REIT Vs Physical Real Estate : आज के समय में REIT (रियल एस्टेट इनवेस्टमेंट ट्रस्ट) पारंपरिक प्रॉपर्टी निवेश की तुलना में ज्यादा आसान, पारदर्शी और सुविधाजनक विकल्प बनकर उभर रहे हैं। REIT और फिजिकल रियल एस्टेट में जमीन-आसमान का फर्क है। अब कई निवेशक सीधे मकान, दुकान या ऑफिस खरीदने के बजाय REITs में निवेश करना ज्यादा पसंद कर रहे हैं, क्योंकि इसमें झंझट कम और सुविधा ज्यादा है।
REITs में सबसे बड़ा फायदा है लिक्विडिटी
REITs का सबसे बड़ा फायदा इसकी लिक्विडिटी यानी तुरंत खरीद-बिक्री की सुविधा है। REITs के यूनिट्स शेयर बाजार में आसानी से खरीदे और बेचे जा सकते हैं। वहीं अगर कोई व्यक्ति फिजिकल प्रॉपर्टी खरीदता है तो उसे बेचने में कई महीने लग सकते हैं। इसके अलावा प्रॉपर्टी खरीदने और बेचने की प्रक्रिया में कानूनी कागजात, रजिस्ट्रेशन और ब्रोकर जैसी कई परेशानियां भी होती हैं। एक्सपर्ट्स के मुताबिक REITs में निवेशक छोटी रकम से भी शुरुआत कर सकते हैं। कोई भी व्यक्ति सिर्फ एक यूनिट खरीदकर निवेश शुरू कर सकता है, जबकि फिजिकल प्रॉपर्टी खरीदने के लिए बड़ी पूंजी की जरूरत होती है।
डाइवर्सिफिकेशन से कम होता है जोखिम
REITs का पोर्टफोलियो कई शहरों और अलग-अलग लोकेशन में फैला होता है। इससे निवेशकों का जोखिम कम हो जाता है। अगर किसी एक शहर या प्रोजेक्ट में खाली जगह ज्यादा हो जाए तो दूसरे प्रोजेक्ट्स से मिलने वाला किराया आय को स्थिर बनाए रखता है। इसके विपरीत, अगर किसी व्यक्ति ने सिर्फ एक फ्लैट या दुकान में निवेश किया है और वह खाली पड़ जाए तो उसकी आय पूरी तरह रुक सकती है।
प्रोफेशनल मैनेजमेंट से निवेशकों को राहत
REITs की प्रॉपर्टी को प्रोफेशनल और अनुभवी कंपनियां मैनेज करती हैं। बड़े ग्लोबल एसेट मैनेजर इन संपत्तियों की देखरेख करते हैं। इसके लिए आमतौर पर करीब 3 प्रतिशत मैनेजमेंट फीस और 1 प्रतिशत ऑपरेशनल फीस ली जाती है। इससे निवेशकों को किरायेदार ढूंढने, मेंटेनेंस कराने या रोजमर्रा के संचालन की चिंता नहीं करनी पड़ती। REITs बड़े स्तर पर काम करते हैं, इसलिए उन्हें किरायेदारों, वेंडर्स और ब्रोकरों के साथ बेहतर डील करने की ताकत भी मिलती है।
भारत में तेजी से बढ़ रहा है REIT बाजार
एक्सपर्ट्स के मुताबिक भारत के REIT सेक्टर को लेकर सकारात्मक तस्वीर पेश की। 2019 में देश में पहला REIT लिस्ट हुआ था और तब से इस सेक्टर ने तेजी से विकास किया है। कोविड जैसी चुनौतियों के बावजूद REIT बाजार लगातार मजबूत हुआ है।पिछले पांच वर्षों में REITs ने निवेशकों को करीब 30,000 करोड़ रुपये का डिविडेंड दिया है। वर्तमान में REITs के तहत करीब 1,175 मिलियन वर्गफुट रियल एस्टेट मैनेज किया जा रहा है। इस सेक्टर का मार्केट कैप करीब 1.65 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच चुका है, जबकि एसेट अंडर मैनेजमेंट करीब 2.5 लाख करोड़ रुपये है।
निवेशकों की संख्या में बड़ा उछाल
REITs में निवेश करने वालों की संख्या भी तेजी से बढ़ी है। साल 2019 में जहां केवल करीब 6,000 यूनिट होल्डर्स थे, वहीं अब यह संख्या करीब 4 लाख तक पहुंच गई है। इसमें सिर्फ विदेशी निवेशक ही नहीं बल्कि म्यूचुअल फंड, पेंशन फंड, बीमा कंपनियां जैसे Life Insurance Corporation of India, हाई नेटवर्थ इंडिविजुअल्स (HNIs) और रिटेल निवेशक भी शामिल हैं।
भारत में REITs के लिए अभी काफी संभावनाएं
वैश्विक बाजारों की तुलना में भारत में REITs के विकास की अभी काफी गुंजाइश है। दुनियाभर में लिस्टेड रियल एस्टेट में REITs की हिस्सेदारी करीब 57 प्रतिशत है, जबकि भारत में यह केवल 20 प्रतिशत के आसपास है। जापान में करीब 58 REITs और अमेरिका में करीब 225 REITs मौजूद हैं, जबकि भारत में अभी सिर्फ 5 REITs हैं। उनका मानना है कि अगले पांच वर्षों में भारत में REITs की संख्या दहाई के आंकड़े तक पहुंच सकती है।
भविष्य में नए सेक्टर्स में भी आएंगे REITs
एक्सपर्ट के मुताबिक आने वाले समय में भारत में REITs सिर्फ कमर्शियल और रिटेल प्रॉपर्टी तक सीमित नहीं रहेंगे। भविष्य में डेटा सेंटर, लॉजिस्टिक्स, हॉस्पिटैलिटी, अस्पताल, एजुकेशन और रेजिडेंशियल प्रोजेक्ट्स जैसे क्षेत्रों में भी REITs देखने को मिल सकते हैं। भारत में REITs अब प्रूफ ऑफ कॉन्सेप्ट से आगे बढ़कर एक मजबूत और भरोसेमंद निवेश विकल्प बन चुके हैं। निवेशकों के लिए यह पारंपरिक प्रॉपर्टी निवेश की तुलना में ज्यादा पारदर्शी, आसान और आधुनिक विकल्प साबित हो रहा है।
(डिस्क्लेमर: यह आर्टिकल सिर्फ जानकारी के लिए है, निवेश की सलाह नहीं है, अगर आपको निवेश करना है तो एक्सपर्ट से संपर्क करें।)
