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अधिक इनकम टैक्स कलेक्शन का मतलब मिडिल क्लास को दबाना नहीं, ऐसा क्यों बोलीं वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण

Income Tax News: वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने राज्यसभा में कहा कि व्यक्तिगत आयकर में वृद्धि का मतलब यह नहीं कि मध्यम वर्ग (middle class) दबाव में है। 2026-27 के केंद्रीय बजट पर चर्चा का जवाब देते हुए उन्होंने कहा कि मध्यम वर्ग लगातार आगे बढ़ रहा है और उनके विस्तार के स्पष्ट सबूत मौजूद हैं, दबाव का कोई संकेत नहीं है।

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वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण

Income Tax News: निर्मला सीतारमण ने गुरुवार को राज्यसभा में कहा कि देश में व्यक्तिगत आयकर संग्रह (ncome Tax Collection) बढ़ने का मतलब यह नहीं है कि मध्यम वर्ग (middle class) पर दबाव बढ़ रहा है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि ऐसा कोई सबूत नहीं है जिससे यह साबित हो कि मध्यम वर्ग को दबाया जा रहा है। बल्कि इसके उलट, कई ऐसे संकेत हैं जो बताते हैं कि मध्यम वर्ग लगातार आगे बढ़ रहा है और उसका दायरा बढ़ रहा है। वित्त मंत्री 2026-27 के केंद्रीय बजट पर चर्चा का जवाब दे रही थीं। उन्होंने विपक्ष के उन आरोपों को खारिज किया, जिनमें कहा गया था कि मध्यम वर्ग अमीर और गरीब के बीच फंस गया है। उन्होंने कहा कि ऐसा इसलिए लग सकता है क्योंकि अब व्यक्तिगत आयकर का संग्रह कॉरपोरेट टैक्स से ज्यादा हो गया है। लेकिन इसका सीधा मतलब यह नहीं है कि मध्यम वर्ग पर बोझ बढ़ा है। उन्होंने बिना नाम लिए राहुल गांधी के उस बयान पर भी प्रतिक्रिया दी, जिसमें अर्थव्यवस्था को “मृत” बताया गया था। सीतारमण ने इसे नकारात्मक सोच बताया और कहा कि ऐसा कहना देश की जनता का मजाक उड़ाने जैसा है, जो देश की आर्थिक वृद्धि में योगदान दे रही है।

करदाताओं की संख्या में बड़ा इजाफा

न्यूज एजेंसी पीटीआई-भाषा के मुताबकि वित्त मंत्री ने आंकड़ों के जरिए अपनी बात समझाई। उन्होंने कहा कि 2013-14 में करदाताओं की संख्या 5.26 करोड़ थी, जो 2024-25 में बढ़कर 12.13 करोड़ हो गई है। यानी पिछले 11 वर्षों में करदाताओं की संख्या लगभग दोगुनी हो गई है। यह हर साल औसतन 7.9 प्रतिशत की वृद्धि को दिखाता है। उन्होंने कहा कि यह देश में मध्यम वर्ग के सबसे बड़े संरचनात्मक विस्तार का संकेत है। अब ज्यादा लोग कर देने की स्थिति में हैं। संगठित क्षेत्र में आय दिख रही है और लोग स्वेच्छा से टैक्स दे रहे हैं। ऐसा इसलिए नहीं है कि सरकार ने टैक्स दरें बढ़ा दी हैं, बल्कि इसलिए कि लोगों की आय बढ़ी है।

आयकर सीमा में राहत

सीतारमण ने बताया कि इस विस्तार के बावजूद सरकार ने आयकर सीमा बढ़ाई है। अब 12 लाख रुपये तक की आय पर कर नहीं देना होगा। वेतनभोगी वर्ग के लिए यह सीमा 12.75 लाख रुपये तक है। उन्होंने सवाल उठाया कि अगर 12.75 लाख रुपये तक कमाने वाले वेतनभोगी को टैक्स नहीं देना पड़ता, तो फिर यह कैसे कहा जा सकता है कि मध्यम वर्ग पर दबाव है? इसके अलावा, मानक कटौती भी बढ़ाई गई है। नई कर व्यवस्था को सरल बनाया गया है, जिससे रिटर्न भरना और जांच प्रक्रिया आसान हुई है। इससे आम करदाताओं को राहत मिली है।

जीएसटी सुधार और महंगाई पर नियंत्रण

वित्त मंत्री ने कहा कि अगली पीढ़ी के जीएसटी सुधारों और दरों को तर्कसंगत बनाने से घरेलू खर्च कम हुए हैं। जब वस्तुओं पर टैक्स दरें घटती हैं तो सामान सस्ता होता है, जिससे लोगों का मासिक खर्च घटता है। उन्होंने यह भी कहा कि महंगाई ऐतिहासिक रूप से कम स्तर पर है। बढ़ती वास्तविक आय और कम मुद्रास्फीति साथ-साथ चल रही है। ऐसे में यह कहना सही नहीं है कि मध्यम वर्ग दबाव में है।

कल्याणकारी योजनाओं पर खर्च में कमी नहीं

विपक्ष ने आरोप लगाया कि कई कल्याणकारी योजनाओं में खर्च घटाया गया है। इस पर सीतारमण ने कहा कि किसी भी योजना के लिए राज्यों को दिए जाने वाले फंड में कोई कमी नहीं की गई है। उन्होंने तुलना करते हुए बताया कि पिछले 10 वर्षों में 14 सामाजिक क्षेत्र की योजनाओं में केवल 37,000 करोड़ रुपये ही खर्च नहीं हो पाए, जबकि पिछली संप्रग सरकार के समय यह राशि 94,000 करोड़ रुपये थी। उन्होंने यह भी कहा कि बिना बजट आवंटन के योजनाओं की घोषणा करने का आरोप भी गलत है। उन्होंने पूर्व सरकार के समय के कई उदाहरण देकर विपक्ष के आरोपों को खारिज किया।

कर्ज और डीबीटी पर सरकार का पक्ष

वित्त मंत्री ने बढ़ते कर्ज को लेकर विपक्ष के आरोपों को भी नकारा। उन्होंने कहा कि सरकार जरूरत से ज्यादा कर्ज नहीं ले रही है। उन्होंने कांग्रेस पर “मगरमच्छ के आंसू” बहाने का आरोप लगाया। सीतारमण ने बताया कि सरकार ने प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (डीबीटी) के जरिए लाभार्थियों के खातों में 48 लाख करोड़ रुपये से अधिक की राशि सीधे भेजी है। इससे लीकेज यानी चोरी रुकी है और 4.31 लाख करोड़ रुपये की बचत हुई है।

अर्थव्यवस्था में संतुलन और नई पहल

उन्होंने कहा कि देश इस समय एक दुर्लभ स्थिति में है, जहां जीडीपी वृद्धि दर अच्छी है और मुद्रास्फीति कम है। इसे उन्होंने “वृहद आर्थिक संतुलन” की उपलब्धि बताया। वित्त मंत्री ने यह भी बताया कि 2026-27 के बजट में “शिक्षा से रोजगार और उद्यम” नाम की स्थायी समिति बनाने का प्रस्ताव है। इसका उद्देश्य युवाओं को सेवा क्षेत्र के लिए तैयार करना है। अंत में उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि पूरे देश की है। बजट में उठाए गए कदम आत्मनिर्भर और मजबूत भारत के निर्माण की दिशा में हैं। उन्होंने राज्यसभा सदस्यों से अपील की कि वे अपने-अपने राज्यों को बजट की योजनाओं में सक्रिय भागीदारी के लिए प्रेरित करें।

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रामानुज सिंह
रामानुज सिंह author

रामानुज सिंह पत्रकारिता में दो दशकों का व्यापक और समृद्ध अनुभव रखते हैं। उन्होंने टीवी और डिजिटल—दोनों ही प्लेटफॉर्म्स पर काम करते हुए बिजनेस, पर्सनल ... और देखें

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