Dollar Vs Rupee: शेयर बाजार के साथ आज दूसरे दिन रुपये में बड़ी गिरावट है। रुपया बुधवार को शुरुआती कारोबार में 41 पैसे टूटकर अमेरिकी मुद्रा के मुकाबले 91.38 के अब तक के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया। यह रुपये में एक दिन में बड़ी गिरावट है। आपको बता दें कि इस साल जनवरी में अबतक रुपये में 1.70% की गिरावट आ गई है। अंतरबैंक विदेशी मुद्रा विनिमय बाजार में रुपया 91.05 प्रति डॉलर पर खुला। फिर अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 31 पैसे टूटकर 91.28 पर आ गया। इसके बाद और टूटकर 91.38 के लो पर पहुंच गया। रुपया मंगलवार को सात पैसे की गिरावट के साथ अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रिकॉर्ड निचले स्तर 90.97 पर बंद हुआ था।
क्यों टूट रहा है भातरीय रुपया?
विदेशी मुद्रा कारोबारियों ने बताया कि डॉलर की स्थिर मांग और वैश्विक स्तर पर सतर्कता भरे माहौल के कारण रुपये में गिरावट आई। भू-राजनीतिक अनिश्चितता ने जोखिम से बचने की प्रवृत्ति को बढ़ावा दिया और उभरते बाजारों की मुद्राओं पर दबाव बनाए रखा है। उन्होंने कहा कि इसके अलावा, विदेशी पूंजी की निकासी के कारण घरेलू शेयर बाजार में सुस्ती भी इसकी एक वजह रही। इस बीच, छह प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले अमेरिकी डॉलर की स्थिति को दर्शाने वाला डॉलर सूचकांक 0.05 प्रतिशत की गिरावट के साथ 98.59 पर रहा।
शेयर बाजार में दूसरे दिन भी बड़ी गिरावट
घरेलू शेयर बाजार के मोर्चे पर सेंसेक्स शुरुआती कारोबार में 385.82 अंक टूटकर 81,794.65 अंक पर जबकि निफ्टी 91.5 अंक फिसलकर 25,141 अंक पर पहुंच गया। अंतरराष्ट्रीय मानक ब्रेंट क्रूड का भाव 1.11 प्रतिशत की गिरावट के साथ 64.20 डॉलर प्रति बैरल रहा।
शेयर बाजार के आंकड़ों के मुताबिक, विदेशी संस्थागत निवेशक (एफआईआई) मंगलवार को बिकवाल रहे थे और उन्होंने शुद्ध रूप से 2,938.33 करोड़ रुपये के शेयर बेचे।
रुपये टूटने का क्या असर होता है?
रुपया कमजोर होने से आयात महंगा हो जाता है, जिससे पेट्रोल-डीजल, गैस, इलेक्ट्रॉनिक्स और दवाओं की कीमतें बढ़ती हैं और आम लोगों पर महंगाई का बोझ बढ़ता है। विदेशी यात्रा और पढ़ाई भी महंगी हो जाती है। वहीं, आईटी, फार्मा और निर्यात से जुड़ी कंपनियों को कमजोर रुपये से फायदा मिलता है क्योंकि उनकी डॉलर में कमाई बढ़ती है। शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव बढ़ता है और सरकार व RBI पर दबाव भी बढ़ता है।
