RBI ने बैंकिंग सिस्टम में डालेगा अरबों रुपये, क्यों और कहां से लाएगा पैसा?
- Authored by: रामानुज सिंह
- Updated Jan 24, 2026, 12:14 PM IST
RBI Bank Cash News: भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने घोषणा की कि वह विभिन्न माध्यमों के जरिए बैंकिंग प्रणाली में 2 लाख करोड़ रुपये से अधिक की नकदी प्रवाहित करेगा। केंद्रीय बैंक ने कहा कि मौजूदा नकदी और वित्तीय स्थिति की समीक्षा के बाद यह कदम उठाया गया है, ताकि बैंकिंग प्रणाली में पर्याप्त तरलता सुनिश्चित की जा सके।
आरबीआई बैंकिंग सिस्टम में डालेगा 2 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा की नकदी (तस्वीर-istock)
RBI Bank Cash News: भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने शुक्रवार (23 जनवरी 2026) को घोषणा की कि वह बैंकिंग सिस्टम में विभिन्न माध्यमों से 2 लाख करोड़ रुपये से अधिक की कैश डालेगा। यह कदम मौजूदा कैश और वित्तीय परिस्थितियों की समीक्षा के बाद उठाया गया है। केंद्रीय बैंक ने कहा कि इसका उद्देश्य बाजार में तरलता बढ़ाना और आर्थिक गतिविधियों को सुचारू रूप से चलाने में मदद करना है। आरबीआई के अनुसार कैश बढ़ाने के लिए कई उपाय किए जाएंगे। इनमें 30 जनवरी, 2026 को आयोजित होने वाली 25,000 करोड़ रुपये की 90 दिन की वेरिएबल रेट रेपो (VRR) नीलामी शामिल है। इसके अलावा 4 फरवरी 2026 को तीन साल की अवधि के लिए 10 अरब डॉलर यानी करीब 91,000 करोड़ रुपये की अमेरिकी डॉलर/भारतीय रुपया खरीद-बिक्री अदला-बदली नीलामी भी आयोजित की जाएगी।
ओपन मार्केट ऑपरेशन के जरिए सरकारी बॉन्ड खरीद
आरबीआई ने यह भी बताया कि वह ओपन मार्केट ऑपरेशन (OMO) के तहत कुल एक लाख करोड़ रुपये के सरकारी बॉन्ड खरीदेगा। यह खरीद पांच फरवरी और 12 फरवरी को दो हिस्सों में, हर बार 50,000 करोड़ रुपये के बॉन्ड की खरीद के रूप में की जाएगी। केंद्रीय बैंक ने स्पष्ट किया कि प्रत्येक उपाय के लिए विस्तृत निर्देश अलग से जारी किए जाएंगे। ओएमओ के जरिए सरकारी बॉन्ड खरीदने का मतलब है कि रिजर्व बैंक सीधे बाजार से बॉन्ड खरीदकर बैंकिंग सिस्टम में अतिरिक्त नकदी डाल रहा है। इससे बैंकों के पास लोन देने के लिए ज्यादा पैसा उपलब्ध होगा, जिससे लोन आसान और सस्ता हो सकता है।
कैश बढ़ाने के पीछे कारण
न्यू एजेंसी पीटीआई-भाषा के मुताबिक विशेषज्ञों के अनुसार, आरबीआई की यह कार्रवाई अर्थव्यवस्था में तरलता सुनिश्चित करने और वित्तीय बाजार को स्थिर बनाए रखने के उद्देश्य से की जा रही है। बाजार में पर्याप्त नकदी नहीं होने पर ब्याज दरों में उतार-चढ़ाव हो सकता है और आर्थिक गतिविधियों पर असर पड़ सकता है। इसीलिए केंद्रीय बैंक ने यह कदम उठाया है। वेरिएबल रेट रेपो (VRR) नीलामी का उद्देश्य बैंकों को शॉर्ट टर्म उपलब्ध कराना है। इसके जरिए बैंकों को 90 दिन के लिए लोन मिलता है, जिसे वे अपनी जरूरत के अनुसार उपयोग कर सकते हैं।
विदेशी मुद्रा अदला-बदली नीलामी
डॉलर या रुपया अदला बदली नीलामी के माध्यम से आरबीआई विदेशी मुद्रा बाजार में स्थिरता बनाए रखने की कोशिश करता है। इससे रुपये के मूल्य में अचानक उतार चढ़ाव को रोका जा सकता है और आयात-निर्यात कारोबार पर नकारात्मक असर कम होता है।
सरकारी बॉन्ड खरीद का महत्व
सरकारी बॉन्ड खरीदने से रिजर्व बैंक सीधे बैंकिंग सिस्टम में पैसा डालता है। इसका मतलब है कि बैंक ज्यादा लोन दे सकते हैं और बाजार में नकदी की कमी नहीं होगी। इससे व्यापार, उद्योग और उपभोक्ता खर्च को बढ़ावा मिलता है।
आरबीआई के ये कदम आर्थिक स्थिरता बनाए रखने और बैंकिंग प्रणाली में तरलता सुनिश्चित करने के लिए महत्वपूर्ण हैं। नकदी बढ़ाने के ये उपाय छोटे और बड़े व्यवसायों को मदद करेंगे और वित्तीय बाजार को संतुलित बनाए रखेंगे। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे आर्थिक विकास को बढ़ावा मिलेगा और वित्तीय प्रणाली में विश्वास बढ़ेगा।
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