बिजनेस

Saraswati Saree IPO: सरस्वती साड़ी आईपीओ की जबरदस्त लिस्टिंग, पहले ही दिन शेयर में 31 फीसदी तक तेजी

Saraswati Saree Depot IPO: सरस्वती साड़ी डिपो के महाराष्ट्र में कोल्हापुर तथा उल्हासनगर दो स्टोर हैं। कंपनी थोक साड़ी का कारोबार करती है। और उसके आईपीओ को निवेशकों से अच्छा रिस्पांस मिला था। सरस्वती साड़ी डिपो के आईपीओ को अंतिम दिन गत बुधवार को 107.39 गुना सब्सक्रिप्शन मिला था।

Image

सरस्वती साड़ी डिपो आईपीओ लिस्टिंग

Saraswati Saree Depot IPO:थोक साड़ी क्षेत्र की प्रमुख कंपनी सरस्वती साड़ी डिपो का शेयर निर्गम मूल्य 160 रुपये से 25 प्रतिशत तेजी के साथ मंगलवार को बाजार में लिस्ट हुआ।बीएसई पर शेयर 200 रुपये पर लिस्ट हुआ। उसके बाद फिर 31.21 प्रतिशत चढ़कर 209.95 रुपये पर पहुंच गया।एनएसई पर शेयर ने 21.25 प्रतिशत की तेजी के साथ 194 रुपये पर शुरुआत की।कंपनी का बाजार मूल्यांकन 831.40 करोड़ रुपये रहा।सरस्वती साड़ी डिपो के आरंभिक सार्वजनिक निर्गम (आईपीओ) को पेशकश के अंतिम दिन गत बुधवार को 107.39 गुना सब्सक्रिप्शन मिला था। 160 करोड़ के आईपीओ के लिए मूल्य दायरा 152-160 रुपये प्रति शेयर तय किया गया था।

कंपनी जुटाई पूंजी का क्या करेगी

कंपनी ने आईपीओ से प्राप्त पूंजी का इस्तेमाल वर्किंग कैपिटल जरूरतों और सामान्य कॉर्पोरेट उद्देश्यों के लिए करने का प्रस्ताव किया है।सरस्वती साड़ी डिपो के महाराष्ट्र में कोल्हापुर तथा उल्हासनगर दो स्टोर हैं। कंपनी थोक साड़ी का कारोबार करती है। और उसके आईपीओ को निवेशकों से अच्छा रिस्पांस मिला था। सरस्वती साड़ी डिपो के आईपीओ को अंतिम दिन गत बुधवार को 107.39 गुना सब्सक्रिप्शन मिला था। आईपीओ साइज 160 करोड़ रुपये का था।

सेबी के 76 हजार करोड़ फंसे

पूंजी बाजार नियामक सेबी ने 76,293 करोड़ रुपये बकाया राशि की वसूली को ‘मुश्किल’ की श्रेणी में रखा है। यह पिछले साल की तुलना में चार प्रतिशत अधिक है।इसमें से एक बड़ा हिस्सा अदालत के आदेश से नियुक्त समितियों के समक्ष लंबित मामलों के कारण है।बकाया राशि की वसूली कठिन है। यह ऐसी राशि है, जिनकी वसूली के सभी उपायों को लागू करने के बाद भी नहीं हो पाई है। रिपोर्ट के अनुसार, 31 मार्च, 2024 तक सेबी ने डीटीआर के रूप में 807 मामलों की पहचान की। इनपर कुल बकाया 76,293 करोड़ रुपये था। वहीं पिछले साल 73,287 करोड़ रुपये के 692 मामले थे।इन 807 मामलों में से 36 मामले राज्य की अदालतों, राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण (एनसीएलटी), राष्ट्रीय कंपनी विधि अपीलीय न्यायाधिकरण (एनसीएलएटी) में चल रही कार्यवाही के कारण लंबित हैं। इन मामलों 12,199 करोड़ रुपये की राशि शामिल हैं।इसके अलावा, 60 मामले अदालत द्वारा गठित समितियों के समक्ष हैं, जिनमें 59,970 करोड़ रुपये शामिल हैं।

Prashant Srivastav
प्रशांत श्रीवास्तवauthor

करीब 17 साल से पत्रकारिता जगत से जुड़ा हुआ हूं। और इस दौरान मीडिया की सभी विधाओं यानी टेलीविजन, प्रिंट, मैगजीन, डिजिटल और बिजनेस पत्रकारिता में काम करने का मौका मिला। इस समय Timesnowhindi.com में टीम लीड के रुप में बिजनेस, ऑटो, यूटीलिटी, टेक सेक्शन में अपना योगदान दे रहा हूं। करियर का पहला ब्रेक हैदराबाद स्थित मीडिया संस्थान ईटीवी से टेलीविजन के जरिए हुआ। यहां पर टेलीविजन पत्रकारिता की बारीकियों को समझने का मौका मिला। और उसके बाद अगला पड़ाव दिल्ली स्थित दैनिक भास्कर समूह का बिजनेस भास्कर रहा। यहां से बिजनेस पत्रकारिता में कदम रखा। और यह सफर वित्त मंत्रालय की रिपोर्टिंग से लेकर बैंकिंग, इंश्योरेंस, ऑटो, एफएमसीजी, एमएमएमई, टेलीकॉम सेक्टर की ग्राउंड रिपोर्ट से लेकर कॉरपोरेट जगत की खबरें और इकोनॉमी से जुड़ी खबरों से गुजरते हुए अमर उजाला, मनी भास्कर वेबसाइट से होकर आउटलुक मैगजीन पहुंचा। यहां पर पॉलिटिकल खबरों को करने का मौका मिला। आउटलुक में रहते हुए भाजपा और कांग्रेस पार्टी को भी कवर किया। इस दौरान दिल्ली दंगों पर ग्राउंड रिपोर्ट से लेकर सीएए आंदोलन, किसान आंदोलन और कृषि जगत, वाइल्ड लाइफ से जुड़ी ग्राउंड रिपोर्ट भी करने का मौका मिला। करियर के इस सफर में 2014 लोक सभा चुनाव, 2019 लोक सभा चुनाव, इसके अलावा उत्तर प्रदेश विधान सभा चुनाव, राजस्थान विधान सभा, मध्य प्रदेश विधान सभा चुनाव की ग्राउंड रिपोर्ट भी की। पिछले 16 साल से केंद्रीय बजट की बारीकियों को समझकर उसे आम भाषा में लोगों तक पहुंचाने का भी प्रयास किया है। 17 साल के करियर में करीब 10 साल डिजिटल मीडिया का अनुभव रहा है। पिछले 3 साल से टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहा हूं। पत्रकारिता का ककहरा माखन लाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय भोपाल से सीखा है।

और पढ़ें
End of Article