बाजार नियामक भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (SEBI) के पूर्णकालिक सदस्य के सी वार्ष्णेय ने कहा कि ‘जुर्माना’ शब्द के साथ जुड़ी बदनामी की भावना को ध्यान में रखते हुए सेबी अब गलत काम करने वाले ब्रोकर के खिलाफ कार्रवाई में इस शब्द का इस्तेमाल न करने पर विचार कर रहा है। उन्होंने बताया कि कई जुर्माने असल में दंड नहीं होते, लेकिन इनसे ब्रोकर की छवि खराब हो जाती है।
जुर्माने को तर्कसंगत बनाने की प्रक्रिया जारी
वार्ष्णेय ने बताया कि भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) जुर्माने की प्रकिया को और अधिक तर्कसंगत बनाने में लगा हुआ है। उद्योग मानक मंच (आईएसएफ) ने पिछले पांच महीनों में ब्रोकिंग उद्योग से जुड़े मुद्दों पर गहन चर्चा की है, जिसका उद्देश्य कारोबारी सुगमता बढ़ाना है।
विवादित मुद्दों पर बनी सहमति
हाल ही में राष्ट्रीय राजधानी में ब्रोकर, एनएसई और सेबी के अधिकारियों के बीच हुई बैठक में कुछ विवादित मुद्दों पर आम सहमति बनी है। वार्ष्णेय ने कहा कि जल्द ही इस पर आधिकारिक घोषणा की जाएगी और जुर्माने को तर्कसंगत बनाने का पहला चरण पूरा हो जाएगा।
नोडल प्राधिकरण और डेटा साझा करने की योजना
सेबी जुर्माने लगाने के लिए किसी एक्सचेंज को नोडल प्राधिकरण बनाने पर विचार कर रहा है। इसके अलावा, एक ऐसी प्रणाली शुरू करने की योजना है जहां ब्रोकर अपना डेटा एक ही पोर्टल पर साझा करेंगे। एक पोर्टल भी बनाया जाएगा जहां ब्रोकर पंजीकरण के बाद मंजूरी के लिए आवेदन कर सकेंगे।
फाइनेंस मंत्रालय के साथ बातचीत और नए सुधार
सेबी नियामक ब्रोकिंग उद्योग में कारोबारी सुगमता के अन्य पहलुओं पर वित्त मंत्रालय के साथ भी चर्चा कर रहा है। वार्ष्णेय ने सीडीएसएल और एनएसडीएल पर शुरू हो रही नई सुविधा का स्वागत करते हुए कहा कि निवेशक अब प्रॉक्सी सलाहकार कंपनियों की राय पढ़कर मतदान कर सकते हैं, जो कॉरपोरेट प्रशासन के लिए एक बड़ा कदम है।
सेबी अध्यक्ष की अनुकूलतम नियमन की सलाह
उन्होंने बताया कि सेबी के चेयरमैन तुहिन कांत पांडेय ने मार्च में पदभार संभालने के बाद कर्मचारियों को बाजार के लिए अनुकूलतम नियमन सुनिश्चित करने की सलाह दी है। (इनपुट भाषा)
