SBI Fixed Deposit 2026: अगर आप भी सुरक्षित निवेश का विकल्प तलाश रहे हैं और बाजार के उतार-चढ़ाव से दूर रहना चाहते हैं तो फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) आपके लिए एक बेहतर विकल्प हो सकता है। देश का सबसे बड़ा सार्वजनिक क्षेत्र का बैंक स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) अपने ग्राहकों को एफडी पर आकर्षक ब्याज दरें ऑफर कर रहा है । खास बात यह है कि वरिष्ठ नागरिकों (Senior Citizens) को सामान्य ग्राहकों की तुलना में अधिक ब्याज दिया जा रहा है। आप बैंक की 3 साल की अवधि वाली एफडी में पैसा लगा सकते हैं।
सीनियर सिटिजन को मिलेगा ज्यादा फायदा

FD (Photo: iStock)
एसबीआई की 3 साल की एफडी पर वरिष्ठ नागरिकों के लिए ब्याज दर 6.80 प्रतिशत निर्धारित की गई है। वहीं सामान्य ग्राहकों को इसी अवधि की एफडी पर 6.30 प्रतिशत ब्याज दिया जा रहा है। बैंक की यह अतिरिक्त ब्याज दर वरिष्ठ नागरिकों को उनकी बचत पर बेहतर कमाई का अवसर प्रदान करती है।
उदाहरण के लिए अगर कोई वरिष्ठ नागरिक 3 साल की अवधि के लिए 5 लाख रुपये की एफडी कराता है तो मैच्योरिटी पर उसे कुल 6,12,099 रुपये प्राप्त होंगे। इसका मतलब है कि निवेशक को मूलधन के अलावा करीब 1,12,099 रुपये का ब्याज मिलेगा।
सामान्य ग्राहकों को कितनी राशि मिलेगी
वहीं, सामान्य ग्राहकों के लिए 3 साल की एफडी पर ब्याज दर 6.30 प्रतिशत है। अगर कोई व्यक्ति 5 लाख रुपये का निवेश करता है, तो 3 साल बाद उसे कुल 6,03,131 रुपये मिलेंगे। यानी निवेशक को लगभग 1,03,131 रुपये का ब्याज लाभ प्राप्त होगा।
इस तरह देखा जाए तो समान निवेश राशि और समान अवधि के बावजूद वरिष्ठ नागरिकों को सामान्य ग्राहकों की तुलना में लगभग 8,968 रुपयेअधिक मिलते हैं। यही वजह है कि एफडी को वरिष्ठ नागरिकों के बीच एक लोकप्रिय निवेश विकल्प माना जाता है।
क्यों पसंद की जाती है एफडी?
फिक्स्ड डिपॉजिट उन निवेशकों के लिए एक अच्छा विकल्प मानी जाती है जो अपने पैसे की सुरक्षा के साथ निश्चित रिटर्न चाहते हैं। एफडी में निवेश करने पर पहले से तय ब्याज दर के अनुसार रिटर्न मिलता है, इसलिए बाजार में होने वाले उतार-चढ़ाव का इस पर कोई असर नहीं पड़ता।
इसके अलावा एफडी में निवेश करना आसान होता है और निवेशक अपनी जरूरत के अनुसार अलग-अलग अवधि का चुनाव कर सकते हैं। बैंक की विश्वसनीयता और निश्चित आय की सुविधा के कारण यह निवेश का एक लोकप्रिय माध्यम है।
एफडी के ब्याज पर टैक्स का नियम
हालांकि, एफडी से मिलने वाला ब्याज पूरी तरह टैक्स-फ्री नहीं होता। एफडी पर अर्जित ब्याज को निवेशक की आय में जोड़ा जाता है और उस पर लागू आयकर स्लैब के अनुसार टैक्स देना पड़ता है। अगर एक वित्तीय वर्ष में एफडी से मिलने वाला ब्याज निर्धारित सीमा से अधिक हो जाता है, तो बैंक स्रोत पर कर कटौती (TDS) भी कर सकता है। लेकिन जिन लोगों की कुल कर योग्य आय टैक्स सीमा से कम है, वे निर्धारित नियमों के तहत टीडीएस कटौती से बच सकते हैं।
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