आज के डिजिटल और हाई-टेक दौर में बैंक से जुड़ा आपका हर एक छोटा-बड़ा लेनदेन सीधे इनकम टैक्स विभाग के रडार पर होता है। सरकार ने बैंकों के लिए 'स्टेटमेंट ऑफ फाइनेंशियल ट्रांसेक्शंस' (SFT) को अनिवार्य किया हुआ है। इसके तहत अगर कोई खाताधारक अपने सेविंग अकाउंट में एक तय सीमा से ज्यादा का लेनदेन करता है, तो बैंक इसकी जानकारी खुद टैक्स डिपार्टमेंट को भेज देता है। कई बार लोगों को लगता है कि ऑनलाइन या कैश में थोड़ा-बहुत ज्यादा पैसा घुमाने से कुछ नहीं होगा, लेकिन टैक्स नियमों की अनदेखी आपको बड़ी मुसीबत में डाल सकती है। आइए जानते हैं Saving Account की उन 7 बड़े ट्रांसेक्शंस (Saving Account Transaction) के बारे में, जिन पर भूलकर भी लापरवाही नहीं बरतनी चाहिए।
आप न करें ये 7 गलतियां
1. सेविंग अकाउंट में भारी कैश जमा करना
आयकर नियमों के मुताबिक, यदि आप एक वित्तीय वर्ष (Financial Year) के भीतर अपने किसी एक या एक से अधिक सेविंग अकाउंट में कुल मिलाकर ₹10 लाख या उससे अधिक की नकदी (Cash Deposit) जमा करते हैं, तो बैंक इसकी रिपोर्ट तुरंत टैक्स विभाग को देता है। भले ही वह पैसा आपकी लीगल कमाई का हो, लेकिन लिमिट पार होते ही आपको उस पैसे का सोर्स (Income Source) साबित करने के लिए नोटिस आ सकता है।
2. बड़ी मात्रा में कैश विड्रॉल (निकासी) करना
सिर्फ कैश जमा करना ही नहीं, बल्कि खाते से भारी मात्रा में कैश निकालना भी टैक्स विभाग को चौकन्ना कर देता है। एक साल में अपने सेविंग अकाउंट से ₹10 लाख से ज्यादा की नकदी निकालने पर बैंक को इसकी सूचना देनी पड़ती है। इसके अलावा, एक तय सीमा (जैसे ₹20 लाख या ₹1 करोड़) से ज्यादा कैश निकालने पर टीडीएस (TDS) कटने का भी नियम है।
3. क्रेडिट कार्ड बिल का भारी कैश पेमेंट
अगर आप अपने क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल करते हैं और उसका बिल चुकाने के लिए कैश का इस्तेमाल करते हैं, तो सावधान हो जाएं। यदि आप साल भर में अपने क्रेडिट कार्ड के बिल का भुगतान करने के लिए ₹1 लाख या उससे अधिक का कैश जमा करते हैं, तो यह सीधे रडार पर आता है। वहीं, अगर आप ऑनलाइन या चेक के जरिए भी साल में ₹10 लाख से ज्यादा का क्रेडिट कार्ड बिल भरते हैं, तो टैक्स विभाग आपकी कमाई और खर्च का मिलान करने के लिए नोटिस भेज सकता है।
4. फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) में मोटा कैश इन्वेस्टमेंट
फिक्स्ड डिपॉजिट यानी एफडी कराना निवेश का एक सुरक्षित तरीका है। लेकिन अगर आप एक साल में ₹10 लाख या उससे ज्यादा की एफडी कैश जमा करके खुलवाते हैं, तो यह सीधे इनकम टैक्स की नजर में आ जाता है। टैक्स विभाग आपसे सवाल कर सकता है कि इस एफडी को कराने के लिए आपके पास इतना कैश कहाँ से आया।
5. शेयर बाजार, म्यूचुअल फंड या डिबेंचर्स में बड़ा निवेश
म्यूचुअल फंड (Mutual Funds), शेयर बाजार या बॉन्ड्स में निवेश करना आज काफी पॉपुलर है। लेकिन अगर आप एक साल के अंदर इन जगहों पर निवेश करने के लिए ₹10 लाख या उससे अधिक का ट्रांजेक्शन करते हैं, तो इसकी जानकारी सीधे SFT के जरिए टैक्स अधिकारियों तक पहुंचती है। ऐसे मामलों में यह देखा जाता है कि क्या आपकी घोषित सालाना आय इस बड़े निवेश से मेल खाती है या नहीं।
6. अचल संपत्ति (Property) की खरीद-फरोख्त
जब भी आप कोई प्लॉट, फ्लैट या मकान खरीदते या बेचते हैं और उसकी रजिस्ट्री की कीमत ₹30 लाख या उससे अधिक होती है, तो सब-रजिस्ट्रार इसकी जानकारी आयकर विभाग को देता है। यदि आपने प्रॉपर्टी खरीदने के लिए अपने सेविंग अकाउंट से बड़ा अमाउंट ट्रांसफर किया है, लेकिन आपके इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) में उतनी कमाई नहीं दिखती, तो नोटिस आना बिल्कुल तय है।
7. विदेशी मुद्रा (Foreign Currency) की खरीद
अगर आप विदेश यात्रा पर जा रहे हैं या किसी अन्य वजह से एक साल के भीतर ₹10 लाख या उससे अधिक मूल्य की विदेशी मुद्रा (फॉरेन करेंसी) खरीदते हैं, या फिर ट्रेवल कार्ड, फॉरेक्स कार्ड में इतना पैसा लोड करवाते हैं, तो इसकी रिपोर्ट भी टैक्स डिपार्टमेंट को दी जाती है।
