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मंदी का खतरा:अब देश कर रहे हैं डिफॉल्ट,40 साल में सबसे ज्यादा मामले,चीन पर भी छाया संकट

  • Authored by: प्रशांत श्रीवास्तव
  • Updated Apr 20, 2023, 06:28 PM IST

Moody's report on Countries default:पिछले 40 साल में 2022 के दौरान देशों के डिफॉल्ट के सबसे ज्यादा मामले आए हैं। इससे ज्यादा चिंता का बात यह है कि दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी इकोनॉमी चीन में भी सब कुछ अच्छा नहीं चल रहा है उसके कई सेक्टर के डूबने का खतरा बढ़ गया है।

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देशों ने शुरू किया डिफॉल्ट

Moody's report on Countries default:दुनिया में क्या मंदी आने वाली है? ऐसा सवाल इसलिए उठ रहा है क्योंकि अब व्यक्ति, कंपनी, कोई खास सेक्टर नहीं बल्कि देश डिफॉल्ट कर रहे हैं। यानी देशों के पास इतना पैसा भी नहीं रह गया है कि वह अपनी ब्याज की देनदारियां और रोजमर्रा के जरुरी खर्च का पेमेंट कर सकें। चिंता की बात यह है कि पिछले 40 साल में 2022 के दौरान देशों के डिफॉल्ट के सबसे ज्यादा मामले आए हैं। इससे ज्यादा चिंता का बात यह है कि दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी इकोनॉमी चीन में भी सब कुछ अच्छा नहीं चल रहा है उसके कई सेक्टर के डूबने का खतरा बढ़ गया है।

साल 2022 में सात देशों ने किया डिफॉल्ट

मूडीज की रिपोर्ट के अनुसार साल 2022 में रुस,माली, श्रीलंका, बेलारूस, अल स्लवाडोर, यूक्रेन और घाना सहित 7 देशों ने सॉवरेन डिफॉल्ट किया है। जो कि साल 1983 के बाद का किसी एक साल में सबसे ज्यादा डिफॉल्ट है। यह सिलसिला साल 2023 में भी थमा नही है। रिपोर्ट के अनुसार अर्जेंटीना और मोजाम्बिक भी डिफॉल्ट कर चुके हैं। साफ है कि संकट सुधरने की जगह गहरा रहा है। इसके अलावा पाकिस्तान और बांग्लादेश के भी हालात ठीक नहीं है। साफ है कि दुनिया के हर इलाके में आर्थिक संकट गहरा रहा है।

देशरेटिंग
रुसरेटिंग हटी
मालीCAA2 Stable
श्रीलंकाCA stable
बेलारुसCA Negative
अल स्लवाडोरCAA3 Stable
घानाCA stable
यूक्रेनCA stable
अर्जेंटीनाCA stable
मोजाम्बिकCAA2 Positive

हालांकि रुस को छोड़कर ज्यादातर डिफॉल्ट करने वाले देश छोटे हैं। और उन्होंने सॉवरेन डिफॉल्ट किया है, ऐसे में उसका ग्लोबल इकोनॉमी पर तुरंत ज्यादा असर नहीं होगा। लेकिन एक बात तय है कि अगले एक-दो साल इसके साये में बीतेंगे।

चीन में बढ़ा रिस्क

ईटी की रिपोर्ट के अनुसार चीन में एक नया संकट खड़ा हो रहा है। उसके अनुसार वहां के प्रॉपर्टी, एनर्जी और ट्रांसपोर्ट सेक्टर पर जोखिम बढ़ा है। इन सेक्टर की रेटिंग CAA से नीचे हैं। हालांकि मूडीज का यह भी कहा है कि उभरती इकोनॉमी में विकसित देशों की तुलना में डिफॉल्ट कम है। वहीं जहां तक भारत की बात है तो उसकी इकोनॉमी पर सबसे कम खतरा है। और वह सभी उभरती इकोनॉमी में सबसे बेहतर प्रदर्शन करेगा।

प्रशांत श्रीवास्तव
प्रशांत श्रीवास्तवauthor

करीब 17 साल से पत्रकारिता जगत से जुड़ा हुआ हूं। और इस दौरान मीडिया की सभी विधाओं यानी टेलीविजन, प्रिंट, मैगजीन, डिजिटल और बिजनेस पत्रकारिता में काम करने का मौका मिला। इस समय Timesnowhindi.com में टीम लीड के रुप में बिजनेस, ऑटो, यूटीलिटी, टेक सेक्शन में अपना योगदान दे रहा हूं। करियर का पहला ब्रेक हैदराबाद स्थित मीडिया संस्थान ईटीवी से टेलीविजन के जरिए हुआ। यहां पर टेलीविजन पत्रकारिता की बारीकियों को समझने का मौका मिला। और उसके बाद अगला पड़ाव दिल्ली स्थित दैनिक भास्कर समूह का बिजनेस भास्कर रहा। यहां से बिजनेस पत्रकारिता में कदम रखा। और यह सफर वित्त मंत्रालय की रिपोर्टिंग से लेकर बैंकिंग, इंश्योरेंस, ऑटो, एफएमसीजी, एमएमएमई, टेलीकॉम सेक्टर की ग्राउंड रिपोर्ट से लेकर कॉरपोरेट जगत की खबरें और इकोनॉमी से जुड़ी खबरों से गुजरते हुए अमर उजाला, मनी भास्कर वेबसाइट से होकर आउटलुक मैगजीन पहुंचा। यहां पर पॉलिटिकल खबरों को करने का मौका मिला। आउटलुक में रहते हुए भाजपा और कांग्रेस पार्टी को भी कवर किया। इस दौरान दिल्ली दंगों पर ग्राउंड रिपोर्ट से लेकर सीएए आंदोलन, किसान आंदोलन और कृषि जगत, वाइल्ड लाइफ से जुड़ी ग्राउंड रिपोर्ट भी करने का मौका मिला। करियर के इस सफर में 2014 लोक सभा चुनाव, 2019 लोक सभा चुनाव, इसके अलावा उत्तर प्रदेश विधान सभा चुनाव, राजस्थान विधान सभा, मध्य प्रदेश विधान सभा चुनाव की ग्राउंड रिपोर्ट भी की। पिछले 16 साल से केंद्रीय बजट की बारीकियों को समझकर उसे आम भाषा में लोगों तक पहुंचाने का भी प्रयास किया है। 17 साल के करियर में करीब 10 साल डिजिटल मीडिया का अनुभव रहा है। पिछले 3 साल से टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहा हूं। पत्रकारिता का ककहरा माखन लाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय भोपाल से सीखा है।

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