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बैंकों को लेकर RBI का बड़ा फैसला, 22 साल बाद फिर करेगा वो काम, जिस पर वर्ष 2004 में लगा दी गई थी रोक

Urban Cooperative Banks: भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) 22 साल बाद शहरी सहकारी बैंकों को नए लाइसेंस देगा और ग्रामीण बैंक नियमों की भी समीक्षा करेगा।

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आरबीआई 22 साल बाद शहरी सहकारी बैंकों को नए लाइसेंस देगा, ग्रामीण बैंक नियमों की भी होगी समीक्षा

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Urban Cooperative Banks : भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के गवर्नर संजय मल्होत्रा (Sanjay Malhotra) ने अगस्त मौद्रिक नीति समिति (MPC) की बैठक के बाद सहकारी बैंकिंग क्षेत्र को मजबूत करने और ग्राहकों के हित में तीन बड़े फैसलों की घोषणा की है। केंद्रीय बैंक 22 वर्षों के लंबे अंतराल के बाद शहरी सहकारी बैंकों (यूसीबी) को नए लाइसेंस देने की प्रक्रिया शुरू करने जा रहा है। इसके साथ ही, ग्रामीण सहकारी बैंकों के क्रेडिट मॉनिटरिंग फ्रेमवर्क की समीक्षा की जाएगी और सभी वित्तीय संस्थानों के लिए ब्याज दरों का एक समान ढांचा तैयार किया जाएगा।

22 साल बाद फिर शुरू होगी शहरी सहकारी बैंकों की लाइसेंसिंग

आरबीआई ने वर्ष 2004 में शहरी सहकारी बैंकों (UCB) को नए लाइसेंस जारी करने पर रोक लगा दी थी। उस समय यह देखा गया था कि लाइसेंस मिलने के कम ही समय के भीतर कई नए बैंक वित्तीय रूप से कमजोर और बदहाल हो रहे थे। हालांकि 2004 के बाद से ऑपरेटिंग परिवेश और बैंकिंग परिदृश्य में बड़े बदलाव आए हैं। आरबीआई ने बताया कि इस क्षेत्र के सुधारों और हितधारकों से मिले फीडबैक के आधार पर लाइसेंसिंग फिर से शुरू करने के लिए जल्द ही ड्राफ्ट दिशानिर्देश जारी किए जाएंगे।

भारत में शहरी सहकारी बैंकों की मौजूदा स्थिति

संख्या के लिहाज से देखा जाए तो आरबीआई द्वारा विनियमित बैंकों में यूसीबी सबसे बड़ा समूह हैं। वर्ष 1993 से 2001 के बीच आरबीआई ने 823 यूसीबी लाइसेंस जारी किए थे। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार 31 मार्च 2025 तक देश में शहरी सहकारी बैंकों की कुल संख्या 1,457 थी। यूसीबी को पहली बार 1966 में बैंकिंग विनियमन अधिनियम, 1949 में संशोधन के जरिए आरबीआई के दायरे में लाया गया था। किसी भी सहकारी समिति को बैंकिंग कारोबार चलाने के लिए इस अधिनियम के तहत आरबीआई से लाइसेंस लेना अनिवार्य होता है।

ग्रामीण सहकारी बैंकों के लिए क्रेडिट मॉनिटरिंग का रिव्यू

आरबीआई ग्रामीण सहकारी बैंकों के लिए क्रेडिट मॉनिटरिंग अरेंजमेंट की व्यापक समीक्षा कर नए दिशानिर्देश जारी करेगा। ग्रामीण बैंकों के लिए मौजूदा क्रेडिट मॉनिटरिंग व्यवस्था को आखिरी बार 2008 में संशोधित किया गया था। पिछले 18 वर्षों में बैंकिंग क्षेत्र में आए बदलावों, नई तकनीकों और जमीनी अनुभवों को ध्यान में रखते हुए इस पूरे ढांचे को नए सिरे से अपडेट किया जा रहा है, ताकि ग्रामीण क्षेत्रों में ऋण वितरण और उसकी निगरानी को बेहतर बनाया जा सके।

ब्याज दरों के लिए बनेगा पारदर्शी और एक समान नियम

लेंडिंग रेट्स (कर्ज की ब्याज दरों) में पारदर्शिता लाने और उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा के लिए आरबीआई ने एक महत्वपूर्ण प्रस्ताव रखा है। इसके तहत आरबीआई द्वारा विनियमित सभी वित्तीय संस्थाओं के लिए एडवांस पर ब्याज दरों से जुड़े नियमों को मानकीकृत (स्टैंडर्डाइज) और सुव्यवस्थित किया जाएगा। इसका सीधा उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि अलग-अलग बैंकों या वित्तीय संस्थानों से कर्ज लेने वाले ग्राहकों को स्पष्ट, पारदर्शी और न्यायसंगत ब्याज दरों का लाभ मिल सके।

रेपो रेट 5.25% पर स्थिर, विकास दर का अनुमान बढ़ा

ये सभी घोषणाएं मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) की बैठक के समापन के साथ की गईं, जिसमें मुख्य नीतिगत दर यानी रेपो रेट को 5.25% पर अपरिवर्तित रखने और अपने 'न्यूट्रल' रुख को बनाए रखने का निर्णय लिया गया। इसके अलावा, मजबूत घरेलू आर्थिक गतिविधियों और पहली तिमाही के बेहतर प्रदर्शन को देखते हुए आरबीआई ने वित्त वर्ष 2026-27 (FY27) के लिए भारत की जीडीपी विकास दर के अनुमान को 6.6% से बढ़ाकर 6.7% कर दिया है।

पश्चिम एशिया संघर्ष के बीच अर्थव्यवस्था में मजबूती

आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा कि पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष और वैश्विक अनिश्चितताओं के कारण वैश्विक आर्थिक परिस्थितियां प्रभावित हो रही हैं। इस वैश्विक तनाव का असर भारत के विकास और मुद्रास्फीति (महंगाई) के परिदृश्य पर भी पड़ा है, लेकिन भारत की मजबूत व्यापक आर्थिक बुनियाद (मैक्रोइकोनॉमिक फंडामेंटल्स) इस वैश्विक झटके का सामना करने में मदद कर रही है। उन्होंने कहा कि केंद्रीय बैंक टिकाऊ विकास, उपभोक्ता संरक्षण, मूल्य स्थिरता और वित्तीय तंत्र की स्थिरता बनाए रखने के लिए हर आवश्यक कदम उठाना जारी रखेगा।

Ramanuj Singh
रामानुज सिंहauthor

रामानुज सिंह पत्रकारिता में दो दशकों का व्यापक और समृद्ध अनुभव रखते हैं। उन्होंने टीवी और डिजिटल—दोनों ही प्लेटफॉर्म्स पर काम करते हुए बिजनेस, पर्सनल फाइनेंस, शेयर बाजार, इनकम टैक्स, बैंकिंग, बुलियन और कमोडिटी मार्केट जैसे विषयों पर गहरी विशेषज्ञता विकसित की है। जर्नलिज्म में एमए की डिग्री और वर्षों के अनुभव से विकसित विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण के साथ, रामानुज जटिल वित्तीय विषयों को सरल, विश्वसनीय और प्रभावी तरीके से पाठकों तक पहुंचाने के लिए जाने जाते हैं। अब तक वे 22,000 से अधिक स्टोरीज लिख चुके हैं।

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