अडाणी-हिंडनबर्ग मामले (Adani-Hindenburg case) और कॉरपोरेट गवर्नेंस के मुद्दे पर केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण (Nirmala Sitharaman) ने कहा कि नियामकों (Regulators) को समय पर कार्रवाई करनी चाहिए और बाजारों को स्थिर रखने के लिए काम करना चाहिए। भारत के विनियामक कार्यों को सर्वोत्तम बनाए रखने के लिए कानून हैं। नियामकों को हमेशा सतर्क रहना चाहिए। साथ ही उन्होंने कहा कि नियामक अपना काम करेंगे। दरअसल विशेष परिस्थिति में बाजार को अच्छी तरह से विनियमित रखने के लिए सेबी प्राधिकरण है और उसके पास उस प्रमुख स्थिति को बरकरार रखने का साधन है। नियामक हैं वो अपना काम करेंगे। आरबीआई ने बयान दिया, उससे पहले बैंकों, एलआईसी ने बाहर आकर अपने एक्सपोजर (अडानी समूह को) के बारे में बताया। सरकार को स्वतंत्र नियामक, जो उचित है उसे करने के लिए उन्हें खुद पर छोड़ दिया है ताकि बाजार अच्छी तरह से विनियमित हो।
निर्मला सीतारमण ने कहा कि अडाणी द्वारा एफपीओ वापस लेने के मद्देनजर वैश्विक वित्तीय बाजार में भारत की स्थिति पर वित्त मंत्री ने कहा कि एफपीओ आते हैं और निकल जाते हैं। उतार-चढ़ाव हर बाजार में हैं। तथ्य यह है कि पिछले कुछ दिनों में हमारे पास 8 बिलियन (विदेशी मुद्रा भंडार) आया है, यह साबित करता है कि भारत और इसकी ताकत के बारे में धारणा बरकरार है। हमारे मैक्रोइकॉनॉमिक फंडामेंटल या अर्थव्यवस्था की छवि प्रभावित नहीं हुई है।
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि अडाणी समूह के 20,000 करोड़ रुपए का एफपीओ वापस लेने से देश की वृहत आर्थिक बुनियाद और अर्थव्यवस्था की छवि प्रभावित नहीं हुई है। एफपीओ आते रहे हैं और एफआईआई बाहर निकलते रहते हैं। उन्होंने कहा कि अडाणी मामले में नियामक अपना काम करेंगे। भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) के पास बाजारों की स्थिरता सुनिश्चित करने के साधन हैं।
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