बजट 2026 से रियल एस्टेट सेक्टर को क्या हैं उम्मीदें?
- Authored by: रामानुज सिंह
- Updated Jan 22, 2026, 11:27 AM IST
Budget 2026 Expectations: केंद्र सरकार 1 फरवरी को आम बजट 2026-27 पेश करने जा रही है। बजट से पहले देशभर में अलग-अलग सेक्टर्स की उम्मीदें और सुझाव जोर पकड़ रहे हैं। रियल एस्टेट, शेयर बाजार, एमएसएमई, महिलाएं और वरिष्ठ नागरिक इनसे जुड़े मुद्दों पर विशेषज्ञों ने अपनी राय दी है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि बजट से कई क्षेत्रों में राहत और सुधार की उम्मीद है।
बजट 2026-27 से उम्मीदें (तस्वीर-istock)
Budget 2026 Expectations: केंद्र सरकार 1 फरवरी को आम बजट 2026-27 पेश करने जा रही है। बजट से पहले देशभर के अलग-अलग सेक्टर्स में उम्मीदों और सुझावों की चर्चा तेज हो गई है। रियल एस्टेट, शेयर बाजार, एमएसएमई, महिलाओं और वरिष्ठ नागरिकों के लिए बजट में क्या नया हो सकता है, इस पर विशेषज्ञों ने अपनी राय दी है।
रियल एस्टेट सेक्टर की मांगें
न्यूज एजेंसी आईएएनएस के मुताबिक ईस्टर्न बिहार इंडस्ट्रीज एसोसिएशन के अध्यक्ष गोविंद अग्रवाल का कहना है कि रियल एस्टेट सेक्टर हर आम आदमी को सीधे प्रभावित करता है। यह सेक्टर देश की जीडीपी में करीब 7 प्रतिशत का योगदान देता है और कृषि के बाद सबसे ज्यादा रोजगार देता है। उन्होंने कहा कि बजट में अफोर्डेबल हाउसिंग की परिभाषा पर दोबारा विचार होना चाहिए। वर्तमान में 45 लाख रुपए तक के घर को अफोर्डेबल माना जाता है, लेकिन आज के समय में यह सीमा बढ़ाकर 75 लाख रुपए की जानी चाहिए। इससे ज्यादा लोगों को इसका लाभ मिलेगा।
न्यूज एजेंसी आईएएनएस के मुताबिक गोविंद अग्रवाल ने जीएसटी इनपुट टैक्स क्रेडिट की भी मांग की। उनके अनुसार, बिल्डर्स को इनपुट टैक्स का लाभ नहीं मिलने से निर्माण लागत बढ़ जाती है और इसका सीधा असर घर की कीमतों पर पड़ता है। अगर सरकार इनपुट टैक्स क्रेडिट देती है, तो मकानों की कीमत घटेगी और मध्यम वर्ग के लिए घर खरीदना आसान होगा। इसके अलावा, उन्होंने ब्याज दरों में कमी और होम लोन पर इनकम टैक्स में अतिरिक्त राहत की भी उम्मीद जताई।
न्यूज एजेंसी आईएएनएस के मुताबिक भागलपुर के चार्टर्ड अकाउंटेंट और अर्थशास्त्री प्रदीप झुनझुनवाला ने कहा कि बजट आम जनता तक आसानी से पहुंचना चाहिए। उन्होंने वरिष्ठ नागरिकों के लिए विशेष टैक्स राहत की मांग की। उनका कहना है कि सीनियर सिटीजन्स के लिए टीडीएस की सीमा और टैक्स-फ्री इनकम की सीमा बढ़ाई जानी चाहिए। इसके साथ ही रियल एस्टेट सेक्टर में टैक्स छूट की सीमा भी बढ़ाकर कम से कम एक करोड़ रुपए की जानी चाहिए।
प्रदीप झुनझुनवाला ने लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन टैक्स में बदलाव की जरूरत भी बताई। मौजूदा समय में एक लाख रुपए की छूट बहुत कम है, इसे बढ़ाकर कम से कम पांच लाख रुपए करना चाहिए। इसके अलावा, उन्होंने बुनकरों, टेक्सटाइल सेक्टर, कृषि आधारित उद्योग और टूरिज्म सेक्टर को भी बजट में प्राथमिकता देने की मांग की।
शेयर बाजार में राहत की उम्मीद
टैक्स एक्सपर्ट और चार्टर्ड अकाउंटेंट संजय कुमार सकल का कहना है कि वैश्विक स्तर पर अनिश्चितता और टैरिफ तनाव के चलते शेयर बाजार पर दबाव बना हुआ है। पिछले कुछ समय से बाजार में काफी उतार-चढ़ाव देखा गया है। उन्होंने बताया कि पिछले दो साल से बाजार लगातार गिर रहा है, पहले युद्ध का प्रभाव था और फिर टैरिफ ने बाजार को प्रभावित किया। उन्होंने कहा कि इस बजट से उम्मीद है कि निवेशकों को फायदा मिलेगा, खासकर कैपिटल गेन टैक्स को लेकर। पहले लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन टैक्स नहीं लगता था। इसके बाद इसे 10 प्रतिशत और फिर 12.5 प्रतिशत कर दिया गया। अगर इस टैक्स को कम किया जाए या खत्म किया जाए, तो निवेशकों का भरोसा बढ़ेगा और बाजार को सहारा मिलेगा।
महिलाओं के लिए बजट में सुधार की जरुरत
न्यूज एजेंसी आईएएनएस के मुताबिक महिला उद्यमी प्रिया सोनी ने कहा कि मौजूदा सरकार ने महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए कई योजनाएं शुरू की हैं, जिससे महिलाएं आत्मनिर्भर बन रही हैं। लेकिन ग्रामीण और पिछड़े इलाकों में अभी भी जागरूकता की कमी है। उन्होंने सुझाव दिया कि योजनाओं की जानकारी सरल भाषा में पोस्टर और अभियानों के जरिए दी जानी चाहिए, ताकि हर महिला इसका लाभ उठा सके।
प्रिया सोनी ने महंगाई के मुकाबले महिलाओं को मिलने वाली सहायता राशि में बढ़ोतरी की भी मांग की। मातृत्व वंदन योजना और पोषण योजनाओं की राशि बढ़ाई जानी चाहिए। इसके अलावा, महिला उद्यमियों के लिए सिर्फ फंडिंग ही नहीं, बल्कि मार्केटिंग सपोर्ट और अलग महिला बाजार की व्यवस्था भी होनी चाहिए। इससे महिलाएं अपने उत्पाद आसानी से बेच सकेंगी और आर्थिक रूप से मजबूत होंगी।
इस तरह, बजट 2026-27 से पहले विशेषज्ञों की राय में कई महत्वपूर्ण सेक्टर्स की जरुरतों को शामिल करने की आवश्यकता है। रियल एस्टेट सेक्टर, शेयर बाजार, वरिष्ठ नागरिक, महिला उद्यमी और एमएसएमई के लिए विशेष प्रावधान और राहत उपाय जरूरी हैं। ये कदम न केवल आर्थिक वृद्धि को बढ़ाएंगे, बल्कि आम जनता और छोटे निवेशकों के भरोसे को भी मजबूत करेंगे।
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