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Rupee Forecast : डॉलर के मुकाबले महा-गिरावट की आशंका, 106 तक लुढ़क सकता है रुपया

डॉलर के मुकाबले रुपये में अगले दो साल में बड़ी गिरावट आ सकती है। एक्सिस बैंक की एक रिसर्च रिपोर्ट के मुताबिक 2027 में रुपया डॉलर के मुकाबले 102 और 2028 तक 106 के स्तर तक लुढ़क सकता है।

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रुपये में जारी रहेगा कमजोरी का दौर

Rupee Forecast : भारतीय रुपये में पिछले कुछ दिनों से रिकवरी जरूर दिख रही है, लेकिन लंबी अवधि में तस्वीर चिंताजनक है। Axis Bank Research का अनुमान है कि दिसंबर 2027 तक रुपया डॉलर के मुकाबले 100–102 और दिसंबर 2028 तक 104–106 के स्तर पर पहुंच सकता है। बैंक के मुताबिक, विदेशी पूंजी की लगातार निकासी, RBI के डॉलर बाजार में हस्तक्षेप और विदेशी मुद्रा भंडार को दोबारा मजबूत करने की जरूरत रुपये पर दबाव बनाए रख सकती है।

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क्या है Axis Bank का अनुमान?

Axis Bank Research ने 3 नवंबर की अपनी रिपोर्ट The Middle (Kingdom) Path में रुपये को लेकर पहले के अनुमान बरकरार रखे हैं। बैंक के मुताबिक, मार्च 2027 तक डॉलर के मुकाबले रुपया 97–99 और जून 2027 तक 98–100 के दायरे में रह सकता है। इसके बाद दिसंबर 2027 तक इसके 100–102 और दिसंबर 2028 तक 104–106 तक कमजोर होने की आशंका है।

रिपोर्ट का मतलब है कि रुपये को मौजूदा स्तरों से आगे भी कमजोरी का सामना करना पड़ सकता है। बैंक का अनुमान है कि अपनी उचित वैल्यू (Fair Value) तक पहुंचने के लिए रुपये को 5–10% और कमजोर होना पड़ सकता है।

RBI के उपाय क्यों नहीं आ रहे काम?

Axis Bank के मुताबिक, रुपये की कमजोरी के पीछे सबसे बड़ी वजह भारत की बाहरी वित्तीय स्थिति पर बढ़ता दबाव है। विदेशी निवेश का लगातार बाहर जाना और डॉलर की मांग रुपये को कमजोर कर रही है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) रुपये में तेज गिरावट रोकने के लिए बाजार में डॉलर बेचकर हस्तक्षेप करता रहा है। इससे मुद्रा बाजार में उतार-चढ़ाव तो नियंत्रित होता है, लेकिन बैंक के मुताबिक प्रभावी विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव पड़ता है। ऐसे में RBI के लिए आने वाले समय में विदेशी मुद्रा भंडार को दोबारा मजबूत करना प्राथमिकता रह सकती है।

कहां से लीक हो रहा डॉलर?

रिपोर्ट में विदेश जाने वाले पैसे के दो बड़े स्रोतों का भी जिक्र है। इसके मुताबिक, लिबरलाइज्ड रेमिटेंस स्कीम (LRS) के तहत हर महीने करीब 2–3 अरब डॉलर विदेश भेजे जा रहे हैं। वहीं, ओवरसीज डायरेक्ट इन्वेस्टमेंट (ODI) के जरिये भी लगभग 3 अरब डॉलर का मासिक आउटफ्लो हो रहा है। बैंक का मानना है कि इन लेनदेन पर पाबंदियां लगाने से कुछ राहत मिल सकती है, लेकिन भारत की व्यापक विदेशी वित्तीय जरूरतों का दबाव खत्म नहीं होगा।

क्यों नहीं बदला अनुमान?

पिछले करीब एक महीने में डॉलर के मुकाबले रुपये में मजबूती देखने को मिली है। पिछले एक सप्ताह में डॉलर के मुकाबले भारतीय मुद्रा करीब 37 पैसे मजबूत हुई है। क्योंकि, विदेशी निवेश (FII) की वापसी हो रही है। इसके अलावा अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में नरमी और डॉलर में स्थिरता से रुपये को सपोर्ट कर रहे हैं। खासतौर पर अमेरिका की 10 साल की ट्रेजरी यील्ड भी करीब 4.9% पर आने से रुपये पर दबाव कुछ कम हुआ है। लेकिन, इसके बाद भी लॉन्ग टर्म के लिए अनुमान कमजोर है।

रुपये के लिए कौन से स्तर अहम?

तकनीकी संकेतों के मुताबिक, डॉलर-रुपया एक्सचेंज रेट में 94.20–94.40 का दायरा अहम है। रुपये में मजबूती जारी रहने पर डॉलर के मुकाबले 93.50 का स्तर देखने को मिल सकता है। वहीं, इस दायरे को पार करने में नाकाम रहने पर डॉलर दोबारा 95.25–95.80 की ओर बढ़ सकता है। अमेरिका में मिडटर्म चुनाव के नतीजे भी निकट अवधि में करेंसी मार्केट में उतार-चढ़ाव बढ़ा सकते हैं।

    Yateendra Lawaniya
    यतींद्र लवानियाauthor

    प्रिंट और डिजिटल मीडिया में बिजनेस एवं इकोनॉमी कैटेगरी में 10 वर्षों से अधिक का अनुभव। पिछले 7 वर्षों से शेयर बाजार, कॉरपोरेट सेक्टर और आर्थिक नीतियों से जुड़ी खबरों पर विशेष पकड़। लेखन में केवल हेडलाइन तक सीमित न रहकर आंकड़ों, नीतिगत फैसलों और कॉरपोरेट दावों के पीछे की वास्तविक तस्वीर को बैलेंस्ड और आसान शब्दों में पाठकों तक पहुंचाने का प्रयास। वर्तमान में Times Now Hindi के लिए बाजार की हर हलचल और आर्थिक घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए हैं।

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