भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने गलत तरीके से प्रोडक्ट बेचने (mis-selling), बिना मंजूरी के कई सर्विस एक साथ बेचने और धोखेबाज डिजिटल तरीकों जैसे मामलों पर नियम कड़े कर दिए हैं। नए नियम 1 जनवरी, 2027 से लागू होंगे। फरवरी में जारी अपनी ड्राफ्ट गाइडलाइंस में बैंकिंग रेगुलेटर ने 'मिस-सेलिंग' (गलत तरीके से बिक्री) की एक औपचारिक परिभाषा पेश की थी। इसमें कस्टमर की प्रोफाइल के हिसाब से गलत प्रोडक्ट्स बेचना, गुमराह करने वाली या अधूरी जानकारी देना, मंजूरी के बिना बेचना और प्रोडक्ट्स की 'अनिवार्य बंडलिंग' शामिल है।
आरबीआई ने क्या कहा है?
सेंट्रल बैंक ने कहा है कि बैंक को यह पक्का करना होगा कि चाहे अपने हों या किसी तीसरे पक्ष (थर्ड-पार्टी) के, प्रोडक्ट या सर्विस ग्राहक को केवल उनकी साफ सहमति से ही बेचे जाएं। यह सहमति साइन किए गए डिक्लेरेशन (फिजिकल या इलेक्ट्रॉनिक रूप में), OTP-आधारित मंजूरी, डिजिटल रूप से रिकॉर्ड की गई पुष्टि, या प्रोडक्ट/सर्विस के एग्रीमेंट के साफ तौर पर बताए गए हिस्से में शामिल सहमति आदि के जरिए ली जा सकती है।
इसके अलावा, अगर एक ही फॉर्म पर एक से ज्यादा प्रोडक्ट या सर्विस के लिए ग्राहक से सहमति ली जा रही है, तो हर प्रोडक्ट या सर्विस को साफ तौर पर बताना होगा और ग्राहक के पास सिर्फ अपनी पसंद का प्रोडक्ट या सर्विस चुनने का विकल्प होगा। इसके अलावा, बैंक को अपने बेचे गए किसी प्रोडक्ट या सर्विस के लिए मिली मंज़ूरी (कंसेंट) और उससे जुड़े रिकॉर्ड्स को, कॉन्ट्रैक्ट खत्म होने की तारीख से एक साल तक संभालकर रखना होगा। किसी भी यूज़र इंटरफ़ेस के ज़रिए मंज़ूरी लेने की प्रक्रिया को इस तरह से डिजाइन करना होगा कि RBI के निर्देशों के अनुसार, लागू होने वाली शर्तों और नियमों को पढ़े बिना यूजर मंज़ूरी न दे सके।
प्रोडक्ट बंडलिंग नहीं करना होगा
इसके अलावा, यह भी साफ कर दिया गया है कि कोई बैंक अपने प्रोडक्ट्स या सर्विसेज के साथ किसी तीसरे पक्ष (थर्ड पार्टी) के प्रोडक्ट्स को जबरदस्ती बंडल नहीं कर पाएगा। अगर बैंक के अपने किसी प्रोडक्ट या सर्विस की बिक्री किसी तीसरे पक्ष (थर्ड पार्टी) के प्रोडक्ट को खरीदने पर निर्भर करती है (ताकि जोखिम कम किया जा सके), तो अब ग्राहक को उसे खरीदने का विकल्प देना होगा।
आपको क्या फायदा होगा?
अभी तक कई बार बैंक से लोन लेने पर इंश्योरेंस खरीदने के लिए कहा जाता है। आप न चाहकर भी इंश्योरेंस खरीदने को मजबूर होते हैं। अब बैंक आपके साथ ऐसा नहीं कर पाएंगे। अगर आप सहमति नहीं देंगे तो बैंक आपको बंडल प्रोडक्ट नहीं बेच पाएंगे। इससे बैंकों की मनमानी पर रोक लगेगी। इतना ही नहीं, आप जो वित्तीय उत्पाद खरीदेंगे, उसकी पूरी जानकारी अब आसान भाषा में उपलब्ध करानी होगी। इससे मिस सेलिंग पर रोक लगेगी।
