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Dollar vs Rupee: रुपया रिकॉर्ड निचले स्तर पर, 1 डॉलर का भाव पहली बार 90 रुपए के पार

Dollar vs Rupee: भारतीय रुपया बुधवार को पहली बार 90 रुपये प्रति डॉलर के पार गिरकर रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गया। लगातार तीसरे दिन कमजोरी दर्ज हुई, जिसका कारण FPI निकासी, भारत-अमेरिका व्यापार समझौते पर अनिश्चितता और डॉलर की वैश्विक मजबूती मानी जा रही है। गिरावट से बाजार में चिंता बढ़ी है।

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रसातल में रुपया! (तस्वीर-istock)

Photo : iStock

Dollar vs Rupee: बुधवार 3 दिसंबर 2025 को शुरुआती कारोबार में भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 90.14 के ऐतिहासिक निचले स्तर पर पहुंच गया। यह लगातार तीसरे दिन है जब रुपये ने नया रिकॉर्ड कमजोर स्तर छुआ है। मुद्रा बाजार के जानकारों के अनुसार रुपये पर गिरावट का दबाव कई कारकों के चलते बढ़ रहा है, जिनमें विदेशी पोर्टफोलियो निवेश (FPI) की भारी निकासी, भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को लेकर अनिश्चितता, और महत्वपूर्ण तकनीकी स्तरों के नीचे फिसलना प्रमुख कारण हैं।

निवेशकों की बढ़ी चिंता

पिछले कुछ सत्रों से रुपये में निरंतर कमजोरी देखी जा रही है, जिससे निवेशकों की चिंता भी बढ़ गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक वैश्विक माहौल स्थिर नहीं होता और व्यापार समझौते पर स्पष्टता नहीं आती, तब तक रुपये पर दबाव बना रह सकता है। इसके अलावा, अमेरिकी डॉलर की मजबूती भी उभरते बाजारों की मुद्राओं पर नकारात्मक असर डाल रही है।

बाजार विश्लेषकों के अनुसार अगर स्थिति में सुधार नहीं हुआ तो भारतीय रिजर्व बैंक को हस्तक्षेप करना पड़ सकता है ताकि मुद्रा बाजार में स्थिरता लाई जा सके। वहीं, आयातकों और कॉरपोरेट सेक्टर के लिए गिरता रुपया लागत बढ़ा सकता है, जबकि निर्यातकों को इससे कुछ राहत मिलने की उम्मीद है। रुपये की यह लगातार कमजोरी वित्तीय बाजारों के लिए एक अहम संकेत है जिसे नीति निर्माताओं द्वारा गंभीरता से लिया जा रहा है।

पिछले दिन डॉलर के मुकाबले रुपया बंद स्तर

मंगलवार को अंतरबैंक विदेशी मुद्रा बाजार में रुपये में भारी गिरावट दर्ज की गई। रुपया 43 पैसे कमजोर होकर 89.96 प्रति डॉलर के अब तक के सबसे निचले स्तर पर बंद हुआ था। कारोबार के दौरान यह पहली बार 90 के स्तर को छू गया था, जो बाजार के लिए एक मनोवैज्ञानिक रूप से महत्वपूर्ण स्तर माना जाता है।

डॉलर की बढ़ती मांग से दबाव

विदेशी मुद्रा कारोबारियों के अनुसार, बाजार में डॉलर की कमी को पूरा करने के लिए सटोरियों की लगातार खरीद और आयातकों की ऊँची डॉलर मांग ने रुपये पर दबाव बढ़ा दिया। इसके अलावा विदेशी निवेश की निकासी और भारत-अमेरिका व्यापार समझौते पर बनी अनिश्चितता ने भी निवेशकों की धारणा कमजोर की।

कारोबार की शुरुआत से अंत तक गिरावट

रुपया मंगलवार को 89.70 प्रति डॉलर पर खुला था। दिन के दौरान यह 47 पैसे टूटकर 90.00 के रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गया। दिन के अंत में यह 89.96 प्रति डॉलर पर बंद हुआ, जबकि सोमवार को यह 89.53 पर बंद हुआ था।

विशेषज्ञों की राय: ‘90 का स्तर बेहद अहम’

न्यूज एजेंसी पीटीआई-भाषा के मुताबिक कोटक सिक्योरिटीज के मुद्रा विशेषज्ञ अनिंद्य बनर्जी ने कहा कि 90 का स्तर बहुत महत्वपूर्ण है। यदि रुपया इस स्तर के ऊपर जाता है, तो इसकी तेजी से गिरावट 91 या उससे ऊपर तक जा सकती है। उन्होंने कहा कि केंद्रीय बैंक को इस स्तर से नीचे सक्रिय रहना चाहिए ताकि सटोरिए एकतरफा दांव न लगा सकें और बाजार में अनावश्यक अस्थिरता न बढ़े।

एफआईआई की बिकवाली से बढ़ी कमजोरी

मिराए एसेट शेयरखान के विश्लेषक अनुज चौधरी ने बताया कि लगातार एफआईआई की पूंजी निकासी और बढ़ते व्यापार घाटे की वजह से रुपये में गिरावट तेज हुई और यह 89.96 के रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गया। मंगलवार को एफआईआई ने शेयर बाजार में 3,642.30 करोड़ रुपये की शुद्ध बिकवाली की।

अन्य बाजारों में भी कमजोरी

डॉलर इंडेक्स 0.06% बढ़कर 99.41 पर पहुंच गया, जिससे डॉलर मजबूत और रुपये पर दबाव और बढ़ गया। घरेलू शेयर बाजार में भी गिरावट देखी गई। सेंसेक्स 503.63 अंक टूटकर 85,138.27 पर और निफ्टी 143.55 अंक गिरकर 26,032.20 पर बंद हुआ। वहीं, ब्रेंट क्रूड की कीमत 0.25% घटकर 63.03 डॉलर प्रति बैरल रही।

Ramanuj Singh
रामानुज सिंहauthor

रामानुज सिंह पत्रकारिता में दो दशकों का व्यापक और समृद्ध अनुभव रखते हैं। उन्होंने टीवी और डिजिटल—दोनों ही प्लेटफॉर्म्स पर काम करते हुए बिजनेस, पर्सनल फाइनेंस, शेयर बाजार, इनकम टैक्स, बैंकिंग, बुलियन और कमोडिटी मार्केट जैसे विषयों पर गहरी विशेषज्ञता विकसित की है। जर्नलिज्म में एमए की डिग्री और वर्षों के अनुभव से विकसित विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण के साथ, रामानुज जटिल वित्तीय विषयों को सरल, विश्वसनीय और प्रभावी तरीके से पाठकों तक पहुंचाने के लिए जाने जाते हैं। अब तक वे 22,000 से अधिक स्टोरीज लिख चुके हैं।

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