ट्रम्प प्रशासन ने टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS), इंफोसिस, विप्रो और HCLTech समेत 8 बड़ी आईटी कंपनियों को ग्रीन कार्ड से जुड़े PERM (परमानेंट लेबर सर्टिफिकेशन) प्रोग्राम से सस्पेंड कर दिया है। इस खबर के बाद आज आशंका जताई जा रही थी कि IT स्टॉक्स समेत बाजार में बड़ी गिरावट आएगी जिसकी चपेट में भातरीय रुपया भी आएगा। लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ है। भारतीय बाजार में आज शानदार तेजी है। सेंसेक्स करीब 800 अंक उछलकर कारोबार कर रहा है। वहीं, रुपया भी दहाड़ा है। रुपया शुक्रवार को शुरुआती कारोबार में 23 पैसे मजबूत होकर 96.65 प्रति डॉलर पर पहुंच गया है।
क्यों लौटी रुपये में तेजी?
विदेशी मुद्रा कारोबारियों ने बताया कि अमेरिकी डॉलर में मामूली नरमी और भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के संभावित हस्तक्षेप से घरेलू मुद्रा को थोड़ा समर्थन मिला है। हालांकि, घरेलू मुद्रा पर व्यापक भू-राजनीतिक दबाव बना हुआ है और विदेशी पूंजी की निरंतर निकासी से दबाव और बढ़ सकता है। अंतरबैंक विदेशी मुद्रा विनिमय बाजार में रुपया 96.74 प्रति डॉलर पर खुला। इसके बाद इसमें कुछ सुधार हुआ और यह 96.65 प्रति डॉलर पर पहुंच गया जो पिछले बंद भाव के मुकाबले 23 पैसे की बढ़त है। रुपया बृहस्पतिवार को 13 पैसे टूटकर 96.88 प्रति डॉलर पर बंद हुआ था।
डॉलर इंडेक्स में गिरावट
इस बीच, दुनिया की छह प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले अमेरिकी डॉलर की स्थिति को दर्शाने वाला डॉलर सूचकांक 0.10 प्रतिशत की मामूली गिरावट के साथ 102.03 पर रहा। अंतरराष्ट्रीय तेल मानक ब्रेंट कच्चा तेल का भाव वायदा कारोबार में 1.09 प्रतिशत टूटकर 103.14 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया। शेयर बाजार के आंकड़ों के अनुसार, विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) ने बृहस्पतिवार को शुद्ध रूप से 12,943.58 करोड़ रुपये के शेयर बेचे। करेंसी एक्सपर्ट का कहना है कि आज रुपये में मजबूती कच्चे तेल की कीमत में गिरावट और बाजार में रिकवरी के कारण आई है। अगर कच्चा तेल सस्ता होता है तो रुपया और मजबूत होगा।
