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नौकरी छोड़ी हो या निकाले गए हो, अब 2 दिन में होगा फुल एंड फाइनल सेटलमेंट!

नए लेबर लॉ में किया गया यह सुधार कर्मचारियों के लिए बेहद फायदेमंद है। नौकरी छोड़ने या निकाले जाने पर तुरंत भुगतान मिलने से कर्मचारी आर्थिक रूप से सुरक्षित महसूस करेगा। PF, ग्रेच्युटी और अन्य बेनिफिट्स की प्रक्रिया भी पहले से अधिक तेज और आसान हो जाएगी। यह बदलाव भारतीय वर्कफोर्स के लिए एक सकारात्मक कदम है, जो भविष्य में रोजगार और रोजगार सुरक्षा दोनों को मजबूत करेगा।

New Labour Code F&F rule

देश में हाल ही में लागू किए गए नए लेबर लॉ (Labour Codes) के तहत कर्मचारियों से जुड़ी कई बड़ी परेशानियों को खत्म किया गया है। इन्हीं में से एक बड़ा बदलाव नौकरी छोड़ने के बाद मिलने वाले फुल एंड फाइनल सेटलमेंट को लेकर है। पहले की व्यवस्था में कर्मचारी को अंतिम सैलरी, लीव एनकैशमेंट, बोनस और बाकी बकाया रकम पाने के लिए कई-कई हफ्ते इंतजार करना पड़ता था। कई बार कंपनियां "क्लियरेंस" या इंटरनल प्रोसेस का बहाना बनाकर भुगतान को महीनों तक रोक देती थीं, जिससे कर्मचारी आर्थिक तनाव में आ जाता था। इसी समस्या को खत्म करने के लिए सरकार ने लेबर लॉ में अहम बदलाव किया है।

48 घंटे में मिलेगा पूरा भुगतान

नए नियम के अनुसार, अगर कोई कर्मचारी नौकरी छोड़ता है, रिलीव होता है, या कंपनी उसे टर्मिनेट करती है, तो कंपनी को 48 घंटे के अंदर पूरा भुगतान करना होगा। यह भुगतान सिर्फ सैलरी तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें लीव एनकैशमेंट, बोनस, इंसेंटिव और बाकी बकाया रकम भी शामिल है। इसका मतलब यह है कि अब कर्मचारी को अपने हक के पैसे के लिए लंबा इंतजार नहीं करना पड़ेगा।

यह सिस्टम उन लोगों के लिए बेहद फायदेमंद है जो नई नौकरी जॉइन करने से पहले पैसों पर निर्भर रहते हैं। नौकरी बदलते समय अक्सर महीना बीच में कट जाता है और अगली सैलरी मिलने में भी समय लगता है। ऐसे में फुल एंड फाइनल की देरी आर्थिक दबाव बढ़ा देती थी। लेकिन नया नियम इस परेशानी को खत्म करता है।

कर्मचारी को क्या बड़ा फायदा होगा?

इस बदलाव का सबसे बड़ा फायदा यह है कि कंपनी अब किसी भी बहाने से पेमेंट रोक नहीं सकेगी। पहले कंपनियां अकाउंट क्लोजर, पेपरवर्क या डिपार्टमेंटल अप्रूवल की वजह से देरी करती थीं। अब उन्हें तय समय 48 घंटे के अंदर भुगतान देना होगा। इससे नौकरी बदलने वाले कर्मचारियों को ट्रांजिशन के दौरान आर्थिक दिक्कत का सामना नहीं करना पड़ेगा। घर का खर्च, EMI, किराया या किसी जरूरी जरूरत को पूरा करने के लिए कर्मचारी को इंतजार नहीं करना पड़ेगा।

इसके साथ ही जिन कर्मचारियों को अचानक नौकरी से निकाल दिया जाता है, उनके लिए यह नियम बड़ी राहत है। ऐसी स्थिति में अक्सर व्यक्ति मानसिक और आर्थिक दोनों तरह से परेशान हो जाता है। लेकिन तुरंत पैसा मिल जाने से कम से कम आर्थिक दबाव काफी कम हो जाएगा।

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PF, ग्रेच्युटी और बाकी लाभ भी तेजी से मिलेंगे

नए लेबर लॉ केवल फुल एंड फाइनल तक सीमित नहीं हैं। इसमें यह भी कहा गया है कि PF ट्रांसफर, ग्रेच्युटी और अन्य सेटलमेंट बेनिफिट्स को तेजी और पारदर्शी तरीके से पूरा किया जाएगा। पहले PF ट्रांसफर में हफ्तों लगते थे, कई बार PF कार्यालय और कंपनी HR के बीच फाइल घूमती रहती थी। लेकिन अब डिजिटल प्रक्रिया इन कार्यों को काफी तेज बना देगी। कंपनियों को PF और ग्रेच्युटी के मामलों में लापरवाही नहीं करने दी जाएगी।

विशेष रूप से रिटायरमेंट या लंबी सर्विस वाले कर्मचारियों के लिए ग्रेच्युटी का समय पर मिलना बेहद महत्वपूर्ण होता है। नया नियम यह सुनिश्चित करेगा कि कर्मचारी अपनी सेविंग, निवेश या अन्य प्लानिंग समय पर कर सके और उसके पैसे कंपनी के पास अटके न रहें।

क्यों जरूरी था यह बदलाव?

भारत में लाखों कर्मचारी हर साल नौकरी बदलते हैं। इनमें से ज्यादातर लोग अपनी अंतिम सैलरी या बकाया पैसों के इंतजार में आर्थिक संकट झेलते हैं। कई बार परिवार का खर्च चलाना मुश्किल हो जाता है। कंपनियां भी क्लियरेंस में फंसा कर पेमेंट रोक देती थीं, जिससे शिकायतें लगातार बढ़ रही थीं।

सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कर्मचारी का कोई भी हक का पैसा कंपनी के पास न फंसे और उसे तुरंत मिल जाए। यह बदलाव कंपनियों को भी अधिक जिम्मेदार बनाता है और वर्क कल्चर को बेहतर करता है।

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रिचा त्रिपाठी
रिचा त्रिपाठी Author

रिचा त्रिपाठी टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में बिजनेस डेस्क पर सीनियर कॉपी एडिटर के रूप में कार्यरत हैं। मीडिया इंडस्ट्री में 7 वर्षों के अनुभव के साथ रिच... और देखें

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