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RBI के ट्रेजरी बिल ऑक्शन से मिला बड़ा संकेत, क्या MPC देगी रेट कट का तोहफा?

रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति की बैठक के नतीजे 5 जून को सामने आ जाएंगे। हालांकि, इससे पहले ट्रेजरी बिल ऑक्शन में एक बड़ा संकेत देखने को मिला है, जो ब्याज दरों में नरमी का संकेत देता है।

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ब्याज दरों को लेकर मिला बड़ा संकेत

RBI MPC की बैठक 3 जून से शुरु हुई। 5 जून शुक्रवार को रिजर्व बैंक के गवर्नर संजय मल्होत्रा बैठक के फैसलों की जानकारी सार्वजनिक करेंगे। हालांकि, इससे पहले RBI ने ट्रेजरी बिल ऑक्शन के दौरान एक ऐसा संकेत दिया है, जो आने वाले दिनों में रेट कट की उम्मीद बढ़ा रहा है। TOI की रिपोर्ट के मुताबिक रिजर्व बैंक ने बुधवार को 182 दिन और 364 दिन की ट्रेजरी बिल नीलामी में आई सभी बोलियों को ठुकरा दिया। इस दौरान सिर्फ 91 दिन की ट्रेजरी बिल बिक्री को मंजूरी दी गई। इन ट्रेजरी बिल्स को 5.56% यील्ड पर बेचा गया है। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि RBI इस तरह से शॉर्ट टर्म बॉन्ड यील्ड में हो रही तेजी को कंट्रोल करना चाहता है।

क्यों ठुकराईं गईं बोलियां?

आमतौर पर रिजर्व बैंक की तरफ से ट्रेजरी बिल की बोलियां खारिज करने जैसे एक्शन तब लिए जाते हैं, जब निवेशकों की मांगें बहुत ज्यादा होती है। इससे बाजार को यह संकेत भी मिलता है कि RBI ब्याज दरों और ट्रेजरी बिल/बॉन्ड्स की यील्ड को कम रखना चाहता है। दिलचस्प बात यह है कि

रिजर्व बैंक की तरफ से ट्रेजरी बिल की बोलियों को उस समय खारिज किया गया है, जब मौद्रिक नीति समिति की बैठक चल रही है और शुक्रवार को ब्याज दरों पर फैसला आने वाला है। हालांकि, बाजार में आम राय यही है कि RBI इस बार रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं करेगा। लेकिन, यह आगे के लिए अहम संकेत हो सकता है।

बॉन्ड बाजार पर दिखा फैसले का असर

RBI की तरफ से बुधवार को उठाए गए फैसले का असर सरकारी बॉन्ड यील्ड पर तुरंत देखने को मिला है। इस फैसले के बाद एक साल की सरकारी सिक्योरिटीज की यील्ड लगभग 40 बेसिस पॉइंट बढ़ गई है। पिछले सप्ताह 364 दिन की ट्रेजरी बिल यील्ड और रेपो रेट के बीच का अंतर 78 बेसिस पॉइंट तक पहुंच गया था, जो चार साल में सबसे ज्यादा था। इससे पता चलता है कि बाजार में इन सिक्योरिटीज की मांग कमजोर हो रही थी और निवेशक अधिक रिटर्न की मांग कर रहे थे।

SBI चेयरमैन की राय

मुंबई में सिटीबैंक के एक कार्यक्रम में SBI के चेयरमैन सीएस सेट्टी ने कहा कि रिजर्व बैंक की तरफ से मौजूदा स्थिति में ब्याज दरों को स्थिर बनाए रखना ही ओवरआॉल अर्थव्यवस्था के लिए बेहतर होगा। सेट्टी के मुताबिक महंगाई अब भी एक बड़ा मसला है, लेकिन बाजार की अपेक्षा है कि दरों में कोई बदलाव नहीं किया जाए।

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Yateendra Lawaniya
यतींद्र लवानिया author

प्रिंट और डिजिटल मीडिया में बिजनेस एवं इकोनॉमी कैटेगरी में 10 वर्षों से अधिक का अनुभव। पिछले 7 वर्षों से शेयर बाजार, कॉरपोरेट सेक्टर और आर्थिक नीतियों... और देखें

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