Tax Regime Change Rule : नई और पुरानी टैक्स रेजीम को लेकर टैक्सपेयर्स के मन में अभी भी ऐसे बहुत से सवाल हैं, जिनके जवाब उन्हें नहीं मिले हैं। इन्हीं में से एक सवाल टैक्स रेजीम को बदलने लेकर है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) ने आयकर अधिनियम की धारा 115बीएसी का हवाला देते हुए कहा है कि वे लोग जो सैलेरी वाले कर्मचारी हैं, वे हर साल अपनी टैक्स रेजीम बदल सकते हैं। पर ये मौका सभी को नहीं मिलेगा।
इन्हें नहीं मिलेगा मौका
सैलेरी पाने वाले कर्मचारी हर साल पुरानी या नई टैक्स रेजीम में से कोई चुन सकेंगे, मगर वे लोग जो किसी प्रोफेशन से इनकम हासिल करते हैं या कारोबारी हैं, उन्हें ये मौका बार-बार नहीं दिया जाएगा। बल्कि वे जो टैक्स रेजीम चुनेंगे, उसे केवल एक बार ही बदल पाएंगे। एक बार बदलने के बाद उन्हें ये मौका नहीं मिलेगा। डिफॉल्ट के तौर पर बिना छूट वाली नई टैक्स रेजीम रहेगी। यानी यदि न चुनी जाए तो उन्हें नई टैक्स रेजीम के अनुसार टैक्स देना होगा।
सैलेरी वालों के लिए टीडीएस कटौती
सीबीडीटी ने यह भी क्लियर कर दिया है कि एम्प्लॉयर्स अपने हर कर्मचारी से उनकी पसंदीदा टैक्स रेजीम के बारे में पूछें। ऐसे में हर कर्मचारी को अपनी कंपनी को बताना चाहिए कि वे कौन सी टैक्स रेजीम चुनना पसंद करेंगे, ताकि कंपनी उसी हिसाब से टीडीएस काटे। सैलेरी वाले कर्मचारी भी यदि कोई एक टैक्स रेजीम नहीं चुनते हैं तो उन्हें डिफॉल्ट के तौर पर नई टैक्स रेजीम में माना जाएगा और उसी हिसाब से उनका टैक्स काटा जाएगा।
पुरानी और नई टैक्स रेजीम में फर्क
नई टैक्स रेजीम में 7 लाख रुपये तक की सालाना इनकम पर कोई टैक्स नहीं लगेगा। इस रेजीम में अब 50,000 रुपये की स्टैंडर्ड डिडक्शन की भी छूट मिलेगी। बेसिक छूट लिमिट 3 लाख रुपये तक कर दी गयी है। कुछ और फायदे भी इस रेजीम में सरकार ने इसलिए शामिल किए हैं ताकि इस रेजीम को और अधिक आकर्षक बनाया जा सके। पुरानी टैक्स रेजीम में कई छूट मिलती हैं। उसमें 5 लाख रुपये तक की वार्षिक आय टैक्स फ्री रहेगी।
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