब्याज और मूलधन चुकाने में चूक करने का जोखिम कितना है। अभी निवेशकों को बॉन्ड की क्रेडिट रेटिंग देखकर उसके जोखिम का अंदाजा लगाना पड़ता है। लेकिन हर निवेशक के लिए AAA, AA, BBB या D जैसी रेटिंग का अर्थ समझना आसान नहीं होता। लेकिन, अब इस नए सिस्टम में रेटिंग को 6 स्तरों और अलग-अलग रंगों में दिखाया जाएगा। यह म्यूचुअल फंड के Risk-o-Meter जैसा दिख सकता है।

AAA से D तक, किस रेटिंग पर कितना जोखिम?

SEBI की तरफ से 7 अक्टूबर को जारी किए गए सर्कुलर के मुताबिक, क्रेडिट रेटिंग को इन 6 श्रेणियों में बांटा गया है। इसका सीधा मतलब है कि AAA रेटिंग वाला बॉन्ड क्रेडिट रिस्क के लिहाज से सबसे निचले जोखिम स्तर पर होगा, जबकि D रेटिंग सबसे ऊंचे जोखिम वाले समूह में आएगी।

हालांकि, कम जोखिम वाली रेटिंग का मतलब यह नहीं है कि निवेश पूरी तरह सुरक्षित है। रेटिंग जारीकर्ता की भुगतान क्षमता का आकलन है, भविष्य में भुगतान की गारंटी नहीं।

Risk-o-Meter का स्तर

क्रेडिट रेटिंग

शॉर्ट-टर्म रेटिंग

रंग

सबसे कम जोखिम

AAA

A1+

🟢 हरा

बहुत कम जोखिम

AA+, AA, AA−

A1

🟩 हल्का हरा

कम जोखिम

A+, A, A−

A2

🟡 पीला

मध्यम जोखिम

BBB+, BBB, BBB−

A3

🟤 भूरा

डिफॉल्ट का मध्यम जोखिम

BB+, BB, BB−

A4

🟠 नारंगी

ज्यादा से बहुत ज्यादा जोखिम

B+, B, B−, C+, C, C−, D

A4, D

🔴 लाल

स्रोत: SEBI सर्कुलर, 7 अक्टूबर 2026।

बॉन्ड प्लेटफॉर्म पर निवेशकों को क्या दिखेगा?

नए नियम के तहत जारीकर्ता और Online Bond Platform Providers (OBPPs) को Risk-o-Meter को ऑफर डॉक्यूमेंट, प्रॉस्पेक्टस, प्राइवेट प्लेसमेंट मेमोरेंडम, विज्ञापनों और अपने वेब व मोबाइल प्लेटफॉर्म पर दिखाना होगा। इसके साथ क्रेडिट रेटिंग एजेंसी का नाम और उस बॉन्ड की वास्तविक रेटिंग भी लिखनी होगी। अगर बॉन्ड अनसिक्योर्ड है, यानी उसके बदले कोई निर्धारित सिक्योरिटी नहीं है, तो इस जानकारी को बोल्ड लाल अक्षरों में दिखाना होगा। अगर किसी बॉन्ड की एक से अधिक क्रेडिट रेटिंग हैं, तो Risk-o-Meter में सबसे कम रेटिंग के आधार पर जोखिम दिखाया जाएगा। दूसरी रेटिंग भी साथ में बताई जा सकती हैं।

Yateendra Lawaniya
यतींद्र लवानियाauthor

प्रिंट और डिजिटल मीडिया में बिजनेस एवं इकोनॉमी कैटेगरी में 10 वर्षों से अधिक का अनुभव। पिछले 7 वर्षों से शेयर बाजार, कॉरपोरेट सेक्टर और आर्थिक नीतियों से जुड़ी खबरों पर विशेष पकड़। लेखन में केवल हेडलाइन तक सीमित न रहकर आंकड़ों, नीतिगत फैसलों और कॉरपोरेट दावों के पीछे की वास्तविक तस्वीर को बैलेंस्ड और आसान शब्दों में पाठकों तक पहुंचाने का प्रयास। वर्तमान में Times Now Hindi के लिए बाजार की हर हलचल और आर्थिक घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए हैं।

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