Health Insurance Updates: हेल्थ इंश्योरेंस तो बहुत से लोग लेते हैं लेकिन जब क्लेम की बात आती है तो बहुत से लोग तनाव की स्थिति में रहते हैं और क्लेम की प्रक्रिया को लेकर कंफ्यूज रहते हैं। अगर आपने भी हेल्थ इंश्योरेंस लिया है तो आपको भी इंश्योरेंस रेगुलेटर IRDAI के हेल्थ इंश्योरेंस से जुड़े नियमों की जानकारी होनी चाहिए-
रिक्वेस्ट मिलने के बाद तुरंत लेना होगा फैसला
IRDAI के मौजूदा हेल्थ इंश्योरेंस फ्रेमवर्क के मुताबिक, कैशलेस प्री-ऑथराइजेशन रिक्वेस्ट मिलने के बाद इंश्योरर को तुरंत और अधिकतम एक घंटे के भीतर फैसला करना होता है। वहीं, अस्पताल से डिस्चार्ज ऑथराइजेशन रिक्वेस्ट मिलने के बाद अंतिम मंजूरी देने के लिए इंश्योरर के पास अधिकतम तीन घंटे का समय होता है। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि अस्पताल का पूरा बिल अपने आप इंश्योर हो जाएगा। मंजूर होने वाली रकम पॉलिसी के कवरेज, एक्सक्लूजन, डिडक्टिबल, को-पेमेंट और अन्य शर्तों पर निर्भर करती है।
रिइम्बर्समेंट क्लेम में भी टाइम लिमिट
अगर पॉलिसीधारक पहले अस्पताल का खर्च खुद चुकाकर बाद में रिइम्बर्समेंट क्लेम करता है तो इसके लिए भी पहले से समय सीमा तय है। IRDAI के अनुसार, जरूरी आखिरी डॉक्यूमेंट मिलने के बाद इंश्योरर को सामान्य स्थिति में 30 दिनों के भीतर क्लेम सेटल या रिजेक्ट करना चाहिए। अगर जांच जरूरी है तो उसे जल्द से जल्द और अधिकतम 30 दिनों के भीतर पूरा किया जाना चाहिए और इसके बाद क्लेम 45 दिनों के भीतर सेटल किया जाना चाहिए। इसलिए आप डॉक्यूमेंट किस तारीख को सबमिट कर रहे हैं, इस बात का भी रिकॉर्ड रखें।
बार-बार न मांगे जाएं जरूरी डॉक्यूमेंट्स
IRDAI के अनुसार, पॉलिसी की शर्तों में जरूरी नहीं बताए गए डॉक्यूमेंट्स को सामान्य तौर पर आवश्यक नहीं माना जाना चाहिए। इंश्योरर को जरूरी डॉक्यूमेंट्स एक साथ मांगने चाहिए, न कि बार-बार अलग-अलग कागजात मांगकर प्रक्रिया लंबी करनी चाहिए। हालांकि, मेडिकल बिल, डिस्चार्ज समरी, प्रिस्क्रिप्शन और पॉलिसी में बताए गए दूसरे जरूरी डॉक्यूमेंट देना फिर भी जरूरी है।
क्लेम रिजेक्ट हो तो जानें कारण
अगर क्लेम रिजेक्ट या रिप्यूडिएट किया जाता है, तो इंश्योरर को इसका कारण स्पष्ट रूप से बताना चाहिए। साथ ही शिकायत निवारण की प्रक्रिया की जानकारी भी देनी होती है। यानी किसी ट्रीटमेंट को एक्सक्लूड बताकर क्लेम रोका गया है तो पॉलिसीधारक संबंधित एक्सक्लूजन को खुद जांच सकता है।
जरूरत पड़े तो शिकायत आगे बढ़ाएं
अगर इंश्योरर की शिकायत निवारण प्रक्रिया से मामला हल नहीं होता और वह Insurance Ombudsman के दायरे में आता है, तो क्लेम में देरी या आंशिक/पूरी अस्वीकृति जैसे मामलों में शिकायत की जा सकती है। इसके अलावा 60 महीने के लगातार हेल्थ इंश्योरेंस कवरेज के बाद सामान्य तौर पर नॉन-डिस्क्लोजर या मिसरिप्रेजेंटेशन के आधार पर पॉलिसी और क्लेम को चुनौती नहीं दी जा सकती। सम इंश्योर्ड बढ़ाने पर बढ़ी हुई राशि के हिस्से के लिए 60 महीने की अवधि अलग लागू होती है।
